महा सम्मेलन
विश्वास: भरोसे और निष्ठा का बंधन
अप्रैल 2025 महा सम्मेलन


11:17

विश्वास: भरोसे और निष्ठा का बंधन

जब हम यीशु मसीह पर भरोसा करते हैं तो विश्वास अंकुरित होता है और जब हम उसके प्रति वफादार और निष्ठावान रहते हैं।

जब मैं 16 वर्ष का था, मैंने अपने दोस्त होजे लुईस से वादा किया किया था कि मैं उसे तैरना सिखाऊंगा। तो एक सुबह हमने अभ्यास करने का समय निर्धारित किया। जब हमारा अभ्यास समाप्त हो गाया और मैं पूल से निकल रहा था, तब मैंने अपने दोस्त को मदद के लिए चिल्लाते हुए सुना। वह पूल के गहरे हिस्से में डूब रहा था।

मैं मदद के लिए प्रार्थना करते हुए जल्दी पानी में कूद गया और उसकी ओर तैरने लगा। जब मैंने उसके हाथ को पकड़ कर जमीन पर खीचना आरम्भ किया, तो मेरा परेशान दोस्त मेरी पीठ पर चढ़ गया और मेरी गर्दन को कसकर पकड़ लिया, जिससे मुझे सांस लेने में कठिनाई होने लगी। अब हम दोनों डूब रहे थे। जमीन की तरफ जाने मे अपना पूरा प्रयास करते हुए, मैंने परमेश्वर से किसी चमत्कार के लिए अपनी पूरी शक्ति से प्रार्थना की। तभी, धीरे परंतु निरंतर परमेश्वर की शक्ति प्रकट हुई जब मैंने किसी हाथ को मुझे पूल के कम गहरे हिस्से की ओर ले जाते हुए महसूस किया, और हम सुरक्षित बच गए।

मेरे इस अनुभव ने उस गहरी शिक्षा की पुष्टि की जो अध्यक्ष नेल्सन ने सिखाया था: “जब आप अपने जीवन में प्रभु की शक्ति को उसी प्रबलता प्राप्त करने का प्रयास करेंगे, जैसे कोई डूबता हुआ व्यक्ति सांस लेने के लिए हांफता है, तो यीशु मसीह की शक्ति आपको प्राप्त होगी।”

प्रिय बच्चों और युवाओं, आज मैं आपसे विश्वास के एक बहुत ही महत्वपूर्ण नियम के बारे मे बात करना चाहता हूं।

मसीह में विश्वास करने का अर्थ है उस पर भरोसा करना है

यीशु मसीह में विश्वास का क्या अर्थ है? क्या इसका अर्थ यह है की हम उस में विश्वास करें या ये गवाही प्राप्त करें कि वह वास्तव में है? यह विश्वास की शुरुआत हो सकती है लेकिन इससे भी अधिक करना पड़ता है। क्या आपने कभी विश्वास को भरोसे के रूप में सोचा है? आप उस व्यक्ति के बारे मे सोचे जिस पर आप ज्यादा भरोसा करते हैं—चाहे वो परिवार का सदस्य हो या दोस्त। आप उन पर भरोसा क्यों करते हो? शायद इसलिए क्योंकि आपने उनका निंरतर प्रेम और मदद देखी है

जब हमें मसीह में विश्वास होता है, तो हम उसकी आशीषों को पहचानते हैं और उसके साथ भरोसे की रिश्ते को विकसित करते हैं।

आप अपने भरोसे को मसीह मे कैसे बढ़ा सकते हैं?

हाल ही में एक युवा प्रार्थना-सभा में, आपको “अपने जीवन में उस समय पर ध्यान लगाने” के लिए आमंत्रित किया गया था जब आपको स्वर्गीय प्रकाश की किरण प्राप्त हुई थी। इस पर ध्यान लगाएं!

