महा सम्मेलन
दया की योजना
अप्रैल 2025 महा सम्मेलन


11:6

दया की योजना

प्रभु दयालु हैं और हमारे स्वर्गीय पिता की उद्धार की योजना वास्तव में दया की योजना है।

भविष्यवक्ता का निमंत्रण

पिछली अप्रैल के सम्मेलन में, इस खुशी की खबर के तुरंत बाद कि गिरजे ने कर्टलैंड मंदिर हासिल कर लिया है, अध्यक्ष रसल एम. नेल्सन ने हमें कर्टलैंड मंदिर की समर्पण प्रार्थना का अध्ययन करने के लिए आमंत्रित किया, जो सिद्धांत और अनुबंधों के खंड 109 में लिखी है। अध्यक्ष नेल्सन ने कहा था, कि समर्पित प्रार्थना सिखाती है कि “कैसे मंदिर आत्मिक रूप से आपको और मुझे इन अंतिम दिनों में जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।”

मुझे यकीन है कि खंड 109 के आपके अध्ययन से आपको ऐसी समझ मिलेगी जिससे आपको आशीष मिलती है। आज शाम, मैं कुछ बातें साझा करना चाहता हूं जो मैंने हमारे भविष्यवक्ता का आमंत्रण का पालन करते हुए सीखी थी। मेरे ,अध्ययन ने मुझे जिस शांतिदायक मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया, उसने मुझे याद दिलाया कि प्रभु दयालु है और हमारे स्वर्गीय पिता की उद्धार की योजना वास्तव में दया की योजना है।

मंदिर में सेवा करते हुए नव-नियुक्त किए गए प्रचारक

जैसा कि आप जानते होंगे, “नए नियुक्त किेए गए प्रचारकों को यथाशीघ्र मंदिर वृत्तिदान प्राप्त करने और परिस्थितियों के अनुमति देने पर जितनी बार संभव हो मंदिर जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।” एक बार वृत्तिदान प्राप्त करने के बाद, वे “प्रचारक सेवा शुरू करने से पहले मंदिर विधि कार्यकर्ता के रूप में भी काम कर सकते हैं।”

एमटीसी में प्रवेश करने से पहले मंदिर में बिताया गया समय नए प्रचारकों के लिए एक अद्भुत आशीष हो सकती है जब इससे वे मंदिर अनुबंधों के बारे में अधिक सीखते हैं और फिर उन अनुबंधों की आशीषों को संसार के साथ साझा करते हैं।

लेकिन खंड 109 का अध्ययन करने पर, मैंने यह सीखा है कि मंदिर में, परमेश्वर नए प्रचारकों को—वास्तव में, हम सभी को—एक अतिरिक्त, पवित्र तरीके से सशक्त बनाता है। प्रकटीकरण द्वारा दी गई समर्पण प्रार्थना में, जोसफ ने प्रार्थना की थी कि “जब आपके सेवक आपकेभवन से बाहर जाएंगे, … आपकी नाम की गवाही देने के लिए”—हर प्रकार के “पृथ्वी के महान जनों को, और सारे लोगों को” और “पृथ्वी सारे गरीब, जरूरतमंद, और पीड़ित जनों … के हृदय विनम्र हों।” उन्होंने प्रार्थना की थी कि “सच्चाई के समक्ष वे अपने मतभेंदों को छोड़ें, और आपके लोग सभी की दृष्टि में दया प्राप्त करें; पृथ्वी के सभी छोर जानें कि हम, आपके सेवकों ने, आपकी वाणी सुनी है, और आपने हमें भेजा है।”

यह किसी नए नियुक्त किए गए प्रचारक के लिए एक सुंदर प्रतिज्ञा है—मतभेदों को “सच्चाई के समक्ष छोड़ना”, “सबकी दृष्टि में दया प्राप्त करना”, और संसार को यह बताना कि वे प्रभु द्वारा भेजे गए हैं। हममें से प्रत्येक को निश्चित रूप से इन आशीषों की आवश्यकता है। यह कितनी बड़ी आशीष होगी कि जब हम पड़ोसियों और सहकर्मियों के साथ व्यवहार करें तो हृदय विनम्र हों। समर्पण प्रार्थना यह स्पष्ट रूप से नहीं बताती कि मंदिर में हमारा समय दूसरों के हृदयों को किस प्रकार विनम्र करेगा, परन्तु मैं आश्वस्त हूं कि यह इस बात से जुड़ा है कि प्रभु के भवन में बिताया गया समय हमें यीशु मसीह और उसकी दया पर केन्द्रित करके हमारे हृदयों को कैसे विनम्र करता है।

