धर्मशास्त्र की कहानियां
पानी पर चलना—विश्वास भय पर विजय पाता है


मत्ती 14:22–33

पानी पर चलना

विश्वास भय पर विजय पाता है

यीशु गलील सागर पर नाव को देखते हुए।

यीशु प्रार्थना करने के लिए कुछ समय अकेले में बिताना चाहता था। उसने अपने शिष्यों को नाव में बिठाकर गलील सागर के दूसरी ओर भेजा था। यीशु पहाड़ पर प्रार्थना करने गया था।

मत्ती 14:22–23

प्रेरित तूफान में फंस गए हैं।

उस रात हवा तेज थी और लहरें ऊंची उठ रही थीं। यीशु के शिष्यों ने नाव को समुद्र के दूसरी ओर ले जाने के लिए सारी रात कड़ी मेहनत की थी।

मत्ती 14:24–25

प्रेरित यीशु को पानी पर चलते हुए अपनी ओर आते हुए देखते हैं।

जब रात लगभग समाप्त हो गई, तो शिष्यों ने किसी को पानी पर चलते हुए अपनी ओर आते देखा था। उन्होंने सोचा कि यह कोई भूत था और वे डर गए थे। यह कोई भूत नहीं था; यह यीशु था! उसने उनसे कहा, “ढाढस बान्धो; मैं हूं; डरो मत।”

मत्ती 14:25–27

यीशु पतरस को पानी पर अपने पास आने के लिए आमंत्रित करता है।

पतरस ने यीशु से प्रार्थना की थी कि वह उसे पानी पर अपने पास बुलाए। यीशु ने कहा, “आ!” पतरस नाव से बाहर निकला और यीशु की तरह पानी पर चलने लगा!

मत्ती 14:28–29

पतरस भयभीत हो जाता है और डूबने लगता है।

लेकिन जब पतरस ने तेज हवा और ऊंची लहरें देखीं, तो वह डर गया था। वह पानी में डूबने लगा था। उसने यीशु को पुकारा, “हे प्रभु, मुझे बचा।”

मत्ती 14:30

यीशु हाथ बढ़ाकर पतरस को पकड़ लेता है।

यीशु ने हाथ बढ़ाकर पतरस को थाम लिया था। उसने पतरस से पूछा कि उसने उस पर भरोसा करने के बजाय संदेह क्यों किया था।

मत्ती 14:31

यीशु और पतरस नाव में वापस आते हैं।

जब यीशु और पतरस नाव पर वापस आए थे, तो हवा थम गयी थी। जो कुछ हुआ था उससे शिष्य अचंभित थे। वे जानते थे कि यीशु सचमुच परमेश्वर का पुत्र था, और उन्होंने उसकी आराधना की थी।

मत्ती 14:32–33