धर्मशास्त्र की कहानियां
यीशु ने एक ऐसे व्यक्ति को चंगाई देता है जो चल नहीं सकता था—शारीरिक और आत्मिक चंगाई


मरकुस 2:1–12

यीशु ने एक ऐसे व्यक्ति को चंगाई देता है जो चल नहीं सकता था

शारीरिक और आत्मिक चंगाई

यीशु लोगों से भरे घर में सिखाते हुए।

बहुत से लोग यीशु की शिक्षा सुनना चाहते थे। एक दिन वह लोगों से भरे एक घर में सिखा रहा था।

मरकुस 2:1–2

लोग एक व्यक्ति को यीशु से चंगाई दिलवाने के लिए ले जा रहे हैं।

चार लोग एक ऐसे साथी के साथ घर आए जो चल नहीं सकता था। उन्हें उसे खाट पर ले जाना पड़ा था। वे अपने साथी को यीशु के पास लाना चाहते थे, परन्तु घर में इतनी भीड़ थी कि वे अन्दर नहीं जा पाए थे।

मरकुस 2:3–4

लोग उस व्यक्ति को घर के अंदर उतारते हुए।

इसलिए वे अपने मित्र को घर की छत पर ले गए। उन्होंने छत का एक हिस्सा हटाया और अपने साथी और उसकी खाट को घर के अन्दर, भीड़ के बीच में, यीशु के सामने उतार दिया था।

मरकुस 2:4

यीशु उस व्यक्ति को क्षमा करते हुए।

जब यीशु ने उनका विश्वास देखा तो उसने उस व्यक्ति से जो चल नहीं सकता था कहा, “हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।”

मरकुस 2:5

कुछ यहूदी मार्गदर्शक परेशान हैं।

जब यहूदियों के कुछ मार्गदर्शकों ने यह सुना तो वे परेशान हो गए थे। वे सोचते थे कि केवल परमेश्वर ही पापों को क्षमा कर सकता था।

मरकुस 2:6–7

वह व्यक्ति ठीक होकर खड़ा हो जाता है।

यीशु जानता था कि वे क्या सोच रहे थे। उन्हें यह समझाने के लिए कि उसके पास पापों को क्षमा करने की शक्ति है, उसने एक चमत्कार किया था। उसने उस व्यक्ति से जो चल नहीं सकता था कहा, “उठ, अपनी खाट उठाकर अपने घर चला जा।” वह व्यक्ति खड़ा हुआ और चलने लगा! सभी लोगों को आश्चर्य हुआ और परमेश्वर को धन्यवाद दिया था।

मरकुस 2:8–12