प्रभु ने जोसफ स्मिथ की दया की प्रार्थना का उत्तर देता है

जब मैंने कर्टलैंड समर्पण प्रार्थना का अध्ययन किया, तो मैं यह देखकर भी आश्चर्यचकित हुआ कि जोसेफ ने बार-बार दया की याचना ---की गिरजे के सदस्यों के लिए, गिरजे के शत्रुओं के लिए, देश के मार्गदर्शकों के लिए, पृथ्वी के राष्ट्रों के लिए, और व्यक्तिगत रूप से उन्होंने प्रभु से याचना की कि उसे याद रखें11 और उसकी प्रिय एम्मा और उनके बच्चों पर दया करें। और, व्यक्तिगत रूप से, उन्होंने प्रभु से विनती की कि वे उन्हें याद रखें और उनकी प्रिय एम्मा और उनके संतानों पर दया करें।

जोसफ को कैसा महसूस हुआ होगा जब, एक सप्ताह बाद, ईस्टर के दिन, 3 अप्रैल 1836 को, कर्टलैंड मंदिर में, उद्धारकर्ता उनके और ओलिवर काउडरी के सामने प्रकट हुआ और, जैसा कि सिद्धांत और अनुबंध के खंड 110 में लिखा है,सिद्धांत और अनुबंध की खंड 110 मैं, कहा था, “मैंने इस भवन को स्वीकार कर लिया है, और मेरा नाम यहां होगा; और मैं इस घर में दया में अपने लोगों के सामने स्वयं को प्रकट करूंगा।” दयालुता की यह प्रतिज्ञा जोसफ के लिए अवश्य ही विशेष अर्थ रखती होगी। और जैसा कि अध्यक्ष नेल्सन ने पिछली अप्रैल में सिखाया था, यह प्रतिज्ञा “आज प्रत्येक समर्पित मंदिर पर भी लागू होती है।”

प्रभु के भवन में दया प्राप्त करना

ऐसे कई तरीके हैं जिनसे हम प्रभु के भवन में दया प्राप्त कर सकते हैं। तब से यह सच है जब से प्रभु ने पहली बार इस्राएल को मंदिर बनाने और उसके केंद्र में “दया सिंहासन” रखने की आज्ञा दी थी।” मंदिर में हम जो अनुबंध बनाते हैं उनमें हम दया पाते हैं। बपतिस्मा के अनुबंधों के अतिरिक्त, ये अनुबंध हमें पिता और पुत्र से जोड़ते हैं और हमें उस तक अतिरिक्त पहुंच प्रदान करते हैं जिसे अध्यक्ष नेल्सन ने सिखाया है कि “एक विशेष प्रकार का प्रेम और दया … जिसे यूनानी में हेसेड” कहा जाता है।

हम अपने परिवारों के साथ अनंत काल के लिए मुहरबंद होने के अवसर में दया पाते हैं। मंदिर में, हम और भी स्पष्टता से यह समझ पाते हैं कि सृष्टि, पतन, उद्धारकर्ता का प्रायश्चित बलिदान, और हमारे स्वर्गीय पिता की उपस्थिति में फिर से लौटने की हमारी क्षमता—उद्धार की योजना का हर भाग—दया की अभिव्यक्ति है। वास्तव में, यह कहा जा सकता है कि उद्धार की योजना वास्तव में प्रसन्नता की योजना है क्योंकि यह “दया की योजना” है।

क्षमा मांगने से पवित्र आत्मा का द्वार खुलता है

मैं खंड 110 में दी गई सुंदर प्रतिज्ञा के लिए आभारी हूं कि प्रभु अपने मंदिरों में दया में स्वयं को प्रकट करेगा। मैं इसके लिए भी आभारी हूं कि यह इस बात को प्रकट करता है कि जब भी हम, जोसफ के समान, दया की याचना करेंगे, तो प्रभु स्वयं को दया में प्रकट करेगा।

