परिवार-केंद्रित यीशु मसीह का सुसमाचार
हमारा सिद्धांत और अनंत परिवारों में हमारा विश्वास हमें मजबूत बनाता और जोड़ता है।
मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, मेरी ओर से आपकी प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद। मैंने इन्हें को महसूस किया है।
I.
अंतिम-दिनों के संतों का यीशु मसीह के गिरजे का सिद्धांत परिवार पर केंद्रित है। परिवार पर हमारे सिद्धांत के लिए मंदिर आवश्यक है। वहां प्राप्त विधियां हमें अनन्त परिवारों के रूप में अपने स्वर्गीय पिता की उपस्थिति में लौटने में सक्षम बनाती हैं।
अप्रैल 2025 के महा सम्मेलन में, अध्यक्ष रसल एम. नेल्सन ने 200 नए मंदिरों के निर्माण की घोषणा की थी। उन्हें प्रत्येक महा सम्मेलन के समापन पर नए मंदिरों की घोषणा करना बहुत पसंद था, और हम सब उनके साथ आनंदित होते थे। हालांकि, अब बड़ी संख्या में मंदिर योजना और निर्माण के आरंभिक चरण में हैं, इसलिए यह उचित है कि हम नए मंदिरों की घोषणा करने की गति धीमी कर दें। इसलिए, बारह प्रेरितों की परिषद की स्वीकृति से, हम इस सम्मेलन में किसी भी नए मंदिर की घोषणा नहीं करेंगे। अब हम दुनिया भर में गिरजे के सदस्यों को मंदिर विधियां प्रदान करने के लिए कार्य करेंगे, जिसमें नए मंदिरों के निर्माण की घोषणा कब और कहां की जाए, यह भी शामिल होगा।
मेरी वार्ता का जो भाग मैंने अभी दिया है, वह हमारे प्रिय अध्यक्ष रसल एम. नेल्सन की मृत्यु के बाद लिखा गया था। अब जो कहूंगा, वह कई सप्ताह पहले लिखा और अनुमोदित किया गया था, लेकिन यह अभी भी प्रभु द्वारा प्रेरित मेरी शिक्षाओं को दर्शाता है।
II.
ठीक 30 वर्ष पहले घोषित परिवार घोषणामें कहा गया है कि “परिवार परमेश्वर द्वारा नियुक्त है” और “उसके बच्चों के अनन्त नियति के लिए परिवार सृष्टिकर्ता की योजना में आवश्यक है।” यह घोषणा करती है “कि परमेश्वर की अपने बच्चों के लिए आज्ञा कि संख्या में बढ़ो और पृथ्वी को भरो अभी भी वैध है।” और, “हम ये भी घोषणा करते हैं कि परमेश्वर ने आज्ञा दी है कि प्रजनन की पवित्र शक्ति सिर्फ कानूनी तौर से विवाहित पति और पत्नी के रूप में पुरुष और स्त्री के द्वारा ही उपयोग की जानी चाहिए।” जैसा उस-समय-के-एल्डर रसल एम. नेल्सन ने बीवाईयू के श्रोताओं को सिखाया था कि परिवार “परमेश्वर की योजना के लिए महत्वपूर्ण है। … वास्तव में, इस योजना का एक उद्देश्य परिवार का उत्थान करना है।”
अंतिम-दिनों के संतों का यीशु मसीह के गिरजे को कभी-कभी परिवार-केंद्रित गिरजे के रूप में जाना जाता है। यह है। परमेश्वर के साथ हमारा रिश्ता और हमारे नश्वर जीवन का उद्देश्य परिवार के संदर्भ में समझाया गया है। यीशु मसीह का सुसमाचार हमारे स्वर्गीय पिता की आत्मिक संतानों के लाभ के लिए योजना है। हम सच में कह सकते हैं कि सुसमाचार की योजना हमें सबसे पहले एक अनंत परिवार की परिषद में सिखाई गई थी, यह हमारे नश्वर परिवारों के द्वारा लागू की जाती है, और इसका भावी उद्देश्य अनंत परिवारों में परमेश्वर की संतानों का उत्थान करना है।
III.
