महा सम्मेलन
पवित्र चीज़ों के प्रति सम्मान
अप्रैल 2025 महा सम्मेलन


14:49

पवित्र चीज़ों के प्रति सम्मान

पवित्रता के प्रति आदर सच्ची कृतज्ञता और सच्ची खुशी को बढ़ाता है, हमारे मन को प्रकटीकरण की ओर ले जाता है, और हमारे जीवन में अधिक आनंद लाता है।

निर्गमन की पुस्तक में, हम मूसा के साथ होरेब पर्वत की ढलानों पर यात्रा करते हैं, जहां वह अपनी दैनिक चिंताओं से दूर होकर जलती हुई झाड़ी को देखने के लिए तैयार होता है —ऐसा कुछ हम सभी को करने के लिए तैयार रहना चाहिए--देखा कि झाड़ी जल रही है, पर भस्म नहीं होती। जब वह निकट आया, “तो परमेश्वर ने झाड़ी के बीच से उसे पुकारा, और कहा, मूसा, मूसा। उसने कहा, मैं यहां हूं। और [परमेश्वर] ने कहा, “अपने पांवों से जूतियों को उतार दे, क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र भूमि है।” बड़ी सम्मान, दीनता और आश्चर्य के साथ मूसा ने अपने जूते उतार दिए और प्रभु का वचन सुनने तथा उनकी पवित्र उपस्थिति का अनुभव करने के लिए स्वयं को तैयार किया।

वह पवित्र पर्वत प्रकटीकरण विस्मयकारी श्रद्धा से भरा एक अनुभव था, मूसा को उसकी दिव्य पहचान से जोड़ता था, और वास्तव में, एक विनम्र चरवाहे से एक शक्तिशाली भविष्यवक्ता में उसके परिवर्तन का एक प्रमुख तत्व था, जिसने उसे जीवन में एक नए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया था। इसी प्रकार, हममें से प्रत्येक व्यक्ति विनम्रता के गुण को अपने आत्मिक चरित्र का पवित्र हिस्सा बनाकर अपनी शिष्यता को आत्मिकता के उच्चतर स्वरूप में परिवर्तित कर सकता है।

शब्द सम्मान का अर्थ लैटिन क्रिया रेवेररी, से लिया गया है, जिसका अर्थ है “विस्मय से खड़े होना।” सुसमाचार अर्थ में, यह परिभाषा गहन सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता की भावना या दृष्टिकोण के साथ मिलती है। जिन लोगों का हृदय पश्चातापी है तथा परमेश्वर और यीशु मसीह के प्रति गहरा प्रेम है, उनके द्वारा पवित्रता के प्रति की गई ऐसी अभिव्यक्ति, उनकी आत्माओं में अधिक आनंद उत्पन्न करती है।

पवित्र वस्तुओं के प्रति श्रद्धा एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक गुण की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति है; यह पवित्रता के साथ हमारे संबंध का एक उप-उत्पाद है और हमारे स्वर्गीय पिता और हमारे उद्धारकर्ता, यीशु मसीह के प्रति हमारे प्रेम और निकटता को दर्शाता है। यह आत्मा के सबसे उत्कृष्ट अनुभवों में से एक है। ऐसा सदाचार हमारे विचारों, हृदयों और जीवन को परमेश्वर की ओर निर्देशित करता है। वास्तव में, विनम्रता आत्मिकता का केवल एक पहलू नहीं है; यह इसका सार है—वह आधार जिस पर आत्मिकता का निर्माण होता है, जो परमेश्वर से व्यक्तिगत संबंध स्थापित करता है, जैसा कि हमारे बच्चे सिखाते हैं जब वे गाते हैं: “जब मैं विनम्र होता हूं, मैं अपने हृदय में जानता हूं / स्वर्गीय पिता और यीशु निकट हैं।”

