परमेश्वर की ओर देखो और जीवित रहो
केवल परमेश्वर की ओर देखने से ही व्यक्ति, परिवार और यहां तक कि राष्ट्र भी उन्नति कर सकते हैं।
पिछले जून में दक्षिणी अफ्रीका के लेसोथो देश में एक भयानक दुर्घटना घटी। गिरजा की मापुत्सो शाखा की 20 युवतियों और उनके सात मार्गदर्शकों को लेकर एक छोटी बस, मासेरू जिले ओर जा रही थी। सुबह के समय जब वे दो लेन वाले राजमार्ग पर यात्रा कर रहे थे, तो विपरीत दिशा से आ रही एक कार, एक अन्य वाहन को पास देने के प्रयास में, बस वाली लेन में आ गई। आमने-सामने की टक्कर से बचने के लिए कोई स्थान या समय नहीं था, और कुछ ही सेकंड में वाहन टकरा गए, और आग की लपटों में घिर गए।
दुर्घटना में कुल मिलाकर 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें छह युवतियां, दो युवतियों की मार्गदर्शक, तथा शाखा के अध्यक्ष और उनकी पत्नी शामिल थे। जीवित बचे लोगों, परिवार के सदस्यों और मित्रों ने कई प्रकार की भावनाएं व्यक्त की हैं, जिनमें क्रोध, अवसाद और यहां तक कि अपराध बोध के क्षण भी शामिल हैं। इन भावनाओं और अनुत्तरित प्रश्नों के बावजूद, उन्होंने एक-दूसरे को तसल्ली दी है और पवित्र संगीत, पवित्र शास्त्रों और प्रार्थना के माध्यम से परमेश्वर की ओर रुख किया है, जहां उन्हें सांत्वना मिली है। सत्रह वर्षीय जिवित बची सेत्सोआना सेलेबेली ने गवाही दी, “यीशु मसीह हमसे प्रेम करता हैं और हमारे साथ हैं, भले ही हमारे दिल दुखी हों।”
एक युवती और एक मार्गदर्शक, जो जलने के उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती थे, उन्होंने साथ में मॉर्मन की पुस्तक का अध्ययन किया। एक ने कहा, “हाल ही में, हम मोरोनी में पढ़ रहे हैं, और मोरोनी बिल्कुल वही कहता है जो मैं महसूस कर रहा हूं। … जब वह कहता हैं, तो ऐसा लगता है जैसे वह कह रहा हों, ‘तुमको ये वचन सीखने होंगे क्योंकि ये तुमको इससे पार पाने में मदद करने के लिए लिखे गए हैं।’”
मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार सेवा में, क्षेत्र सत्तर एल्डर सियाबोंगा मखिजे ने सलाह दी, “हम सभी को इस समय प्रभु की ओर मुड़ना चाहिए और उससे हमारे दिलों को सांत्वना देने और … हमारे दर्द को कम करने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।“ पड़ोसी लेरिबे शाखा की युवतियों की अध्यक्ष, मम्फो मकुरा ने आग्रह किया, “प्रभु की ओर मुड़ें, और उसकी इच्छा को स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त करें।“ यीशु मसीह ‘हमारे विश्वास का रचयिता और सिद्ध करनेवाला है [इब्रानियों 12:2]। दूसरी ओर मत देखो, बल्कि उसकी ओर देखो।”
उसकी ओर देखो। उसके शब्द अलमा द्वारा अपने बेटे हिलामन को दी गई सलाह को प्रतिध्वनित करते हैं: “ध्यान दो कि तुम परमेश्वर की ओर देखो और जिओ।” अलमा ने एक प्रकार के रूप में लियाहोना के साथ लेही और उसके लोगों के अनुभव का हवाला दिया:“जिस प्रकार इस दिशासूचक यंत्र पर ध्यान लगाना हमारे पूर्वजों के लिए आसान था जो कि उन्हें प्रतिज्ञा की हुई भूमि पर सीधे जाने का संकेत करता था उसी प्रकार मसीह के वचन पर ध्यान देना भी आसान है जो तुम्हें अनंत स्वर्गसुख की तरफ सीधा संकेत करता है।” अलमा ने कहा, “अगर वे देखेंगे तो वे शायद जीवित रहेंगे।“ और अगर हम … देखें तो हम सदा के लिए जीवित रह सकते हैं।”
एक अन्य अवसर पर, अलमा ने पीतल के सांप का उदाहरण दिया जिसे मूसा ने तब उठाया था जब प्राचीन इस्राएली अग्निमय सांपों से पीड़ित थे। प्रभु ने मूसा से कहा कि वह “एक तेज विषवाले सांप की प्रतिमा बनवाकर खम्भे पर लटकाए; तब जो सांप से डसा हुआ उसको देख ले वह जीवित बचेगा।” अलमा ने बताया कि पीतल की आकृति मसीह का प्रतीक थी जिसे क्रूस पर चढ़ाया जाएगा। कई लोगों ने देखा और जीवित रहे, लेकिन अन्य लोग, जैसा की अलमा ने कहा, “इतने कठोर” थे कि उन्होंने देखना ही नहीं चाहा और नष्ट हो गए।
अलमा ने पूछा:
यदि केवल नजर उठाकर देखने से ही तुम्हारे दुख दूर हो जाते तो क्या तुम शीघ्रता से नहीं देखते, या इसकी बजाय क्या तुम अविश्वास में अपने हृदयों को कठोर करते, और आलसी होते कि तुमने नजर उठाकर देखा भी नहीं ताकि तुम्हारा विनाश हो सके ?