उस सैद्धांतिक संदर्भ के बावजूद, इसका विरोध होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में हम विवाह और संतान उत्पत्ति में गिरावट से जूझ रहे हैं। लगभग सौ वर्षों से विवाहित दपंतियों द्वारा संचालित परिवारों का अनुपात घट रहा है, तथा जन्म दर भी घट रही है। हमारे गिरजे के सदस्यों की विवाह और जन्म दर काफी सकारात्मक है, लेकिन उनमें भी काफी गिरावट आई है। यह महत्वपूर्ण है कि अंतिम-दिनों के संत विवाह के उद्देश्य और बच्चों के महत्व के बारे में अपनी समझ न खोएं। इस भविष्य के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। “उत्कर्ष एक पारिवारिक विषय है,” अध्यक्ष नेल्सन ने हमें सिखाया है। “केवल यीशु मसीह के सुसमाचार की उद्धार करने वाली विधियों के द्वारा ही परिवारों का उत्कर्ष हो सकता है।”
ऐतिहासिक कारणों से विवाह और संतान उत्पत्ति में राष्ट्रीय स्तर पर गिरावट को समझा जा सकता है, लेकिन अंतिम-दिनों के संतों के मूल्यों और प्रथाओं में सुधार होना चाहिए—हमें उन प्रवृत्तियों का अनुसरण—नहीं करना चाहिए।
80 साल पहले अपने बचपन में, मैं अपने नाना-नानी के फार्म में रहता था, जहां दिन में होने वाली लगभग सभी गतिविधियां परिवार के निर्देशन में होती थीं। पारिवारिक गतिविधियों से ध्यान हटाने के लिए तब कोई टेलीविजन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं होता था। इसके विपरीत, आज के शहरी समाज में बहुत कम सदस्य लगातार परिवार-केंद्रित गतिविधियों को करते हैं। शहरी जीवन और आधुनिक परिवहन, संगठित मनोरंजन और तेज गति के संचार ने युवाओं के लिए अपने घरों को बोर्डिंग हाउस के तौर पर उपयोग करना आसान बना दिया है, जहां वे सोते हैं और कभी-कभार भोजन करते हैं, लेकिन जहां उनकी गतिविधियों पर माता-पिता का नियंत्रण बहुत कम होता है।
गिरजे के अधिकांश वर्तमान सदस्यों के रोजगार के कारण माता-पिता का प्रभाव भी कम हो गया है। अतीत में, परिवारों को एकजुट करने वाले महान प्रभावों में से एक था एक समान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मिलकर संघर्ष करने का अनुभव—जैसे कि जंगल को काट कर खेती या जीविकोपार्जन करना। परिवार आर्थिक उत्पादनका एक संगठित और संचालित इकाई था। आज, अधिकांश परिवार आर्थिक उपभोग की इकाइयांहैं, जिनके लिए उच्च स्तर के पारिवारिक संगठन और सहयोग की आवश्यकता नहीं होती है।
IV.
जब माता-पिता का प्रभाव कम होता जाता है, तब अंतिम-दिनों के संतों के पास अभी भी परमेश्वर से मिली जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को अनंत जीवन में हमारे परिवार की नियति के लिए तैयार होना सिखाएं (देखें सिद्धांत और अनुबंध 68:25)। हममें से कई लोगों को ऐसा करना चाहिए, जबकि हमारे सभी परिवार पारंपरिक नहीं हैं। तलाक, मृत्यु और अलग-रहना वास्तविकताएं हैं। मैंने यह अनुभव उस परिवार में किया था जिसमें मैं पला-बढ़ा था।
जब मैं सात वर्ष का था तब मेरे पिता की मृत्यु हो गई, इसलिए मेरे छोटे भाई-बहन और मेरा पालन-पोषण मेरी विधवा मां ने किया था। सबसे कठिन परिस्थितियों में भी वह आगे बढ़ती रहीं। वह अकेली और टूट चुकी थीं, लेकिन पुनर्स्थापित गिरजे के सिद्धांत की उनकी प्रभावशाली शिक्षा ने हमारा मार्गदर्शन किया था। उन्होंने अपने बच्चों के पालन-पोषण में स्वर्गीय सहायता के लिए प्रार्थना की, और उन्हें आशीष मिली! हमारा पालन-पोषण एक खुशहाल घर में हुआ था, जिसमें हमेशा याद रखा जाता था कि पिता हमारे बीच नहीं थे। उन्होंने हमें सिखाया था कि हमारे पिता थे और उनका पति था तथा मंदिर में हुए उनके विवाह के कारण हम हमेशा एक परिवार रहेंगे। हमारे पिता केवल अस्थायी रूप से बाहर गए हुए थे क्योंकि प्रभु ने उन्हें किसी अलग कार्य के लिए नियुक्त किया था।