खंड 109 में जोसफ स्मिथ की दया की याचना पहली बार नहीं थी जब उनकी दया की याचना ने प्रकटीकरण को प्रेरित किया था। पवित्र उपवन में, युवा जोसफ ने न केवल यह जानने के लिए प्रार्थना की कि कौन सा गिरजा सच्चा है, बल्कि उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने “दया के लिए प्रभु से प्रार्थना की थी, क्योंकि अन्य ऐसा कोई नहीं था जिसके पास मैं दया पाने के लिए जा सकता था।” किसी तरह, उन्हें यह एहसास हुआ कि उन्हें दया की आवश्यकता है, जो केवल प्रभु ही दे सकता है, जिससे स्वर्ग के द्वार खुलने में मदद मिली थी। तीन साल बाद, स्वर्गदूत मोरोनी प्रकट हुए, जिसके विषय में जोसफ ने कहा था कि यह उनकी “सभी पापों और मूर्खताओं की क्षमा के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर से प्रार्थना और विनती” थी।

दया की याचना के बाद प्रकटीकरण पाने का यह उदाहरण पवित्रशास्त्रों में दिखाई देता है। क्षमा के लिए प्रार्थना करने के बाद ही इनोस ने प्रभु की आवाज सुनी थी। राजा लमोनी के पिता का परिवर्तन उनकी प्रार्थना से शुरू होता है: “तुम्हें जानने के लिए मैं अपने सारे पाप त्याग दूंगा।” हो सकता है कि हमारे साथ ये नाटकीय घटनाएं न हों, लेकिन जिन लोग को कभी-कभी प्रार्थना का उत्तर पाना कठिन लगता है, उनके लिए प्रभु के दया की खोज करना पवित्र आत्मा की गवाही को महसूस करने के सबसे शक्तिशाली तरीकों में से एक है।

परमेश्वर की दया पर विचार करने से मॉरमन की पुस्तक की गवाही का द्वार खुलता है

इसी तरह का नियम मोरोनी 10:3–5 में खूबसूरती से सिखाया गया है। हम अक्सर इन पदों को यह सिखाने के लिए संक्षिप्त करते हैं कि, ईमानदारी से प्रार्थना करने के द्वारा, हम सीख सकते हैं कि मॉरमन की पुस्तक सच है या नहीं। लेकिन यह संक्षेप दया की महत्वपूर्ण भूमिका की उपेक्षा कर सकता है। सुनिए मोरोनी अपना उपदेश कैसे शुरू करता है: “मैं तुम्हें उपदेश देना चाहता हूं कि जब तुम इन बातों को पढ़ो,, … तुम याद रखो कि मानव संतानों के प्रति प्रभु कितना दयापूर्ण रहा है, आदम की सृष्टि से लेकर इस समय तक भी जिससे कि तुम इन बातों को प्राप्त करोगे, और अपने हृदयों में इन पर मनन करोगे।”

मोरोनी हमें न केवल इन बातों को पढ़ने के लिए प्रेरित करता है—उन अभिलेखों को जिन्हें वह मुहरबंद करने वाला था—बल्कि हमारे हृदयों में यह भी मनन करने के लिए जो मॉरमन की पुस्तक इस बारे में बताती है कि “प्रभु मानव संतानों के प्रति कितना दयापूर्ण रहा है।” यह प्रभु की दया पर मनन करना है जो हमें “परमेश्वर, अनन्त पिता से, मसीह के नाम पर पूछने के लिए तैयार करता है, कि क्या ये बातें सच्ची नहीं हैं।”

जैसा कि हम मॉरमन की पुस्तक पर विचार करते हैं, हम पूछ सकते हैं: क्या यह वास्तव में सच है, जैसा कि अल्मा ने सिखाया, कि परमेश्वर की दया की योजना यह आश्वासन देती है कि इस धरती पर रहने वाले हर व्यक्ति को पुनर्जीवित किया जाएगाऔर उन्हें “उनके … परिपूर्ण ढांचे में बहाल किया जाएगा”? क्या अमूलेक सही है - क्या उद्धारकर्ता की दया न्याय की सभी कड़वी वास्तविक मांगों को पूरा कर सकती है, जिन्हें अन्यथा हमें चुकाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा और इसके बजाय “[हमें] सुरक्षा की बाहों में घेर लेगा”?