यीशु मसीह के शिष्यों के रूप में, हमें अपने जीवन में सम्मान के उपहार को विकसित करने के लिए आमंत्रित किया जाता है ताकि हम स्वयं को परमेश्वर और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ गहन संगति के लिए खोल सकें, और साथ ही साथ अपने आत्मिक चरित्र को मजबूत कर सकें। यदि हमारे हृदयों में ऐसी अधिक भावनाएँ होती, तो निस्संदेह हमारे जीवन में अधिक आनंद और प्रसन्नता होती, और दुःख और उदासी के लिए कम स्थान होता। हमें याद रखना चाहिए कि पवित्र चीज़ों के प्रति सम्मान दिखाने से हम जो कुछ भी प्रतिदिन करते हैं, उसका बहुत प्रभाव आ जाता है और हमारी कृतज्ञता की भावना मजबूत होती है —उच्चतर और पवित्र चीज़ों के प्रति विस्मय, सम्मान और प्रेम की प्रेरणा मिलती है।

दुर्भाग्यवश, हम ऐसे विश्व में रह रहे हैं जहां पवित्र चीजों के प्रति सम्मान को दिखाना असामान्य होता जा रहा है। वास्तव में, संसार अक्सर असम्मानजनक चीजों का जश्न मनाती है, जो किसी भी पत्रिका, टेलीविजन कार्यक्रम या इंटरनेट के अवलोकन से पता चलता है। पवित्रता के प्रति सम्मान का अभाव, दृष्टिकोण और आचरण में लापरवाही को बढ़ाता है, जो एक पीढ़ी को तेजी से उदासीनता की ओर ले जाता है और अगली पीढ़ी को दुख में धकेल देता है।

अनादर हमें परमेश्वर के साथ किए गए अनुबंधों से भी दूर ले जा सकता है, तथा परमेश्वर के समक्ष हमारी जवाबदेही की भावना को कम कर सकता है। परिणामस्वरूप, हम केवल अपने आराम और संतुष्टि के बारे में ही चिंता करते है, अंततः पवित्र चीजों को ​जो कि परमेश्वर से है, स्वर्गीय पिता की संतान के रूप में अपने दिव्य स्वभाव का तिरस्कार करके अपवित्र स्थान पर पहुंचने का जोखिम उठा लेते हैं। पवित्र चीज़ों के प्रति अनादर हमारे प्रकटीकरण के संवेदनशील माध्यमों को बाधित करके शत्रु के उद्देश्यों को बढ़ावा देता है, जो हमारे समय में हमारे आत्मिक अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं।

पवित्र चीज़ों के प्रति आदर का अर्थ और महत्व पूरे पवित्रशास्त्रों में अच्छी तरह से बताया गया है। सिद्धांत और अनुबंधों में एक उदाहरण यह संकेत देता है कि हमारे स्वर्गीय पिता और उनके पुत्र यीशु मसीह के प्रति आदर उन लोगों के लिए एक आवश्यक गुण है जो स्वर्गीय राज्य प्राप्त करते हैं।

एक गिरजे के रूप में हम पिता और पुत्र को हर पहलू में अत्यंत पवित्रता और सम्मान में रखने का प्रयास करते हैं, जिसमें हम उनकी छवियों को कैसे चित्रित करते हैं। पवित्र आत्मा का मार्गदर्शन यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण सहायक है की पिता और पुत्र की पवित्र प्रकृति, चरित्र और ईश्वरीय विशेषताओं को कैसे प्रतिबिंबित करना चाहिए। हम ऐसे तत्वों को चित्रित करने से बचने के लिए बहुत सावधान रहते हैं जो हमारे स्वर्गीय पिता और उसके पुत्र यीशु मसीह और उनकी शिक्षाओं पर से हमारे ध्यान को भटका सकते हैं, जिसमें यह भी देखना है कि हम तकनिकी द्वारा प्रदान किए गए उन्नत उपकरणों का कैसे इस्तेमाल करते हैं, जैसे कि सामग्री और चित्र बनाने के लिए बनावटी बुद्धिमत्ता (AI ) का उपयोग करना।