फिर अपनी आंखें चारों ओर घुमाओ और परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करना आरंभ करो, कि वह अपने लोगों की मुक्ति के लिए आएगा, और यह कि उनके पापों के प्रायश्चित के लिए वह सहेगा और मर जाएगा; और यह कि वह मुर्दों में से फिर से जी उठेगा, जिससे पुनरुत्थान होगा, ताकि अंतिम और न्याय वाले दिन, अपने कर्मों के अनुसार न्याय पाने के लिए सारे लोग उसके सामने खड़े हो सकें ।”
बेशक, “परमेश्वर की ओर देखो और जिओ” की सलाह का हमारे लिए न केवल अनंत जीवन में अर्थ है, बल्कि यह हमारे नश्वर जीवन के चरित्र और गुणवत्ता में भी बड़ा अंतर लाता है। लेसोथो की युवा बहन सेलेबेली के शब्दों को याद करें जिनका पहले ही उल्लेख किया जा चुका है—“यीशु मसीह हमसे प्रेम करता हैं और हमारे साथ हैं, भले ही हमारे दिल दुखी हों।”
यह पतित संसार की प्रकृति है —जहां शैतान क्रोध करता है और जहां हर कोई अपूर्ण है —वहां निराशाएं और अपराध, पीड़ा और दुःख, असफलता और हानि, उत्पीड़न और अन्याय होगा। केवल परमेश्वर की ओर देखने से ही व्यक्ति, परिवार और यहां तक कि राष्ट्र भी उन्नति कर सकते हैं। अध्यक्ष रसेल एम. नेल्सन ने सिखाया है: “क्योंकि उद्धारकर्ता ने अपने अनंत प्रायश्चित के माध्यम से, हम में से प्रत्येक को कमजोरियों, गलतियों और पाप से मुक्ति दिलायी, और क्योंकि उसने आपके द्वारा कभी सहन की गई प्रत्येक पीड़ा, चिंता और बोझ का[देखो अलमा 7:11–13], अनुभव किया है, तब जब आप सच में पश्चाताप करते हो और उसकी सहायता की तलाश करते हो, तो आप इस वर्तमान अनिश्चित संसार की चुनौतियों का सामना कर सकते हो।”
मॉरमन की पुस्तक में इससे अधिक कोई वादा नहीं दोहराया गया है: जितना तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे उतना तुम प्रदेश में प्रगति करोगे: लेकिन जब तुम मेरी आज्ञाओं का पालन नहीं करोगे तब तुम्हें मेरी उपस्थिति से अलग कर दिया जाएगा।” सदियों से मॉर्मन लोगों के जीवित अनुभव इन शब्दों की सच्चाई को प्रदर्शित करते हैं। “समृद्धि” का अर्थ था अपने जीवन में स्वर्ग के मार्गदर्शन और आशीषों का आनंद लेना। “समृद्धि“ का अर्थ था आर्थिक खुशहाली का ऐसा स्तर प्राप्त करना जिससे वे विवाह कर सकें, परिवार बढ़ा सकें, तथा दूसरों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकें। “समृद्धि” में कठिनाई और परीक्षण से ऊपर उठने की क्षमता शामिल थी। मसीह की दया से, “सब वस्तुएं मिलकर उनकी भलाई के लिये काम करती हैं,” और उन्हें शुद्ध किया, और उसके साथ उनके सम्बन्ध को गहरा किया।
अलमा ने समझाया कि परमेश्वर की ओर देखना उसकी आज्ञाओं का पालन करना है, अपनी सहायता के लिए परमेश्वर को पुकारो; , अपने सारे विचार को प्रभु के प्रति निर्देशित होने दो, और परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिए तुम्हारा हृदय भरा होना चाहिए; परमेश्वर की आज्ञाएं और सलाह पवित्रशास्त्र और उसके सेवकों के वचनों में पाई जाती हैं। “परिवार: दुनिया के लिए एक घोषणा” में बताए गए सिद्धांत और आदर्श इसका प्रमुख उदाहरण हैं। दूसरा मार्गदर्शन युवाओं की शक्ति के लिएपुस्तिका में दिया गया है। इस वर्ष के लिए युवक और युवतियों का विषय है “मसीह की ओर देखो”, जो प्रभु द्वारा जोसफ स्मिथ और ओलिवर काउडरी को दिए गए सांत्वनापूर्ण निर्देश से लिया गया है: “हर विचार में मेरी ओर देखो; संदेह मत करो, डरो मत।” युवाओं की शक्ति के लिए परमेश्वर की कई सबसे जरूरी आज्ञाओं और मानकों के बारे में बताती है और सिखाती है कि अच्छे निर्णय लेने में प्रभु की ओर कैसे देखें। यह न केवल युवाओं के लिए बल्कि हम सभी के लिए एक मार्गदर्शक है।