क्या यह सच है, जैसा कि अलमा ने गवाही दी थी, कि मसीह ने न केवल हमारे पापों के लिए, बल्कि हमारे “दर्द और पीड़ाओं” के लिए भी कष्ट सहा ताकि वह “जान सके … क्या प्रभु वास्तव में इतना दयालु है, जैसा राजा बिन्यामीन ने सिखाया था, कि उसने “उन लोगों के पापों के लिए प्रायश्चित किया … जो अपने संबंध में परमेश्वर की इच्छा को जाने बिना मर गए हैं, या जिन्होंने अनजाने में पाप किया है”?

क्या यह सच है, जैसा कि लेही ने कहा था, कि “आदम का पतन हुआ ताकि मनुष्य हो; और मनुष्य हैं, ताकि उन्हें आनंद प्राप्त हो।”? और क्या यह सच है, जैसा कि अबिनादी ने यशायाह को उद्धृत करते हुए गवाही दी थी, कि यीशु मसीह “तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना”?

संक्षेप में, क्या मॉरमन की पुस्तक में सिखाई गई पिता की योजना वास्तव में इतनी दयालु है? मैं गवाही देता हूं कि यह है और मॉरमन की पुस्तक में दया की शांति देने वाली और आशापूर्ण शिक्षाएं सच्ची हैं।

फिर भी, मैं कल्पना करता हूं कि कुछ लोगों को, आपके विश्वासपूर्वक पढ़ने और प्रार्थनाओं के बावजूद, मोरोनी की इस प्रतिज्ञा को समझना कठिन लग सकता है कि स्वर्गीय पिता “पवित्र आत्मा की शक्ति से, इसकी सच्चाई को आपके सामने प्रकट करेगा।” मैं इस कठिनाई को जानता हूं क्योंकि मैंने इसे कई साल पहले महसूस किया था, जब मैंने मॉरमन की पुस्तक को पहली बार पढ़ा था, लेकिन मेरी प्रार्थनाओं का तत्काल और स्पष्ट उत्तर नहीं मिला था।

यदि आप संघर्ष कर रहे हैं, तो क्या मैं आपको मोरोनी की सलाह का पालन करने के लिए आमंत्रित कर सकता हूं उन कई तरीकों पर मनन करने के लिए जो मॉरमन की पुस्तक सिखाती है “मानव संतानों के प्रति प्रभु कितना दयालु रहा है“? अपने अनुभव के आधार पर, मुझे आशा है कि जब आप ऐसा करेंगे, तो पवित्र आत्मा की शांति आपके हृदय में प्रवेश कर सकती है और आप जान सकते हैं, विश्वास करो, और महसूस करो कि मॉरमन की पुस्तक और दया की जो योजना यह सिखाती है वह सच है।

मैं पिता के दया की महान योजना और उद्धारकर्ता की इसे पूरा करने की इच्छा के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। मैं जानता हूं कि यदि हम उसे खोजते हैं तो वह स्वयं को उसके पवित्र मंदिर में और हमारे जीवन के हर भाग में दया के साथ प्रकट करेगा। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

विवरण

  1. रसल एम. नेल्सन, “पौरोहित्य कुंजियों के उपहार में आनन्दित हों,” लियाहोना, मई 2024।

  2. रसल एम. नेल्सन, “पौरोहित्य कुंजियों के उपहार में आनन्दित हों,” 121।

  3. सामान्य विवरण पुस्तिका: अंतिम-दिनों के यीशु मसीह के गिरजे में सेवा करना24.5.1, , सुसमाचार लाइब्रेरी।

  4. मंदिर की सभी आशीषों के समान, परमेश्वर द्वारा इन आशीषों का प्रदान किया जाना भी मंदिर में हमारे द्वारा किए गए अनुबंधों को निभाने पर निर्भर है। देखे रसल एम नेल्सन , “संसार पर विजय पाना और विश्राम प्राप्त करना,” Liahona, Nov. 2022, 96:“प्रत्येक व्यक्ति जो … मंदिरों में अनुबंध बनाता—और उनका पालन करता है—उसने यीशु मसीह की शक्ति को प्राप्त करने में वृद्धि की है।”

