एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाना
केवल प्रभु ही हमारी व्यक्तिगत सीमाओं और क्षमताओं को पूरी तरह से जानते हैं, और इसी कारण वही अकेले हमारे कार्य प्रदर्शन का सही न्याय करने के लिए पूरी तरह योग्य हैं।
हाल ही में मैंने एक अनुभव पढ़ा जिसने मुझे गहराई से छू लिया। यह अमेरिका मास्टर्स ट्रैक एंड फील्ड राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में हुआ—जो वरिष्ठों के लिए एक प्रतियोगिता है।
1,500-मीटर प्रतियोगिता के प्रतिभागियों में से एक 100 वर्षीय ऑरविल रोजर्स थे। लेखक लिखते हैं:
“जब स्टार्टर पिस्तौल चली, तो धावक दौड़ पड़े, और ऑरविल तुरंत ही अंतिम स्थान पर पहुँच गया, जहाँ वह पूरे दौड़ के दौरान अकेला ही बहुत धीरे-धीरे चलते हुए बना रहा। जब ऑरविल को छोड़कर बाकी आखिरी धावक ने दौड़ पूरी कर ली, तब भी ऑरविल के पास ढाई चक्कर बाकी थे। लगभग 3,000 दर्शक चुपचाप बैठे उसे धीरे-धीरे ट्रैक के चारों ओर चलते हुए देख रहे थे—पूरी तरह से, खामोशी से और असुविधाजनक से अकेले।
“[परन्तु] जब उसने अपना अंतिम चक्कर शुरू किया, तो भीड़ खड़ी हो गई, तालियां बजाते हुए और उत्साहवर्धन करती हुई। जब तक वह अंतिम मोड़ पर पहुंचा, भीड़ जोर-जोर से गरज रही थी। हज़ारों दर्शकों के प्रोत्साहक उत्साहवर्धन के साथ, ऑरविल ने अपनी अंतिम ऊर्जा का सहारा लिया। जैसे ही वह समाप्ति रेखा पार कर गया और उसके प्रतिस्पर्धियों ने उसे गले लगाया, भीड़ खुशी से झूम उठी। ऑरविल ने विनम्रता और कृतज्ञता के साथ भीड़ की ओर हाथ हिलाया और अपने नए मित्रों के साथ ट्रैक से बाहर चले गए।
यह ऑरविल की पांचवी प्रतियोगिता की दौड़ थी, और अन्य प्रत्येक प्रतियोगिता में भी आखरी स्थान पे था। कुछ लोग ओरविल की आलोचना करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं, यह सोचकर कि उसे अपनी उम्र में प्रतिस्पर्धा भी नहीं करनी चाहिए थी —कि वह ट्रैक पर नहीं होना चाहिए था क्योंकि वह बाकी सभी के लिए अपनी अपनी स्पर्धाओं को बहुत लंबा खींच देता था।
लेकिन भले ही वह हमेशा अंतिम स्थान पर आता था, उस दिन ऑरविल ने पांच विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिए। जिसने भी उसे दौड़ते देखा, वह संभव नहीं मान सकता था, लेकिन न तो दर्शक और न ही उसके प्रतियोगी ही निर्णायक थे। ऑर्विल ने कोई नियम नहीं तोड़ा, और अधिकारियों ने कोई मानक कम नहीं किए। उसने वही दौड़ लगाई और वही शर्तें पूरी कीं जो अन्य सभी प्रतियोगियों ने पूरी की थीं। लेकिन उनकी कठिनाई की स्थिति - इस मामले में, उनकी उम्र और सीमित शारीरिक क्षमता - को ध्यान में रखते हुए उन्हें 100 से अधिक आयु वर्ग में रखा गया। और उस भाग मे, उसने पांच विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिए।
ठीक उसी तरह जैसे ऑरविल के लिए हर बार उस ट्रैक पर कदम रखना बहुत साहस की बात थी, वैसे ही हमारे कुछ बहनों और भाइयों के लिए भी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के मैदान में कदम रखना बहुत साहस की बात होती है। वे जानते हैं कि उन्हें अनुचित रूप से आँका जा सकता है, फिर भी वे पूरी मेहनत से प्रयास करते हैं, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, उद्धारकर्ता के अनुसरण करने और उनके साथ किए अपने अनुबन्धो को निभाने के लिए।