मसीह के बारे में और उसके प्रायश्चित तथा सुसमाचार से आपके जीवन में आने वाली खुशी के बारे में ध्यान लगाने से आरंभ करें। इसके अलावा, उन “आत्मिक रूप से बताई गई यादों” को लिखें, जहां परमेश्वर आपके लिए, आपके प्रियजनों के लिए, और पवित्रशास्त्रों में बताए लोगों के लिए मौजूद रहा है। अब, ये गवाहियां आपके जीवन में तब तक शक्ति नहीं लाएंगी जब तक कि आत्मा इन्हें आपके हृदय की “मांस रूपी पट्टियों” पर न लिख दे। इसलिए इन चमत्कारों को सही समय पर होने के लिए परमेश्वर ने जो कुछ किया है, उस पर मनन करें और उसे लिखें।

इसके बाद, इस अभ्यास को परमेश्वर के निकट आने के अवसर के रूप में उपयोग करें। अपने स्वर्गीय पिता से ऐसे प्रार्थना करें जैसे कि यह पहली बार की गई हो। उसकी आशीषों के लिए अपना प्रेम और आभार व्यक्त करें। उससे यह भी पूछें कि वह आपके बारे में कैसा महसूस करता है और आपका जीवन किस दिशा में जा रहा है।

यदि आप ईमानदार और विनम्र रहते हैं, तो आप उसका उत्तर सुनेंगे और स्वर्गीय पिता और यीशु मसीह के साथ व्यक्तिगत और स्थाई संबंध बनाना आरंभ करेंगे। इतना ही नहीं, आपकी धार्मिक आदतें भी महत्वपूर्ण हो जाएंगी! उदाहरण के लिए, आप अपनी प्रार्थनाओं, व्यक्तिगत अध्ययन और मंदिर उपासना को उन्हें समझने और उनके साथ रहने के अवसर के रूप में देखेंगे।

विश्वास निष्ठा से पनपता है

ध्यान दें कि जब हम यीशु मसीह पर भरोसा करते हैं तो विश्वास अंकुरित होता है और जब हम उसके प्रति वफादार और निष्ठावान रहते हैं तो विश्वास पनपता है। यदि आप मसीह के साथ सच्चा संबंध चाहते हैं, तो अनुबंध बनाकर और विश्वासनीयता और निष्ठा से उनका आदर करके उसे दिखाएं। यीशु मसीह के साथ अनुबंध बनाने से आशा का निर्माण होता है। उनका आदर करने से विश्वास का निर्माण होता है।

मैं एक व्यक्तिगत उदाहरण देना चाहूंगा: जब मैं बच्चा था, तो एक दिन मैंने अपनी मां को अकेले में रोते हुए पाया था। जब मैंने उससे इसका कारण पूछा तो उसने प्यार से कहा, “मैं चाहती हूं कि तुम एक अच्छे लड़के बनो।” हालांकि मुझे पता था कि मैं उनकी परेशानी का कारण नहीं था, फिर भी मैं अपनी मां से बहुत प्यार करता था और उन पर भरोसा करता था, तथा उनका जीवन कम कठिन बनाना चाहता था। इसलिए, आंखों में आंसू भरकर और एक नौ साल के बच्चे की तरह पूरी गंभीरता के साथ, मैंने उस दिन उनसे प्रतिज्ञा की कि मैं हमेशा सबसे अच्छा बेटा बनने का प्रयास करूंगा और उनका नाम रोशन करूंगा।

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि उस प्रतिज्ञा का मुझ पर कितना प्रभाव पड़ा था —और अब भी है?