मैं जानता हूं कि कई अन्य परिवार इतने सुखी नहीं हैं, लेकिन हर एकल मां स्वर्गीय पिता के प्रेम और मंदिर विवाह की संभावित आशीष के बारे में सीख सकती है। आप भी इसे कर सकते हैं! स्वर्गीय पिता की योजना हर किसी के लिए इस संभावना का आश्वासन देती है। हम सभी मंदिर विवाह और अनंत परिवार के रूप में मुहरबंद होने की भावी आशीषों के लिए आभारी हैं। मेरी मां की तरह, हमें लेही द्वारा अपने बेटे याकूब से की गई प्रतिज्ञा का जिक्र करना अच्छा लगता है कि परमेश्वर “तुम्हारे कष्टों को तुम्हारे लाभ के लिए समर्पित करेगा” (2 नफी 2:2)। यह बात प्रत्येक अंतिम-दिनों के संत परिवार पर लागू होती है, चाहे वह पूर्ण हो या वर्तमान में अपूर्ण। हम एक पारिवारिक गिरजा हैं।
हमारा सिद्धांत और अनंत परिवारों में हमारा विश्वास हमें मजबूत बनाता और एक दूसरे से जोड़ता है। मैं अपने नानाजी की प्रतिज्ञा को कभी नहीं भूलूंगा, जब हम बच्चे पेसन, यूटाह के निकट उनके फार्म पर रहते थे। उन्होंने मुझे यह दुखद समाचार दिया था कि मेरे पिता की मृत्यु सुदूर डेनवर, कोलोराडो में हो गई थी। मैं भागकर कमरे में गया और बिस्तर के पास घुटनों के बल बैठ कर फूट-फूट कर रोने लगा। नानाजी मेरे पीछे आए और मेरे पास घुटनों के बल बैठ कर बोले, “मैं तुम्हारा पिता रहूंगा।” यह मधुर प्रतिज्ञा इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब परिवार में कोई सदस्य खो जाता या चला जाता है, तो दादा-दादी/नाना-नानी उस कमी को पूरा करने के लिए क्या कर सकते हैं।
माता-पिता—चाहे वे एकल हों या विवाहित, तथा दादा-दादी/नाना-नानी जैसे अन्य लोग जो बच्चों के लिए यह भूमिका निभाते हैं—महान शिक्षक होते हैं। उनका सबसे प्रभाशाली सिखाना उदाहरण द्वारा होता है। पारिवारिक ईकाई अनंत मूल्यों को प्रदर्शित करने और सीखने के लिए आदर्श स्थान होती है, जैसे विवाह और बच्चों का महत्व, जीवन का उद्देश्य और आनंद का सच्चा स्रोत। यह जीवन के अन्य आवश्यक सबक सीखने के लिए भी सबसे अच्छा स्थान है, जैसे दया, क्षमा, आत्म-नियंत्रण, तथा शिक्षा और ईमानदारी से काम करने का महत्व।
बेशक, कई गिरजा सदस्यों के ऐसे प्रिय पारिवारिक सदस्य होते हैं जो सुसमाचार के मूल्यों और अपेक्षाओं को स्वीकार नहीं करते। ऐसे सदस्यों को हमारे प्रेम और धैर्य की आवश्यकता है। एक दूसरे के साथ बात करते समय हमें यह याद रखना चाहिए कि हम जिस पूर्णता की तलाश कर रहे हैं वह नश्वरता की तनावपूर्ण परिस्थितियों तक सीमित नहीं है। सिद्धांत और अनुबंध 138:57–59 में दी गई महान शिक्षा हमें आश्वस्त करती है कि पश्चाताप और आत्मिक विकास नश्वरता के बाद आने वाली आत्मिक दुनिया में भी जारी रह सकता है। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि जब परिवार एक-दूसरे को मजबूत करने के लिए एकजुट होते हैं, तो हम सभी को यह याद रखना चाहिए कि नश्वरता में हम सभी द्वारा अनुभव किए गए पापों और अवश्यंभावी कमियों को यीशु मसीह के महिमामय और बचाने वाले प्रायश्चित के कारण पश्चाताप के द्वारा क्षमा किया जा सकता है।
5.