    एक अन्य उदाहरण के रूप में, मंदिर पोशाक पहनने पर प्रथम अध्यक्षता के कथन पर विचार करें: “जब आप अपने अनुबंधों का पालन करते हैं, जिसमें आरंभिक विधियों में बताए गए वस्त्र पहनने का पवित्र विशेषाधिकार भी शामिल है, तो आपके पास उद्धारकर्ता के अनुग्रह, सुरक्षा, शक्ति और सामर्थ्य तक अधिक पहुंच होगी” (सामन्य विवरम पुस्तिका, 26.3.3.2;सुसमाचार लाइब्रेरी; महत्व दिया गया है)।

  5. सिद्धांत और अनुबंध 109:55-57

  6. देखें: रसेल एम. नेल्सन, “प्रभु यीशु मसीह फिर आएंगे,” लियाहोना, नवंबर 2024, 121– 121“यहां मैं आपसे प्रतिज्ञा करता हूं: यीशु मसीह का प्रत्येक सच्चा साधक उसे मंदिर में पाएगा। तुम उसकी दया को महसूस करोगे।”

  7. देखे सिद्धांत और अनुबंध 109:34: “इन लोगों पर दया करो, और क्योंकि सभी मनुष्य पाप करते हैं, अपने लोगों के अपराधों को क्षमा करो, और उन्हें हमेशा के लिए मिटा दो।”

  8. देखें सिद्धांत और अनुबंध 109:50

  9. देखें सिद्धांत और अनुबंध 109:54। जोसफ ने प्रभु से यह भी पूछा था “हम आप से याकूब की संतान पर दया करने की विनती करते हैं, ताकि यरूशलेम इस क्षण से मुक्ति प्राप्त करना आरंभ कर सके; और गुलामी का जुआ दाऊद के घराने से टूटना आरंभ हो सके; और यहूदा की संतान उन प्रदेशों में वापस लौटना आरंभ करे जो आपने उनके पूर्वज अब्राहम को दिए थे” (सिद्धांत और अनुबंध 109:62–64)।

  10. देखें सिद्धांत और अनुबंध 109:68

  11. देखें सिद्धांत और अनुबंध 109:69ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी शब्दकोश परिभाषित दया को “किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति दिखाई गई दया और करुणा” के रूप में परिभाषित करती है जो शक्तिहीन स्थिति में है। अनुग्रह, दया के समान, परमेश्वर के प्रेम और करुणा की अभिव्यक्ति है—उसका हेसेड। जबकि दया का अर्थ उस दंड को रोकना है जिसके हम पात्र हैं, दया का अर्थ सामान्यतः परमेश्वर द्वारा हमें ऐसी आशीष देना है जिसके हम पात्र नहीं हैं और जिसके लिए हमें योग्यता की परवाह नहीं है।

  12. सिद्धांत और अनुबंध 110:7

  13. व्यक्तिगत दया की अभिव्यक्ति में, जोसफ और ओलिवर से कहा गया, “देखो, तुम्हारे पाप क्षमा हुए; तुम मेरे सामने शुद्ध हो; इसलिए, अपने सिर ऊपर उठाओ और आनन्द मनाओ” (सिद्धांत और अनुबंध 110:5)।

  14. रसल एम. नेल्सन, “पौरोहित्य कुंजियों के उपहार में आनन्दित हों,”। अध्यक्ष नेल्सन ने कहा था, “मैं आपको मनन करने के लिए कहता हूं कि आपके लिए प्रभु की प्रतिज्ञा का व्यक्तिगत अर्थ क्या है।”

  15. देखें बाइबिल शब्दकोश, “मंडप”: “पवित्र पवित्रों में फर्नीचर का केवल एक टुकड़ा था: वाचा का सन्दूक। … सन्दूक के ऊपर और ढक्कन के रूप में दया का आसन था। यह, नीचे रखे सन्दूक के साथ, एक वेदी के रूप में कार्य करता था जिस पर यहूदी व्यवस्था के अनुसार सर्वोच्च प्रायश्चित किया जाता था। उस पर प्रायश्चित के दिन की पापबलि का लहू छिड़का गया था (लैब्य. 16:14–15)। दया आसन परमेश् वर की महिमा के प्रकटीकरण का स्थान था ((निर्गमन. 25:22)।”

