महा सम्मेलन
मॉरमन की पुस्तक— हमारी यात्रा का एक असीमित खजाना
अक्टूबर 2025 महा सम्मेलन


9:47

मॉरमन की पुस्तक—­हमारी यात्रा का एक अमूल्य खज़ाना

जब हम मॉरमन की पुस्तक में पाए जाने वाले मसीह के शब्दों का आनंद लेते हैं, तो आत्मा हमें अनन्त सत्य को समझने में मदद करेगी।

क्या आपको वह पल याद है जब किसी ने आपको ऐसा उपहार दिया हो जिसने आपकी ज़िंदगी बदल दी हो? इस अक्टूबर को मुझे जीवन का एक सबसे बड़ा उपहार पाए हुए 40 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जब मैं हाई स्कूल में था, तब मैंने देखा कि हमारे एक सहपाठी में एक ऐसा प्रकाश था, जो ज़्यादातर अन्य युवाओं से अलग था। मुझे उसके आस-पास रेहना पसन्द था। एक दिन उसने मुझसे कहा कि वह अंतिम -दिनों के संतों का यीशु मसीह के गिरजा का सदस्य है । तब उसने मुझे एक उपहार दिया: मॉरमन की पुस्तक की एक प्रति । और उन्होंने मुझे कुछ पन्ने पढ़ने के लिए आमंत्रित किया और फिर अपने दो मित्रों से मिलने के लिए कहा, जो मेरे प्रश्नों का उत्तर दे सकते थे। वे मित्र प्र्चारक थे।

जब मैं प्रचारकों से मिला, उन्होंने मुझे मसीह की शिक्षा दी और मुझे भविषयवक्ता मोरोनी के निमंत्रण का पालन करने के लिए आमंत्रित किया: “और जब तुम इन बातों को स्वीकार करोगे, मैं तुम्हें उपदेश देना चाहता हूं कि तुम मसीह के नाम में, अनंत पिता, परमेश्वर से पूछो, कि क्या ये बातें सच्ची नहीं हैं; और यदि तुम सच्चे हृदय के साथ, वास्तविक उद्देश्य से मसीह में विश्वास करते हुए पूछोगे, तो वह पवित्र आत्मा के सामर्थ्य द्वारा तुम पर इसकी सच्चाई प्रकट करेगा” ( मोरोनी 10:4)

मैने मॉरमन की पुस्तक के कई पन्ने पढे और प्रार्थना की। हालांकि मुझे अभी तक उन सभी बातों की गहरी समझ नहीं थी जो प्रचारक मुझे सिखा रहे थे, फिर भी मेरे हृदय में यह अनुभव हुआ कि जो मैं पढ़ रहा था वह अच्छा है और परमेश्वर से आया है। मुझे मोरोनी के वचन की पुष्टि मिली: “और पवित्र आत्मा की सामर्थ से तुम सब बातों का सत्य जान सकते हो।” (मोरोनी 10:5)।

जब मैने यीशु मसीह के अन्तिम-दिनो के संतों की गिरजा में बपतिस्मा लिया, तो स्कूल के कुछ मित्रों ने मुझे यह समझाने की कोशिश की कि मैंने गलत निर्णय लिया है और यह गिरजा सच्चा नहीं है। हर बार जब मैंने ऐसे चुनौतियों का सामना किया, तो मैंने पवित्रशास्त्रों का अध्ययन करने और प्रार्थना करने के द्वारा यह पुष्टि प्राप्त की कि मैं परमेश्वर के साथ किए गए अपने अनुबन्धो के प्रति सच्चा बना रहूं। तब से, मॉरमन की पुस्तक मेरी साथी रही है और मेरे नश्वर जीवन-यात्रा में एक अमूल्य खज़ाना बन गयी है।

मॉरमन की पुस्तक एक पुस्तक से कहीं अधिक है। यह यीशु मसीह का एक और नियम है, जो अनेक प्राचीन भविषयवक्ताओ द्वारा भविष्यवाणी और प्रकटीकरण की आत्मा के माध्यम से लिखी गई है।

मॉरमन की पुस्तक में दर्ज सबसे महत्वपूर्ण घटना है प्रभु यीशु मसीह की उसके पुनरुत्थान के तुरंत बाद नफ़ाइयों के बीच व्यक्तिगत सेवकाई। मॉरमन की पुस्तक “सुसमाचार के सिद्धांतों को बताती है, उद्धार की योजना की रूपरेखा तैयार करती है, और मनुष्यों को बताती है कि उन्हें इस जीवन में शांति और आने वाले जीवन में अनंत उद्धार प्राप्त करने के लिए क्या करना चाहिए“ (मॉरमन की पुस्तक का परिचय)।