उनके साथ वह प्रतिज्ञा मेरे जीवन मे मार्गदर्शन करती रही। निर्णय लेने से पहले मैं इस बात पर विचार करता था कि क्या मेरे कार्य से वह खुश होंगी। इस प्रतिज्ञा का बंधन और मेरी मां के साथ संबंध मेरे संपूर्ण जीवन के आचरण का आधार बने रहे थे।

वर्षों बाद, जब मैं यीशु मसीह को अच्छे से समझने लगा, तो मैं पहले से ही जानता था कि मुझे उस पर अपना विश्वास कैसे आधारित करना है। मैंने प्रभु के साथ अनुबंध बनाए, और जब मैंने उनका आदर करने का प्रयास किया, तो उसने मेरे पापों को क्षमा कर दिया, जीवन का मार्गदर्शन किया, और संपूर्ण रूप से “मुझे अपने प्रेम से भर दिया”। मसीह ने मुझमें उसके प्रति गहरा प्रेम, आदर और निष्ठा पैदा की है।

क्या आप जानते हैं कि “विश्वास एक ऐसा नियम जिसमें कार्य करना आवश्यक होता है” और “विश्वास के बिना [परमेश्वर को] प्रसन्न करना असंभव है”?

जब आप वही करने का प्रयास करते हो जो परमेश्वर को प्रसन्न करता है, तो आप मिस्र में यूसुफ की तरह कहोगे जब पोतीपर की पत्नी ने उसे प्रलोभन दिया था: “सो भला, मैं ऐसी बड़ी दुष्टता करके परमेश्वर का अपराधी क्योंकर बनूं?”” और जब विरोध का सामना हो, तो आप युवा भविष्यवक्ता जोसफ की तरह कहेंगे: “यह मैं जानता था, और मैं जानता था कि यह परमेश्वर जानता था, और मैं इसका इंकार नहीं कर सकता था, … कि ऐसा करने के द्वारा मैं परमेश्वर के विरूद्ध अपराध करूंगा।”

अतः यीशु मसीह में विश्वास, भरोसे और प्रेम में दृढ़ निष्ठा का बंधन है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर के दयालु प्रेम (हेसेड) के प्रति कृतज्ञता में, हम उसकी आज्ञाओं का पालन करके अपना वफादार प्रेम (एमुनाह) दिखाते हैं।

मसीह प्रतिज्ञा करता है: “जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, … उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।” यदि आप उसके प्रति वफादार बने रहने के प्रति निष्ठावान हैं, तो वह आपके प्रति अपना प्रेम प्रकट करेगा।

कठिन समय में विश्वास

लेकिन आपको ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों पर कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए जिनमें उसके चमत्कारों की आवश्यकता होती है? जबकि चुनौतियां निश्चितरूप से होती हैं और कभी-कभी भयानक भी होती हैं, बस निडर होकर उसकी ओर बढ़ते रहें जैसा कि एफएसवाई 2025 का विषय आमंत्रित करता है: “हर विचार में मेरी ओर देखो; संदेह मत करो, डरो मत।

आप उसकी ओर बिना डरे कैसे चल सकते हैं?

कल्पना कीजिए कि आप किसी अज्ञात क्षेत्र में खोज करते हैं। आगे आने वाली बाधाओं दूर करने के लिए आपको प्रकाश के स्रोत की आवश्यकता है। परमेश्वर के प्रति आपकी निष्ठा और उसके साथ आपकी निरंतर बातचीत ही आपके दीपक के लिए तेल है। इसलिए जब आप अंधकारमय और खतरनाक परिस्थितियों का सामना करते हैं, तो उनकी ओर आंख मूंदकर चलने के बजाय, आप अनिश्चित मार्ग पर आशा की किरणें बिखेरने के लिए मसीह में विश्वास के तेल से भरा अपना दीपक जला लेंगे। आपके पिछले अनुभव आपकी इस आशा को बढ़ाएंगे कि प्रभु आपकी यात्रा में आपका साथ देगा।

लालटेन के साथ यात्री।

आप मसीह में अपनी आशा और विश्वास के साथ कितनी दूर तक जाएंगे?