एक बहुत ही महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में, युवाओं की शक्ति के लिए “आपका शरीर पवित्र है“ शीर्षक वाले अध्याय में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया गया है। यह निर्देश देता है, “अपने शरीर —और दूसरों के शरीर— के साथ सम्मान से व्यवहार करें। जब आप अपने कपड़े, केश और रूप के बारे में निर्णय लेते हैं, तो अपने आप से पूछें, “क्या मैं अपने शरीर को परमेश्वर की ओर से एक पवित्र उपहार के रूप में सम्मान दे रहा हूं?”
युवाओं की शक्ति के लिए आगे कहा गया है, “सेक्स और यौन भावनाओं को पवित्र रखें। इन्हें उपहास या मनोरंजन का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। अपने विवाहित पति और पत्नी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के शरीर के निजी, पवित्र अंगों को छूना गलत है, भले ही वे कपड़े पहने हुए हों। आप जो भी करते, देखते, पढ़ते, सुनते, सोचते, पोस्ट करते या संदेश भेजते हैं, उसमें ऐसी किसी भी बात से बचें जो जानबूझकर दूसरों में या आपमें कामुक भावनाएं जगाती हो।“
यह अध्यक्ष नेल्सन की हाल की चेतावनी को याद दिलाता है:
“इस योन [शुद्धता की] व्यवस्था का उल्लंघन करने से ज्यादा आपके जीवन को जटिल बनाने वाली कुछ ही चीजें होंगी। जिन लोगों ने परमेश्वर के साथ अनुबंध बनाया है, उनके लिए अनैतिकता, उनकी गवाही को खोने के सबसे तेज तरीकों में से एक है।
“…जीवन की सृष्टि करने की शक्ति परमेश्वरत्व का एक विशेषाधिकार है जिसकी उपयोग करने की अनुमति स्वर्गीय पिता अपने नश्वर बच्चों को देता है। इस प्रकार, परमेश्वर ने इस जीवित, दिव्य शक्ति के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश निर्धारित किए। शारीरिक घनिष्ठता केवल विवाहित पुरुष और स्त्री के बीच होनी चाहिए।
“दुनिया के अधिकांश लोग इस बात पर भरोसा नहीं करते हैं, लेकिन जनमत से सच्चाई बदलती नहीं है। प्रभु ने घोषणा की है कि कोई भी अपवित्र व्यक्ति सिलेस्टियल राज्य को प्राप्त नहीं करेगा। … यदि आप अपवित्र हो, तो मैं आप को पश्चाताप करने की विनती करता हूं। मसीह के पास आओ और अपने पापों से पूरी तरह पश्चाताप करके उनकी पूर्ण क्षमा के वादे को प्राप्त करो। [ [देखें यशायाह 1:16–18; सिद्धांत और अनुबंध 58:42-43]।“
याद रखें कि मॉरमन की पुस्तक में दिए गए वादे में समृद्धि का विपरीत गरीबी नहीं था — बल्कि इसका अर्थ था प्रभु की उपस्थिति से अलग हो जाना। उसकी उपस्थिति किसी के जीवन में उसकी आत्मा के प्रभाव को दर्शाती है। संसार में आते ही सभी लोग मसीह के प्रकाश से अभिभूत हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ लोग बपतिस्मा लेने और पवित्र आत्मा का उपहार और अतिरिक्त प्रकाश प्राप्त करने के लिए कार्य करते हैं। वह प्रेरणा और मार्गदर्शन प्रदान करता है, व्यक्ति की जन्मजात प्रतिभाओं और क्षमताओं को बढ़ाता और परिष्कृत करता है, तथा बुरे प्रभावों, गलत निर्णयों और गतिरोधों से बचने में मदद करता है।