  16. रसल एम. नेल्सन, “अनंत अनुबंध,” लियाहोना,, ओकटूबेर . 2022। जैसा कि अध्यक्ष नेल्सन बताते हैं, हेसेड का कोई उपयुक्त अंग्रेजी समकक्ष नहीं है, लेकिन पुराने नियम में इसका सबसे आम अनुवाद दया है। पुराने नियम के किंग जेम्स संस्करण में हेसेड शब्द 248 बार आया है, जिसमें से दया का उपयोग 149 बार, करुणा का 40 बार, तथा प्रेममय करुणा का 30 बार उपयोग हुआ है।

  17. देखें सामान्य विवरण पुस्तिका , 27.2। प्रेरित यूहन्ना हमें सिखाता है कि हम में से कोई भी उद्धारकर्ता के बिना पिता के पास नहीं आ सकता (देखें यूहन्ना 14:6)। सिद्धांत और अनुबंध में, उद्धारकर्ता हमारी ओर से दया के लिए अपनी याचिका का यह सुंदर विवरण प्रदान करता है:

    “उसे सुनो जो पिता के पास मध्यस्थ है, जो उसके समक्ष तुम्हारे लिये याचना कर रहा है—

    “कहते हुए: पिता, देखो उसके कष्टों और मृत्यु को जिसने पाप नहीं किया, जिससे आप अत्यंत प्रसन्न थे; देखो अपने पुत्र के लहू को जो बहाया गया था, उसका लहू जिसे आपने दिया था कि आपकी महिमा हो;

    “इसलिये, पिता, मेरे इन लोगों को दंड न देना जो मेरे नाम पर विश्वास करते हैं, कि वे मेरे निकट आ सकें और अनंत जीवन प्राप्त करें” (सिद्धांत और अनुबंध 45:3–5)।

  18. अध्यक्ष जेफरी आर. हॉलैंड ने एक बार कहा था: “निश्चित रूप से परमेश्वर को परमेश्वर होने के बारे में सबसे ज्यादा जो बात पसंद है, वह है अनुग्रहकारी होने का रोमांच, खासकर उन लोगों के लिए जो इसकी उम्मीद नहीं करते हैं और अक्सर महसूस करते हैं कि वे इसके लायक नहीं हैं” (“The Laborers in the Vineyard,” Liahona, मई 2012, 33)। सिद्धांत और अनुबंध 128:19 भी देखें: अब, हम उस सुसमाचार में क्या सुनते हैं जो हमने प्राप्त किया है? एक खुशी की वाणी! स्वर्ग से एक दया की वाणी; और पृथ्वी से सच्चाई की वाणी; मृतकों के लिये खुशी का समाचार; जीवितों और मृतकों के लिये खुशी की वाणी; महान आनंद के खुशी के संदेश।”

  19. अलमा 42:15। दया सदैव उद्धार की योजना के केन्द्र में होती है। उद्धारकर्ता की सेवकाई के बारे तीन पवित्रशास्त्र इसके उदाहरण हैं। नफी ने मॉरमन की पुस्तक के पहले अध्याय का समापन यह कहकर किया है, “देखो, मैं, नफी तुम्हें यह दिखाऊंगा कि प्रभु की दया उन सभी के ऊपर होती है जिनको वह चुनता है, क्योंकि उनका विश्वास उन्हें बचाने की शक्ति देकर शक्तिशाली बना देता है” (1 नफी 1:20)।

    निर्गमन 34:6में, प्रभु मूसा से “प्रभु परमेश्वर, दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य” के तौर पर अपने नाम की घोषणा करता है। कुछ ने सुझाव दिया है कि इस पद को पुराने नियम के भविष्यवक्ताओं द्वारा पुराने नियम के किसी भी अन्य पद से अधिक संदर्भित किया जा सकता है (देखें, उदाहरण के लिए, बाइबिल प्रोजेक्ट, “बाइबल में सबसे अधिक उद्धृत छंद,”bibleproject.com/podcast/most-quoted-verse-bible/)।