मेरी पूल की कहानी याद है? निराशा के उस क्षण में, चमत्कार वैसा ही हुआ जैसा मैंने आशा की थी, लेकिन परमेश्वर इसकी गारंटी नहीं देता कि यह हमेशा हमारी इच्छा के अनुसार ही होगा। हमारा विश्वास मसीह पर केन्द्रित होना चाहिए और हमारी आशा उसकी आशीषों पर केन्द्रित होनी चाहिए, जैसा कि वह उन्हें भेजना चाहता है। “हम चमत्कारों की आशा करें,” परंतु “परमेश्वर को हमारे जीवन मे प्रबल होने दें।”

अपने विश्वासी लोगों से परमेश्वर की प्रतिज्ञाएं

मेरे युवा मित्रों, हम आपसे बहुत प्यार करते हैं और आप पर बहुत भरोसा करते हैं! आप परमेश्वर के परिवार से संबंध रखते हैं और अनुबंध की संतान हो। यीशु मसीह में विश्वास और भरोसा रखें। वह आपको सचमुच उसका शिष्य बनने में सक्षम बनाएगा।

मैं आपको आज से ही यीशु मसीह के साथ अपने संबंध का पोषण करने के लिए आमंत्रित करता हूं। उसे कभी न त्यागने की प्रतिबद्धता बनाएं।

मसीह के प्रति आपकी निष्ठा, प्रेम और भरोसा आपके चरित्र और पहचान को उसके अनुरूप आकार देगा। आपको शैतान के हमलों पर काबू पाने के लिए आत्मविश्वास और ताकत मिलेगी। और जब आप गलतियां करोगे, तो उसकी क्षमा पाना चाहोगे। अतंत:, भविष्य के लिए आपकी आशा उज्ज्वल होगी। वह आप पर उसकी सामर्थ्य से भरोसा करेगा ताकि वह आपसे जो कुछ भी अपेक्षा करता है उसे पूरा कर सके उसकी उपस्थिति में वापस लौटने की सामर्थ्य भी।

मैं आपको उस आनंद की गवाही देता हूं जो “मुक्तिभरे प्रेमगीत गाने की इच्छा” और “उसके प्रेम की बांहों में अनंतरूप से लपेट लिए” जाने से आता है। यीशु मसीह के पवित्र नाम में, आमीन।

विवरण

  1. रसल एम. नेल्सन, “Drawing the Power of Jesus Christ into Our Lives,” Liahona, मई 2017, 42।

  2. अंग्रेजी शब्द faith लैटिन शब्द fides से निकला है, जिसका अर्थ भरोसा करना होता है (देखें Etymological Dictionary of Latin and the Other Italic Languages [2008], “fido”)। ग्रीक में समान अर्थ वाले शब्द, πίστις, का अनुवाद “भरोसा करना” होता है (देखें Etymological Dictionary of Greek [2010], 1:1161–62)।

  3. “विश्वास यीशु मसीह पर विश्वास और भरोसा है” (Guide to the Scriptures, “Faith,” सुसमाचार लाइब्रेरी)।

  4. देखें “Look unto Christ” (worldwide discussion for youth, Jan. 5, 2025), Gospel Library; Alexander Dushku, “Pillars and Rays,” Liahona, मई 2024, 14–16 भी देखें।

  5. देखें Neil L. Andersen, “Spiritually Defining Memories,” Liahona, मई 2020, 18–22।

  6. देखें 2 कुरिन्थियों 3:2-3; ये भी देखे मोरोनी 10:3; रसल एम. नेल्सन, “इसकी सुनो,” लियाहोना, मई 2020, 88–92।

  7. देखें Ronald A. Rasband, “By Divine Design,” Ensign or Liahona, नवं. 2017, 55–57।

  8. देखें मुसायाह 2:20–21; सिद्धांत और अनुबंध 59:21

  9. देखें “Appendix 1: Sixth Theological Lecture on Faith, circa January–May 1835, as Published in Latter Day Saints’ Messenger and Advocate,” 124–25, josephsmithpapers.org।

  10. देखे मोरोनी 7:41; Stephen M. R. Covey and Rebecca R. Merrill, The Speed of Trust: The One Thing That Changes Everything (2006), 215 भी देखें।