मॉरमन की पुस्तक यीशु मसीह की एक और अन्य नियम का पहला संस्करण मार्च 1830 में न्यूयॉर्क राज्य के एक छोटे से नगर में प्रकाशित हुआ था। भविष्यवक्ता जोसफ स्मिथ केवल 23 वर्ष के थे जब उन्होंने 1829 में इस पुस्तक का अनुवाद पूरा किया। उसने लगभग पूरी पुस्तक का अनुवाद 75 दिनों से भी कम समय में कर लिया, और मुद्रण प्रक्रिया में लगभग सात महीने लगे।

आज, लगभग 80,000 पूर्णकालिक प्र्चारक दुनिया के 150 से अधिक देशों में सेवा कर रहे हैं, स्वयंसेवक के रूप में अपने जीवन को समर्पित करते हुए यह साक्ष्य देने के लिए कि मॉरमन की पुस्तक सत्य है और यह यीशु मसीह की पुष्टि करता है।

इस साल जून में नए मिशन अध्यक्ष के लिए आयोजित हालिया सेमिनार में, हमारे प्रिय भविष्यद्वक्ता, अध्यक्ष रसल एम. नेल्सन ने मॉरमन की पुस्तक के प्रति अपना शक्तिशाली साक्ष्य साझा किया: “मॉरमन की पुस्तक परमेश्वर का वचन है।“ यह मसीह के सिद्धांत की शिक्षा देता है और उद्धारकर्ता के प्रायश्चित के बारे में किसी भी अन्य पुस्तक से अधिक समझाता है।”

मैं तीन सुझाव देना चाहूंगा जो हमें मॉरमन की पुस्तक का अध्ययन करके यीशु मसीह के प्रति अपने परिवर्तन को और गहरा करने में सहायता कर सकते हैं:

1. अपने दैनिक अध्ययन में परिश्रमी और नियमित रहें

जैसा कि अलमा और मुसायाह के पुत्रों ने किया, वैसे ही हमें भी पवित्रशास्त्र को लगन से खोजना चाहिए, ताकि हम परमेश्वर का वचन जान सकें” और सत्य में दृढ़ हो सकें (अलमा 17:2)।

जॉर्जिया अटलांटा मिशन में मार्गदर्शको के रूप में सेवा करते हुए, हमने हर प्रचारक को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक मॉर्मन की पुस्तक का अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उस प्रतिबद्धता ने हमारे विश्वास को बढ़ाया और हमें चमत्कारों की आशा करने में मदद की।

संभव है कि मिशन के बाद हमारे पास प्रतिदिन पवित्रशास्त्र अध्ययन के लिए उतना समय न हो, लेकिन मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि यदि आप प्रतिदिन प्रार्थनापूर्वक मॉरमन की पुस्तक का अध्ययन करना ईमानदारी से प्राथमिकता देंगे, तो आपको प्रभु और उनकी प्रतिज्ञाओं में अधिक आत्मिक शक्ति और आत्मविश्वास मिलेगा।

2. मसीह के वचनों पर ध्यान केंद्रित करके अपने अध्ययन को और अधिक सार्थक बनाएं

नफी ने सिखाया कि मसीह के वचनों में आनंदित रहो; क्योंकि देखो, मसीह के वचन तुम्हें वह सब बातें बताएंगें जो तुम्हें करनी चाहिए।”(2 नफी 32:3)।

वचन का भोजन करना केवल पढ़ने से अधिक है—इसका अर्थ है रस लेना, मनन करना, और उसे जीवन में लागू करना। जब आप मॉरमन की पुस्तक का अध्ययन करें, तो यह विचार करें कि आप अपने पवित्रशास्त्र अध्ययन को और अधिक अर्थपूर्ण कैसे बना सकते हैं। उदाहरण के लिए:

  • गॉस्पेल लाइब्रेरी में अध्यन स्त्रोतो का उपयोग करे।

  • अनन्त सत्यों की पहचान करना जो हमें परमेश्वर की योजना को समझने में सहायता करते हैं और हमें हमारे स्वर्गीय पिता के साथ अनुबन्धो को बनाने और उन्हें निभाने के लिए मार्गदर्शन करते हैं।

  • महत्वपूर्ण वाक्यांशों को रेखांकित करें और अपने अध्ययन के दौरान सीखी हुई बातों को सुरक्षित रखने के लिए अपने अनुभवों को लिखें।

मॉरमन की पुस्तक में हमारी आत्मा के प्रश्नों का उत्तर देने की शक्ति है। नफी ने कहा था, “मैंने सभी पवित्र शास्त्रों को हम पर लागू किया, ताकि इनसे हमें लाभ और शिक्षा मिले” (1 नफी 19:23)।