    नए नियम में, लूका की पुस्तक में, याद कीजिए कि जकरयाह को “गूंगा” समझा गया था जब उसने स्वर्गदूत के इस प्रतिज्ञा पर संदेह किया कि इलीशिबा अपने बुढ़ापे में एक बेटे को जन्म देगी, जो यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला होगा (लूका 1:20)। जब जकरयाह बोलने लगा, तो वह “पवित्र आत्मा से भर गया” और, पहली सार्वजनिक घोषणा में कि मसीहा के लिए समय अंतत: आ गया था, उसने “भविष्यवाणी” की कि प्रभु आएगा “जिसने हमारे पूर्वजों से प्रतिज्ञा की थी, दया करे, और अपनी पवित्र अनुबंध को स्मरण करे, जो उसने हमारे पिता इब्राहीम से शपथ खाई थी” (लूका 1:67, 72–73; जोर दिया गया)।

  20. Gospel Topics Essays, “First Vision Accounts,” Gospel Library; see especially the 1832 account.

  21. जोसफ स्मिथ—इतिहास 1:29सिद्धांत और अनुबंध 20:5–6 इन दो प्रभावशाली दिव्यदर्शनों में पश्चाताप की भूमिका का एक और विवरण प्रदान करता है। जोसफ ने कहा था कि “कोई यह न सोचे कि मैं किसी महान या बहुत घृणित पाप का दोषी था,” बल्कि “अपनी कमजोरियों और खामियों के लिए मैंने अक्सर दंडित महसूस किया” और क्षमा की आवश्यकता थी (जोसफ स्मिथ—इतिहास 1:28, 29)।

  22. (देखें इनोस 1:1-8।)

  23. अलमा 22:18। अलमा की प्रार्थना, “हे यीशु, परमेश्वर के पुत्र, मुझ पर दया करो,” इससे प्रकाश की बाढ़ आती है और दर्द से राहत मिलती है (देखें अलमा 36:17–20)। अध्यक्ष जेफरी आर. हॉलैंड ने एक बार अलमा की याचिका के बारे में कहा था: “शायद ऐसी प्रार्थना, हालांकि संक्षिप्त है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है जो एक पतित दुनिया में कही जा सकती है। हम जो भी अन्य प्रार्थनाएं करते हैं, हमारी जो भी अन्य आवश्यकताएं हैं, वे सभी इस निवेदन पर वापस आती हैं: “हे यीशु, परमेश्वर के पुत्र, मुझ पर दया करो,” (Our Day Star Rising: Exploring the New Testament with Jeffrey R. Holland [2022], 170–71)।

  24. एल्डर काइल एस. मैके ने बहुत खूबसूरती से सिखाया, “जोसफ के जीवन का निरंतर पश्चाताप मुझे साहस प्रदान करता है ‘दया के सिंहासन के पास निर्भीकता से आओ, ताकि [मैं] दया प्रदान करू’” (“मनुष्य जिसने यहोवा से बात की,” लियाहोना, नवं. 2024, 61)।

  25. मोरोनी 10:3

  26. मोरोनी की याचना मॉरमन की पुस्तक के आरंभ में नफी के कथन का एक पुस्तिका है, जहां उसने पट्टियों पर लिखने में अपना स्वयं का उद्देश्य बताया था: “देखो, मैं, नफी, तुम्हें दिखाऊंगा कि प्रभु की दया उन सभी के ऊपर होती है जिनको वह चुनता है, क्योंकि उनका विश्वास उन्हें बचाने की शक्ति देकर शक्तिशाली बना देता है” (1 नफी 1:20)।

  27. मोरोनी 10:4

  28. देखें मुसायाह 9:13

  29. अलमा 40:23: आत्मा शरीर से मिलेगी, और शरीर आत्मा से; हां, और प्रत्येक अंग और जोड़ के साथ शरीर पहले जैसा हो जाएगा; हां, यहां तक सिर का एक बाल भी नष्ट नहीं होगा; परन्तु सारी चीजें उचित और पूर्ण ढांचे में पुन:स्थापित हो जाएंगी।”