आपकी तरह, मैं भी कुछ ऐसे लोगों को जानता हूं जिन्होंने कभी पवित्र आत्मा के उपहार का आनंद लिया था, लेकिन परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन न करने के कारण उन्होंने उन आशीषों को खो दिया। विशेष रूप से एक व्यक्ति का नाम याद आता है जिसकी गिरजा से सदस्यता उल्लंघन के कारण वापस ले ली गई थी। उसने कहा कि उसकी प्रारंभिक प्रतिक्रिया आहत महसूस करना था। उसे लगा कि अपूर्ण मार्गदर्शकों द्वारा उसे आंका गया। वह जानता था कि उसका अपना आचरण गलत था, लेकिन उसने दूसरों की गलतियों और असफलताओं की ओर इशारा करके इसे तर्कसंगत ठहराया। कुछ समय बाद, वह गिरजे के बाहर की जीवनशैली में सहज महसूस करने लगा, जिसमें उसे नियुक्ति की बाध्यता, आराधना सेवाओं में भाग लेने और दूसरों की सेवाकई करने की जरूरत नहीं थी।
यह कुछ समय तक जारी रहा, लेकिन उसे अपने जीवन में पवित्र आत्मा—परमेश्वर की उपस्थिति—की अनुपस्थिति का और भी अधिक तीव्र रूप से एहसास होने लगा। इस अनुभव से, वह जानने लगा था कि दिन-प्रतिदिन आत्मा से मिलने वाली सांत्वना, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास कैसा होता है, और वह इसकी कमी महसूस करने लगा। अंततः, उसने वह किया जो पश्चाताप करने और एक बार फिर जल और आत्मा के बपतिस्मा के लिए योग्य होने के लिए आवश्यक था।
ऐसा प्रतीत होता है कि अर्थसमझना, खुशी और सहायता के लिए लोग विभिन्न स्रोतों की ओर देखते हैं, जिनका कोई अंत नहीं है। अधिकांश लोग “लक्ष्य से परे देख रहे हैं।” लेकिन हमें “बच्चे” होने की ज़रूरत नहीं है, जो “सिद्धांत [या फैशन] की हर हवा से उछाले और घुमाए जाते हैं।” परमेश्वर की ओर देखने से, हम कठिनाई में शांति पा सकते हैं और संदेह और आत्मिक चुनौती के समय में भी हमारा विश्वास बढ़ता रह सकता है। हम विरोध और अलगाव का सामना करते हुए भी शक्ति प्राप्त कर सकते हैं। हम आदर्श को वर्तमान वास्तविकता के साथ सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं। वास्तव में परमेश्वर ने जो आदेश दिया है उसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है, “हे पृथ्वी के दूर दूर के देश के रहनेवालो, मेरी ओर फिरो और उद्धार पाओ; क्योंकि मैं ही परमेश्वर हूं और कोई दूसरा नहीं।”
परमेश्वर की ओर देखने का अर्थ यह है कि वह हमारी प्राथमिकताओं में से एक मात्र नहीं है; बल्कि इसका अर्थ यह है कि वह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुझे पिछले जून में लेसोथो में हुई भयानक दुर्घटना फिर से याद आ गई। अस्पताल के बिस्तर पर, जीवित बची हुई युवतियों में से एक मार्गदर्शक, जो गिरजे में शामिल होने से पहले परमेश्वर में विश्वास नहीं करती थी, उस ने कहा कि अब उसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि उसकी जान क्यों बच गई। उनसे कहा, “यदि मुझे उत्तर मिलेगा तो तब जब मैं निरंतर परमेश्वर की सेवा करके ही उत्तर पाऊंगी।“ “मैं पहले सोचती थी कि मैं परमेश्वर से प्रेम करती हूं, लेकिन अब मैं सचमुच, सचमुच, सचमुच, सचमुच उससे प्रेम करती हूं। अब वह मेरे जीवन में [नम्बर एक] प्राथमिकता है।”
मैं पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा की गवाही देता हूं जो वचन, विचार, उद्देश्य और कार्य की पूर्ण एकता में एक ही परमेश्वर हैं जिनसे हम सभी अच्छी चीजों की आशा कर सकते हैं। मैं यीशु मसीह के प्रायश्चित की गवाही देता हूं, जहां से इस अद्भुत वादे को पूरा करने की शक्ति आती है: “मेरी तरफ देखो, और अंत तक दृढ़ बने रहो, और तुम जीवित रहोगे; क्योंकि जो अंत तक दृढ़ रहेगा उसे मैं अनंत जीवन दूंगा”। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।