यही सिद्धांत गिरजे के आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से उपलब्ध किसी भी सूचना स्रोत पर लागू होता है। प्रत्येक पाठ, पुस्तक, मैनुअल और संदेश को आत्मा के निर्देशन में सावधानीपूर्वक विकसित और अनुमोदित किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हम यीशु मसीह के सुसमाचार के पवित्र गुण, मूल्यों और मानकों को बनाए रखें। गिरजे के युवा वयस्कों के लिए हाल ही में एक संदेश में, एल्डर डेविड ए. बेडनार ने सिखाया, “आध्यात्मिकता और प्रौद्योगिकी के जटिल चौराहे को नेविगेट करने के लिए, अंतिम-दिनों के संतों को विनम्रतापूर्वक और प्रार्थनापूर्वक (1) सुसमाचार सिद्धांतों की पहचान करनी चाहिए जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उनके उपयोग का मार्गदर्शन कर सकते हैं और (2) पवित्र आत्मा की संगति और प्रकटीकरण के आत्मिक उपहार के लिए ईमानदारी से प्रयास करना चाहिए।”

मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, आधुनिक तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो गई हो, पर वह पवित्र आत्मा के प्रभाव से प्राप्त विनम्रता में पाए जाने वाले आश्चर्य, विस्मय की बराबरी नहीं कर सकती। मसीह के अनुयायियों के रूप में, हमें सावधान रहना चाहिए कि हम ए.आई- -जनित सामग्री और चित्रों का अनुचित उपयोग करके परमेश्वर और उसके पुत्र के साथ अपने संबंध को कमजोर न करें। हमें याद रखना चाहिए कि एक आधुनिक तकनीकी “बाहुबल” पर भरोसा करना प्रेरणा, उपदेश और गवाही के लिए एक अपर्याप्त और अपमानजनक विकल्प है जिसे केवल पवित्र आत्मा की शक्ति के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। जैसा कि नफी ने कहा: “ओह प्रभु, मैंने तुम पर विश्वास किया और सदैव तुम पर विश्वास करता ही रहूंगा ! मैं मानव बाहुबल पर विश्वास नहीं करूंगा ।”।

अन्य प्रकटीकरण में, भविष्यवक्ता जोसफ स्मिथ को निर्देश दिया गया था कि प्रभु के लिए बनाए गए मंदिर उसके प्रति आदर का स्थान होने चाहिए। अपने पूरी सेवकाई के दौरान, हमारे प्रिय भविष्यवक्ता, अध्यक्ष रसेल एम. नेल्सन ने पवित्र मंदिर में आदर पूर्वक हमारी आराधना पर महत्व दिया है। प्रभु के घर में, हमें पिता और पुत्र की पवित्र उपस्थिति में प्रवेश करने के बारे में सिखाया जाता है। मैंने हमेशा यह बात शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक पाई है कि मंदिर में प्रवेश करने और वहां पवित्र विधियों में भाग लेने के लिए स्वयं को तैयार करने के लिए हम जो पहला काम करते हैं, वह है अपने जूते उतारना और सफेद वस्त्र पहनना। मूसा की तरह, यदि हम ऐसा करें, तो हम यह पहचान सकते हैं कि अपने सांसारिक जूते उतारना और पवित्र भूमि पर कदम रखना यह उच्चतर एवं पवित्र तरीकों से परिवर्तित होने की शुरुआत है।