  30. अलमा 34:16। जब हम इस बात पर विचार करते हैं कि प्रभु कितना दयालु रहा है, तो हम दया को न्याय से अलग करने के लिए प्रलोभित हो सकते हैं—यह सोचने के लिए कि केवल हमारे स्वर्गीय पिता का प्रेममय दया ही न्याय पर विजय प्राप्त कर सकती है। लेकिन जैसे अलमा ने सिखाया था, “बिना प्रायश्चित के दया की योजना को अमल में नहीं लाया जा सकता था; इसलिए परमेश्वर ने स्वयं संसार के पापों के लिए प्रायश्चित किया, दया की योजना को लाने के लिए, न्याय की मांग को शान्त करने के लिए, ताकि परमेश्वर परिपूर्ण, न्यायी परमेश्वर हो सके, और दयावान परमेश्वर भी” (अलमा 42:15; महत्व जोड़ा गया है)।

    हमारे प्रति उद्धारकर्ता का सारा दयापूर्ण प्रेम हमें बचा नहीं सकता था। बल्कि, यह न्याय की वास्तविक और दर्दनाक मांग को लेकर उसकी पीड़ा थी जो हमें बचाती है। निःसंदेह, इससे उसके प्रेम का महत्व कम नहीं होता। निश्चय ही, यह हमारे प्रति उसका प्रेम था—और पिता की इच्छा पूरी करने की उसकी इच्छा, जो हमसे प्रेम करता है - जिसके कारण वह कष्ट सहने के लिए तैयार हुआ (देखें यूहन्ना 3:16; सिद्धांत और अनुबंध 34:3)। लेकिन अकेले प्रेम से काम नहीं चल सकता था।

    कभी-कभी हम अपने लिए उसके प्रेम पर इतना अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं जैसे हम हैं कि हम इस तथ्य से दृष्टि खो देते हैं कि जिस तरह से हम हैं—स्वाभाविक पुरुषों और महिलाओं के रूप में जिनका व्यवहार अनिवार्य रूप से आज्ञाओं का पालन करने से कम हो जाता है—यह मांग करता है कि न्याय संतुष्ट हो। यदि हम उसके प्रेम को गलत समझते और न्याय की मांग को पूरा करने के रूप में देखते हैं, तो हम उसके प्रायश्चित बलिदान के उपहार और न्याय की भयानक कीमत चुकाने के लिए उसने जो कष्ट सहा था उसे कम कर देते हैं। यह निराशाजनक रूप से विडम्बनापूर्ण होगा यदि हमारे प्रति उनके प्रेम को उनके प्रायश्चित बलिदान को अनावश्यक समझा जाए। यह कितना बेहतर है कि हम न्याय की पूरी मांग को ध्यान से देखें और फिर उसके लिए आभारी हों कि उसने हमसे इतना प्रेम किया कि हमारी ओर से उन वास्तविक मांगों को सहन किया।

  31. अलमा 7:11–12

  32. मुसायाह 3:11

  33. 2 नफी 2:25

  34. मुसायाह 14:5

  35. मोरोनी 10:4

  36. मोरोनी 10:3

  37. अध्यक्ष एम. रसल बैलार्ड ने हमें “आप जो जानते हैं और विश्वास करते हैं और जो महसूस करते हैं” उसकी गवाही देने के लिए प्रोत्साहित किया (“सबसे महत्वपूर्ण बातें याद रखें,” लियाहोना, मई 2023, 107)।

  38. इस सुझाव को प्रस्तुत करते हुए, मेरा इरादा मॉरमन की पुस्तक या सुसमाचार की सच्चाई की गवाही के लिए कोई वैकल्पिक “सूत्र” प्रस्तुत करने का नहीं है। जैसा कि एल्डर डेविड ए. बेडनार ने सिखाया है, प्रकटीकरण “अंधेरे कमरे में की गई रोशनी” की तरह आ सकता है, जहां प्रकटीकरण “तुरंत, पूर्णरूप से और एक ही बार में” प्राप्त होता है। यह इस प्रकार भी आ सकता है “उगते सूरज से निकलने वाली रोशनी में धीरे-धीरे वृद्धि, … नियम पर नियम, आज्ञा पर आज्ञा (2 नफी 28:30)।… स्वर्गीय पिता से ऐसे संदेश धीरे-धीरे और हल्के-हल्के ‘स्वर्ग से ओस की तरह [हमारी आत्माओं पर] टपकते हैं’ (सिद्धांत और अनुबंध 121:45)। प्रकटीकरण का यह उदाहरण दुर्लभ से अधिक आम होता है”(“The Spirit of Revelation,” ” Liahona, May 2011, 88)।