चाहे हम दुनिया में कहीं भी रहते हों, चाहे हमारी उम्र कुछ भी हो, यह हम सभी के लिए एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता है कि हम अपनेपन की भावना महसूस करें, यह महसूस करें कि हमारी जरूरत है और हमें चाहा जाता है तथा हमारे जीवन का उद्देश्य और अर्थ है, चाहे हमारी परिस्थितियां या सीमाएं कुछ भी हों।
दौड़ के अंतिम चरण में, भीड़ ने भारी मात्रा में ऑरविल का उत्साहवर्धन किया, जिससे उसे आगे बढ़ते रहने की ताकत मिली। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसने आख़िरी स्थान पर समाप्त किया। प्रतिभागियों और दर्शकों के लिए, यह प्रतियोगिता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था। कई मायनों में, यह उद्धारकर्ता के प्रेम का क्रियाशील उदाहरण था। प्रतियोगी और दर्शक सभी मिलकर खुश हुए।
ठीक उसी तरह जैसे मास्टर्स चैंपियनशिप में होता है, हमारे वार्ड, शाखाएँ और परिवार भी ऐसे मिलन स्थल हो सकते हैं जहाँ हम एक-दूसरे को उत्साहित करें—एक-दूसरे के लिए मसीह के प्रेम से प्रेरित अनुबन्ध -समुदाय—और एक-दूसरे को किसी भी चुनौती से पार पाने में मदद करें, एक-दूसरे को शक्ति और प्रोत्साहन दें बिना किसी कोआंके। हमें एक दूसरे की जरूरत है इशवरीय शक्ति एकता से आती है। और यही कारण है कि शैतान हमें बांटने पर उतारू है।
दुर्भाग्यवश, हममें से कुछ लोगों के लिए, कई अलग-अलग कारणों से गिरजा में जाना कठिन हो सकता है। यह कोई ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो विश्वास के सवालों से जूझ रहा हो या जिसे सामाजिक चिंता या अवसाद जैसी समस्याएँ हों। यह किसी भिन्न देश या जाति का व्यक्ति हो सकता है, या ऐसा व्यक्ति हो सकता है जिसके जीवन के अनुभव या चीजों को देखने का नजरिया भिन्न हो, लेकिन उसे ऐसा महसूस हो सकता है कि वह इस ढांचे में फिट नहीं बैठता। यह शिशुओं और छोटे बच्चों के नींद से वंचित और भावनात्मक रूप से तनावग्रस्त माता-पिता या जोड़ों और परिवारों से भरी कलीसिया में अकेले रहने वाला व्यक्ति भी हो सकता है। यह कोई ऐसा व्यक्ति भी हो सकता है जो सालों के बाद लौटने का साहस जुटा रहा हो, या कोई ऐसा व्यक्ति जिसे हमेशा यह ख्याल सताता हो कि वह कभी भी पर्याप्त नहीं है और कभी भी कहीं का नहीं है।
अध्यक्ष रसेल एम. नेल्सन ने कहा है:अगर आपके वार्ड की किसी दंपति का तलाक हो जाता है, या कोई युवा प्रचारक जल्दी घर लौटता है, या कोई लड़का या लड़की अपनी गवाही में मजबूत नहीं है, उन्हें आपके आंकलन की ज़रूरत नहीं है। “उन्हें यीशु मसीह के शुद्ध प्रेम का अनुभव करने की आवश्यकता है जो तुम्हारे शब्दों और कार्यों में दिखाई देता है।”
हमारा गिरजा में अनुभव इस उद्देश्य से होता है कि हमें प्रभु के साथ और एक-दूसरे के साथ महत्वपूर्ण संबंध स्थापित करने का अवसर मिले, जो हमारी आत्मिक और भावनात्मक भलाई के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। बपतिस्मा से आरम्भ करते हुए, परमेश्वर के साथ हमारे अनुबंध में यह अंतर्निहित है कि हम परमेश्वर के परिवार के सदस्यों, मसीह की देह के सदस्यों के रूप में एक दूसरे से प्रेम करें और एक दूसरे की देखभाल करें और न कि केवल उन कार्यों की सूची में से एक बॉक्स पर निशान लगाएं जिनकी हमसे अपेक्षा की जाती है।
मसीही प्रेम और देखभाल उच्चतर और पवित्र होती है। मसीह का शुद्ध प्रेम दया है। जैसा कि अध्यक्ष नेल्सन ने सिखाया, “प्रेम हमें एक दूसरे पर बोझ डालने के बजाय’ एक दूसरे का बोझ उठाने के लिए प्रेरित करता है। ” [Mosiah 18:8]