मैं आपको आमंत्रित करता हूं कि आप मसीह के वचनों पर मनन करें। वे आपके लिए प्र्कटीकरण के द्वार खोलेंगे और आपको दिखाएंगे कि अपने जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में आपको क्या करना चाहिए ताकि आप उनके और निकट आ सकें।

मॉरमन की पुस्तक की सत्यता की अपनी गवाही दे।

जिस प्रकार लेही ने जीवन के वृक्ष के फलों को अपने परिवार के साथ बाँटने की इच्छा व्यक्त की (देखें 1 नफ़ी 8:12),जब हम मॉरमन की पुस्तक की सच्चाई के प्रति गवाही प्राप्त करते हैं, तो हम यीशु मसीह के सुसमाचार को जानने से मिलने वाली खुशी को दूसरों के साथ साझा करने की इच्छा विकसित करते हैं।

बहन बेंसन मॉरमन की पुस्तक के साथ

हमारी एक प्र्चारक बहन बेंसन, जो इस सत्र में हमारे साथ शामिल है, ने मुझसे अपने छोटे भाई की मदद करने की अपनी इच्छा साझा की। उस समय, वह कॉलेज जाने की तैयारी कर रहा था, और प्र्चार-कार्य मिशन की सेवा करने को लेकर निश्चित नहीं था। मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि मैंने सिस्टर बेन्सन को उनके मिशन के पहले चार महीनों के दौरान मॉरमन की पुस्तक पढ़ने के लिए आमंत्रित किया, उनकी पसंदीदा आयतों को चिन्हित किया, और फिर उस प्रति को उनके भाई को भेज दिया।

बहन बेंसन ने चिन्हित की हुई मॉरमन की पुस्तक की प्रति भेजी और अपने भाई को प्रत्येक रात उससे पढ़ने के लिए आमंत्रित किया। वह बाद में मुझसे साझा करने लगीं: “मेरे प्र्चार-कार्य पर जाने से पहले, मेरा भाई यह निश्चित नहीं था कि वह पूर्णकालिक प्र्चार-कार्य सेवा करना चाहता है, क्योंकि वह सीधे कॉलेज जाना चाहता था। “धीरे-धीरे, समय के साथ, जैसे-जैसे उसने मॉरमन की पुस्तक पढ़ी, उसने अपने जीवन में बढ़ती खुशी पाई और प्र्चार-कार्य सेवा करने पर विचार करना शुरू किया।”

एल्डर बेंसन

बहन बेंसन के प्र्चार-कार्य पूरा करने से दो हफ्ते पहले, उनके भाई ने अपना प्र्चार-कार्य बुलाहट को खोला। वह अब मेक्सिको टक्सटला गुटियरेज़ मिशन में सेवा कर रहे हैं। मॉरमन की पुस्तक के माध्यम से, एल्डर बेंसन ने अपने जीवन के आत्मिक परिदृश्य को समझा, जिसने उन्हें प्रभु की सेवा करने और विश्वास करने का निर्णय लेने में मार्गदर्शन किया कि सब कुछ सही ढंग से होगा। वह निर्णय एक चमत्कार था— जो मसीह के शब्दों की शक्ति से प्रभावित है।

मेरे प्रिय भाइयों और बहनों, मैं आप में से प्रत्येक को प्रोत्साहित करता हूं कि आप मॉरमन की पुस्तक के अपने अध्ययन को और गहरा करें। मै जानता हुं कि जब हम मॉरमन की पुस्तक में पाए जाने वाले मसीह के शब्दों का आनंद लेते हैं, तो आत्मा हमें शाश्वत सत्य को समझने में मदद करेगी और उन लोगों के साथ अपने गवाही को दृढ़ता से साझा करने में सहायता करेगी, जिन्हें प्रभु ने अपना संदेश सुनने के लिए तैयार किया है। प्रभु ने कहा हैं, “मेरे निर्वाचित मेरे स्वर को सुनते हैं और अपने हृदय को कठोर नहीं करते।” (सिद्धान्त और अनुबन्ध 29:7)। मैं गवाही देता हूं कि जो लोग विश्वास के साथ परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, वे पवित्र आत्मा की शक्ति द्वारा मॉरमन की पुस्तक की सत्यता और दिव्यता की गवाही प्राप्त करेंगे। इसकी मैं यीशु मसीह के नाम में गवाही देता हूं, आमीन।

विवरण

  1. Russell M. Nelson, “Sacrament Meeting” (address given at the seminar for new mission presidents, June 23, 2016).