भाइयो और बहनो, हमें पवित्र चीजों के प्रति आदर की खोज करने और अपने शिष्यत्व को आत्मिकता और आराधना के गहरे स्तर में परिवर्तित करने के लिए मूसा की तरह पहाड़ की चोटी पर चढ़ने की आवश्यकता नहीं है। उदाहरण के लिए, हम इसे तब पा सकते हैं जब हम अपने घर के वातावरण को सांसारिक प्रभावों से बचाने का प्रयास करते हैं। यह यीशु मसीह के नाम पर हमारे स्वर्गीय पिता के समक्ष ईमानदारी और उत्साह से प्रार्थना करने और पवित्रशास्त्रों और हमारे भविष्यवक्ताओं की शिक्षाओं में पाए जाने वाले परमेश्वर के वचन के परिश्रमपूर्वक अध्ययन के माध्यम से हमारे उद्धारकर्ता को बेहतर ढंग से जानने की कोशिश करने के द्वारा पूरा किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, इस तरह के आत्मिक परिवर्तन आ सकते हैं जब हम आज्ञाओं का पालन करते हुए प्रभु के साथ बनाए अनुबंधों का सम्मान करने का प्रयास करते हैं। ये प्रयास हमारे हृदय में शांति और निश्चित स्थिरता ला सकते हैं। ऐसे कार्यों पर ध्यान केन्द्रित करने से निश्चित रूप से हमारे घरों को आत्मिक शरण के आदर पूर्ण स्थानों में बदलने में मदद मिल सकती है—विश्वास के व्यक्तिगत पवित्र स्थान जहां आत्मा निवास करती है, ठीक मूसा के पर्वत अनुभव की तरह।

हम भी ऐसे आत्मिक परिवर्तन का अनुभव कर सकते हैं जब हम गिरजे की आराधना सेवा में विश्वास के साथ भाग लेते हैं, जिसमें पवित्र स्तुति गीत के माध्यम से अपने ह्रदयों को प्रभु की ओर मोड़ना भी शामिल है। मूसा की तरह सांसारिक विकर्षणों से दूर रहना, विशेष रूप से हमारे मोबाइल फोन या ऐसी किसी भी चीज़ से जो इस पवित्र क्षण के साथ सामंजस्य नहीं रखती, हमें अपना पूरा ध्यान प्रभु भोज लेने पर सक्षम बनाता है, हमारे मन और हृदय उद्धारकर्ता और उसके प्रायश्चित बलिदान के साथ-साथ हमारे अनुबधों पर केंद्रित होते हैं। इस प्रकार का संस्कारात्मक ध्यान उद्धारकर्ता के साथ हमारी संगति के एक आदरपूर्ण नवीनीकरण क्षण को बढ़ावा देगा और सब्त को आनन्दमय दिन बनाएगा तथा हमारे जीवन को रूपान्तरित करेगा।

अंततः, हम अपने शिष्यत्व में इस आत्मिक परिवर्तन का अनुभव कर सकते हैं जब हम नियमित रूप से प्रभु के घर के पर्वत—हमारे पवित्र मंदिरों—में आराधना करते हैं और अनुबंधित आत्मविश्वास के साथ जीने का प्रयास करते हैं, विशेष रूप से जब हम नश्वर जीवन की परीक्षाओं का सामना करते हैं ।

मेरी पत्नी और मैंने व्यक्तिगत रूप से पवित्र पर्वत के कुछ क्षणों का आदर पुर्वक अनुभव किया है, क्योंकि हमने इन सिद्धांतों को अपने जीवन में लागू करने का प्रयास किया है, जिससे हमारी शिष्यता में एक सार्थक परिवर्तन हुआ है। मुझे याद है जैसे कि यह कल की ही बात थी जब हम अपने दूसरे बच्चे को दफनाने के लिए कब्रिस्तान से निकल रहा था, जो समय से पहले पैदा हुआ था और बच नहीं सका, जबकि मेरी पत्नी का अभी भी अस्पताल में ईलाज चल रहा था। मुझे याद है कि मैंने बड़ी उत्सुकता और श्रद्धा के साथ परमेश्वर से प्रार्थना की थी, तथा उस चुनौतीपूर्ण परीक्षा से निपटने के लिए मदद मांगी थी। उस क्षण, मुझे अपने हृदय में एक स्पष्ट और शक्तिशाली आत्मिक आश्वासन प्राप्त हुआ: यदि मैं और मेरी पत्नी सहनशील रहे, यीशु मसीह के सुसमाचार के अनुसार जीवन जीने से मिलने वाले आनन्द को थामे रहें, तो हमारे जीवन में सब कुछ ठीक रहेगा। उस समय जो एक दुर्गम, दुःखद चुनौती प्रतीत हो रही थी, वह एक पवित्र, आदर पुर्ण अनुभव में बदल गई, एक ऐसी आधारशिला जिसने हमारे विश्वास को बनाए रखने में मदद की और हमें प्रभु के साथ किए गए अनुबंधों और मेरे तथा मेरे परिवार के लिए उसके वादों में विश्वास दिलाया है।