हमारा उद्धारकर्ता यीशु मसीह हमारा परम आदर्श है। यदि हम अपने जीवन में उसकी शिक्षाओं और आत्म-बलिदान का पालन करें तो हमें आशीष मिलेगी। मसीह का अनुसरण करना और एक-दूसरे की सेवा में स्वयं को समर्पित करना, स्वार्थ और व्यक्तिवाद का सबसे अच्छा उपाय है, जो आजकल बहुत आम हो गया है।
माता-पिता का यह भी कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को सुसमाचार के नियमों के अलावा व्यावहारिक समझ भी सिखाएं। जब परिवार मिलकर सार्थक कार्य करते हैं तो वे एकजुट होते हैं। पारिवारिक बगीचे पारिवारिक रिश्तों का निर्माण करते हैं। खुशहाल पारिवारिक अनुभव पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाते हैं। कैम्पिंग, खेल गतिविधियां और अन्य मनोरंजन परिवारों के बीच संबंध बनाने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। परिवारों को पूर्वजों को याद करने के लिए पारिवारिक पुनर्मिलन का आयोजन करना चाहिए, जो मंदिर ले जाता है।
माता-पिता को बच्चों को जीवन जीने के मूलभूत कौशल सिखाना चाहिए, जिसमें घर और आंगन में काम करना भी शामिल है। विभिन्न भाषाएं सीखना प्रचारक सेवा और आधुनिक जीवन के लिए एक उपयोगी तैयारी है। इन विषयों को सिखाने वाले माता-पिता, दादा-दादी/नाना-नानी या परिवार के रिश्तेदार हो सकते हैं। परिवार तब फलते-फूलते हैं जब वे एक समूह के रूप में सीखते हैं और परिवार तथा उसके सदस्यों से संबंधित सभी मामलों पर मिलकर सलाह करते हैं।
कुछ लोग कह सकते हैं, “लेकिन हमारे पास इन सब के लिए समय नहीं है।” वास्तव में सार्थक कार्यों के लिए समय निकालने के लिए, कई माता-पिता पाएंगे कि यदि वे सभी अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को बंद कर दें, तो वे अपने परिवार को सक्रियकर सकते हैं। और माता-पिता, याद रखें, बच्चे आपके साथ समय बिताना चाहते हैं, बजाय इसके कि वे क्या खाते हैं।
यदि परिवार मिलकर प्रार्थना करें, रात और सुबह घुटनों के बल बैठकर आशीषों के लिए धन्यवाद दें और सामान्य बातों के लिए प्रार्थना करें, तो उन्हें महान आशीषें प्राप्त होती हैं। परिवारों को भी आशीष मिलती है जब वे गिरजा सेवाओं और अन्य प्रार्थना-सभाओं में मिलकर आराधना करते हैं। पारिवारिक कहानियों, पारिवारिक परंपराओं के निर्माण और पवित्र अनुभवों को साझा करने से भी पारिवारिक बंधन मजबूत होते हैं। अध्यक्ष स्पेंसर डब्ल्यू. किंबल ने हमें याद दिलाया था कि “हमारे अपने जीवन और हमारे पूर्वजों की प्रेरणा की कहानियां … शक्तिशाली शिक्षण साधन हैं।” वे प्रायः हमारे और हमारी भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा के सर्वोत्तम स्रोत होते हैं।
मैं प्रभु यीशु मसीह की गवाही देता हूं, जो हमारे अनन्त पिता परमेश्वर का एकलौता पुत्र है। वह हमें अनुबंध मार्ग पर चलने के लिए आमंत्रित करता है जो स्वर्गीय पारिवारिक पुनर्मिलन की ओर ले जाता है। कर्टलैंड मंदिर में स्थापित कुंजियों द्वारा निर्देशित पौरोहित्य की मुहरबंदी की शक्तियां,(देखें सिद्धांत और अनुबंध 110:13–16) परिवारों को अनंत जीवन के लिए एकजुट करती हैं। वर्तमान में विश्व भर में प्रभु के मंदिरों में इन्हें निरंतर अधिक संख्या में संपन्न किया जा रहा है। यह सच्चाई है। हम इसका हिस्सा बनें, मैं प्रार्थना करता हूं, यीशु मसीह के नाम में, आमीन।