उद्धारकर्ता ने कहा है, “यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे शिष्य हो।” और अध्यक्ष नेल्सन ने कहा: “उदारता यीशु मसीह के सच्चे अनुयायी की प्रमुख विशेषता है।“ “उद्धारकर्ता का संदेश स्पष्ट है: उसके सच्चे शिष्य निर्माण, उत्थान, प्रोत्साहित, मनाते और प्रेरित करते हैं। … हम दूसरों से और उनके बारे में कैसे बात करते हैं. … यह वास्तव में मायने रखता है।”
इस पर उद्धारकर्ता की शिक्षा बहुत साधारण है | इसका सार है सुनहरे नियम में: दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप चाहते हैं कि दूसरों द्वारा आपके साथ किया जाए। इस व्यक्ति की जगह खुद को रखकर उसे वैसे ही व्यवहार करें जैसे आप चाहते कि आपके साथ किया जाए अगर आप उसकी स्थिति में होते।
दूसरों के प्रति मसीही व्यवहार हमारे परिवारों और कलिसियाओ से परे जाता है | यह हमारे उन बहनों और भाइयों को भी शामिल करता है जो किसी अन्य धर्म के हैं या जिनका कोई धर्म नहीं है। इसमें अन्य देशों और संस्कृतियों के हमारे भाई-बहनों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के लोग भी शामिल हैं। हम सभी परमेश्वर के परिवार का हिस्सा हैं, और वह अपने सभी बच्चों से प्रेम करता है। वह चाहता है कि उसके बच्चे उससे और एक दूसरे से भी प्रेम करें।
उद्धारकर्ता का जीवन प्रेम करने, जोड़ने और उन लोगों को उठाने का उदाहरण था जिन्हें समाज ने बहिष्कृत और अशुद्ध माना था।” उसका उदाहरण वह है, जिसका पालन करने का हमें आदेश दिया गया है। हम यहां मसीही समान गुण विकसित करने और अंततः अपने उद्धारकर्ता के समान बनने के लिए हैं। यह किसी चेकलिस्ट का सुसमाचार नहीं है; यह बनने का सुसमाचार है—उसकी तरह बनना जैसे वह प्रेम करता है वह चाहता है कि हम सियोन लोग बने ।
जब मैं अपने l 20वें में थी, तो मैं गहरी अवसाद की स्थिति से गुजर रहा थी, और उस समय ऐसा लगा जैसे परमेशवर के अस्तित्व की वास्तविकता अचानक गायब हो गई हो। मैं इस भावना को पूरी तरह से व्याख्यायित नहीं कर सकती, सिवाय इसके कि मैं कहूँ कि मुझे पूरी तरह खोया हुआ महसूस हुआ। जब मैं एक छोटी बच्ची थी, तब से मुझे हमेशा यह पता था कि मेरा स्वर्ग के पिता वहाँ हैं और मैं उनसे बात कर सकती हूँ। लेकिन उस समय, मुझे यह भी नहीं पता था कि परमेशवर हैं या नहीं। मैंने अपने जीवन में पहले कभी ऐसा कुछ अनुभव नहीं किया था, और ऐसा लग रहा था जैसे मेरी पूरी नींव ही ढह रही हो।
,इसके परिणामस्वरूप, मेरे लिए गिरजा जाना कठिन हो गया। मैं गयी, लेकिन यह आंशिक रूप से इसलिए था क्योंकि मुझे “निष्क्रिय” या “कम विश्वासी” कहा जाने का डर था। और मैं इस बात से डर रही थी कि मुझे कोई टोंक न दे। उस समय मुझे वास्तव में जो सबसे ज़रूरी था सबसे ज़रूरी था वह यह महसूस करना था कि मेरे आस-पास के लोग मुझसे सच्चा प्रेम, समझ और समर्थन रखते हैं, न कि मेरे प्रति आंकलन करना।
कुछ अनुमान जिसका मुझे डर था कि लोग मेरे बारे में लगाएंगे, मैं खुद पहले दूसरों के बारे में लगा चुकि थीजब वे नियमित रूप से गिरजे में नहीं जाते थे। उस दर्दनाक व्यक्तिगत अनुभव ने मुझे कुछ महत्वपूर्ण सबक सिखाए क्यों हमें एक-दूसरे के बारे में अन्यायपूर्वक निर्णय नहीं लेने की आज्ञा दी गई है।
क्या हमारे बीच ऐसे लोग हैं जो चुपचाप दुख सहते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर उनके छुपे हुए संघर्षों के बारे में दूसरों को पता चला तो उनकी प्रतिक्रिया कैसी होगी?