मेरे भाइयो और बहनो, पवित्रता के प्रति आदर सच्ची कृतज्ञता और सच्ची खुशी को बढ़ाता है, हमारे मन को प्रकटीकरण की ओर ले जाता है, और हमारे जीवन में अधिक आनंद लाता है। यह हमारे पैरों को पवित्र भूमि पर रखता है और हमारे हृदय को प्रभु की ओर ले जाता है।

मैं आपको गवाही देता हूं कि जब हम अपने दैनिक जीवन में ऐसे गुणों को शामिल करने का प्रयास करते हैं, तो हम अपनी विनम्रता को बढ़ाने, हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा की समझ का विस्तार करने, और प्रभु के साथ किए गए अनुबंधों के वादों में अपने विश्वास को मजबूत करने में सक्षम होंगे। मैं गवाही देता हूं कि जब हम पवित्र चीजों के प्रति आदर के इस उपहार को अपनाते हैं --- चाहे वह प्रभु के घर के पहाड़ पर हो, सभागृह में हो, या हमारे अपने घर में हो - हम अपने स्वर्गीय पिता और यीशु मसीह के परिपूर्ण प्रेम से जुड़कर अद्भुत आश्चर्य और विस्मय से भर जाएंगे। मैं हमारे उद्धारकर्ता और उद्धारक यीशु मसीह के पवित्र नाम में इन सच्चाइयों की आदर पूर्वक गवाही देता हूं, आमीन।

विवरण

  1. निर्गमन 3:4-5

  2. latin-dictionary.net देखें, “रेवरेरी।”

  3. देखें “Reverence Is Love,” Children’s Songbook, 31।

  4. देखें Teachings of Presidents of the Church: David O. McKay (2003), 31.

  5. देखें सिद्धांत और अनुबंध 63:64

  6. देखें बॉयड के. पैकर, “Reverence Invites Revelation,” एन्साइन,नवंबर 1991, 22; देखें रसेल एम. नेल्सन, “आनन्द और आध्यात्मिक अतिजीवनl,” लियाहोना, नवंबर 2016, 81–84।

  7. देखें सिद्धांत और अनुबंध 76:92-95

  8. डेविड ए. बेडनार, “चीजें जैसी वे वास्तव में हैं 2.0” (युवा वयस्कों के लिए विश्वव्यापी भक्ति, 3 नवंबर, 2024), गॉस्पेल लाइब्रेरी; यह भी देखें गेरिट डब्ल्यू. गोंग और जॉन सी. पिंगरी, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गिरजे उपयोग के सिद्धांत” (नेतृत्व संवर्धन श्रृंखला, 13 मार्च, 2024) और गेरिट डब्ल्यू. गोंग, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-अवसर, सावधानियां, गिरजा मार्गदर्शक सिद्धांत” (महा सम्मेलन नेतृत्व बैठक, 5 अप्रैल, 2024) भी देखें।

  9. 2 नफी 4:34

  10. देखें सिद्धांत और अनुबंध 109:13, 16-21

  11. देखें रसेल एम. नेल्सन, “Becoming Exemplary Latter-day Saints,” लियाहोना, नवंबर 2018, 114; “The Temple and Your Spiritual Foundation,” लियाहोना, नवंबर 2021, 96.

  12. देखें रसल एम. नेल्सन, “विश्वास के साथ भविष्य को अपनाओ,” लियाहोना, नवंबर 2020, 74-75।

  13. देखें सिद्धांत और अनुबंध 136:28