केवलप्रभु ही पूर्ण रूप से जान सकते हैं कि हम में से प्रत्येक अपने जीवन की दौड़ में किस स्तर की कठिनाइयों का सामना कर रहा है—वे बोझ, चुनौतियाँ और बाधाएँ जिनका सामना हम कर रहे हैं और जो अक्सर दूसरों द्वारा देखी नहीं जा सकतीं। केवल वही पूरी तरह से उन जीवन-परिवर्तनकारी घावों और आघातों को समझता है जिन्हें हममें से कुछ लोगों ने अतीत में अनुभव किया होगा और जो वर्तमान में भी हमें प्रभावित कर रहे हैं।
अक्सर हम खुद का भी कठोरता सेमूल्यांकन करते हैं, यह सोचकर कि हमें जीवन की दौड़ में कहीं अधिक आगे होना चाहिए। केवल प्रभु ही हमारी व्यक्तिगत सीमाओं और क्षमताओं को पूरी तरह से जानते हैं, और इसी कारण वही अकेले हमारे हमारे कार्य प्रदर्शन का सही न्याय करने के लिए पूरी तरह योग्य हैं।
बहनों और भाइयों, आइए हम उस कहानी के दर्शकों की तरह बनें और एक-दूसरे के शिष्यत्व की यात्रा में चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, उत्साहपूर्वक प्रोत्साहित करें! यह हमसे नियम तोड़ने या मानकों को कम करने की मांग नहीं करता। यह वास्तव में दुसरी महान आज्ञा है—अपने पड़ोसी से उसी तरह प्रेम करें जैसे आप स्वयं से करते हैं। और जैसा कि हमारे उद्धारकर्ता ने कहा है, “तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया,” उसने हमें यह भी बताया है,“एक रहो; और यदि तुम एक नहीं हो तो तुम मेरे नहीं हो।”
हमारे जीवन में ऐसे समय आएंगे जब हमें स्वयं मदद और प्रोत्साहन की आवश्यकता होगी। आइए हम अब यह संकल्प लें कि हम हमेशा एक-दूसरे के लिए ऐसा ही करेंगे। जैसा हम ऐसा करते हैं, हम अधिक एकता विकसित करेंगे और ऐसे स्थान की सुविधा देंगे जहाँ उद्धारकर्ता प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उपचार और परिवर्तन का पवित्र कार्य कर सकें।
आपमें से हर एक को, जो यह महसूस करता है कि वह जीवन की इस दौड़ में, नश्वर की इस यात्रा में बहुत पीछे रह गया है, कृपया आगे बढ़ते रहें। केवल हमारा उद्धारकर्ता ही पूरी तरह से यह निर्णय ले सकता हैं कि इस समय आपको कहाँ होना चाहिए, और वह दयालु और न्यायपूर्ण हैं। वह जीवन की दौड़ का महान न्यायाधीश है और एकमात्र ऐसा व्यक्ति है जो पूरी तरह से समझता है कि आप किस कठिनाई स्तर पर दौड़ रहे हैं या चल रहे हैं या घिसट रहे हैं। वह आपकी सीमाओं, आपकी क्षमता, आपके जीवन के अनुभवों, आपके भीतर छिपे हुए बोझों, और आपके हृदय की इच्छाओं को भी ध्यान में रखेंगे। आप वास्तव में प्रतीकात्मक विश्व रिकॉर्ड भी तोड़ रहे होंगे। कृपया आशा मत खोइए। कृपया इसे जारी रखें! कृपया ठहरे रहिए आप वास्तव में यहां के योग्य हैं! प्रभु को आपकी ज़रूरत है, और हमें भी आपकी ज़रूरत है!
आप दुनिया में कहीं भी रहते हों, चाहे वह कितना भी दूरदराज़ क्यों न हो, कृपया हमेशा याद रखें कि आपका स्वर्गीय पिता और आपका उद्धारकर्ता आपको पूरी तरह जानता हैं और आपसे परिपूर्ण प्रेम करता हैं। आप उनके लिए कभी भुलाए नहीं जाते। वे आपको घर वापस लाना चाहते हैं।
अपने ध्यान को उद्धारकर्ता पर बनाए रखें। वह तुम्हारी लोहे की छड़ हैं उसे मत जाने देना । . मैं गवाही देती हूं कि वह जीवित हैं और आप उन पर भरोसा कर सकते हैं। मैं यह भी गवाही देती हूं कि वह आपको प्रोत्साहित कर रहा है। .
हम सभी उद्धारकर्ता के उदाहरण का अनुसरण करें और एक-दूसरे को प्रोत्साहित करें, यही मेरी प्रार्थना है यीशु मसीह के नाम पर, आमीन।।