  11. 2 नफी 4:21

  12. “परमेश्वर मेरा दोस्त है। उसमें मुझे दिलासा मिलेगी। … मैं मसीह के साथ होने की इच्छा व्यक्त करता हूं। मैं अपने प्राण को प्रिय नहीं समझता, परन्तु उसकी इच्छा पूरी करूं” (Teachings of Presidents of the Church: Joseph Smith [2007], 243–44)।

  13. Bible Dictionary, “Faith।”

  14. इब्रानियों 11:6

  15. देखें यूहन्ना 8:29

  16. उत्पत्ति 39:9

  17. जोसफ स्मिथ—इतिहास 1:25

  18. अध्यक्ष गॉर्डन बी. हिंकली ने सिखाया था, “प्रभु यीशु मसीह के नाम पर अपने स्वर्गीय पिता से प्रार्थना करें, और हमेशा, सभी परिस्थितियों में, अपने जीवन की प्रकृति से अपनी वफादारी और अपना प्यार दिखाएं” (“Loyalty,” Liahona, मई 2003, 60; Brent J. Schmidt, Relational Faith: The Transformation and Restoration of Pistis as Knowledge, Trust, Confidence, and Covenantal Faithfulness [2022], 9; Teresa Morgan, Roman Faith and Christian Faith: Pistis and Fides in the Early Roman Empire and Early Churches [2015], 127–28) भी देखें।

  19. देखें रसल एम नेल्सन , “अनंत अनुबंध,” लियाहोना, अक्टू. 2022, 4–11।

  20. “विश्वास के लिए हिब्रू शब्द אמונה (एमूनाह) एक क्रिया-उन्मुख शब्द है जिसका अर्थ है ‘समर्थन।’ … [यह] कार्य उस पर डाला जाता है जो परमेश्वर का ‘समर्थन करता है’ इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं जानता हूं कि परमेश्वर कार्य करेगा, इसका अर्थ है कि मैं परमेश्वर का समर्थन के लिए वह सब करूंगा जो मैं कर सकता हूं। एमूनाह शब्द के समर्थन का यह विचार निर्गमन 17:12 में देखा जा सकता है। … यह एक समर्थन हैं/एमूनाह आरून और हूर जिंहोने मूसा हाथ पकड़ा था, मूसा का समर्थन नही/एमूनाह। जब हम कहते हैं, ‘मुझे परमेश्वर पर भरोसा है,’ तो हमें यह सोचना चाहिए, ‘मैं परमेश्वर का समर्थन करने के लिए वह सब करूंगा जो मैं कर सकता हूं’” (Jeff A. Benner, “Faith,” Ancient Hebrew Research Center, ancient-hebrew.org)।

  21. यूहन्ना 14:21; पद 13 भी देखें।

  22. देंखें यूहन्ना 15:9-10

  23. देखें Russell M. Nelson, “Drawing the Power of Jesus Christ into Our Lives,” 39।

  24. सिद्धांत और अनुबंध 6:36

  25. देखें Neil L. Andersen, “Faith Is Not by Chance, but by Choice,”लियाहोना, नवं. 2015, 65-68।

  26. रसल एम. नेल्सन, “आत्मिक संवेग की शक्ति,” लियाहोना, मई 2022, 99।

  27. देखें Russell M. Nelson, “परमेश्वर को विजयी होने दो,” लियाहोना, नवं. 2020, 92–95।

  28. देखें रसल एम. नेल्सन, “Children of the Covenant,” Ensign , मई 1995, 32–35।

  29. मसीह मेरा दोस्त है। परमेश्वर ने मुझे आत्मिक उपहार दिए हैं। … मैं आशा करता हूं कि मैं उसका मित्र बनने के योग्य समझा जाऊंगा” (Gordon B. Hinckley, “My Testimony,” Liahona, जुलाई 2000, 85)।

  30. देखें यूहन्ना 6:67-68; सिद्धांत और अनुबंध 6:20

  31. देखें Russell M. Nelson, “Choices for Eternity” (worldwide devotional for young adults, May 15, 2022), Gospel Library; Richard G. Scott, 21 Principles: Divine Truths to Help You Live by the Spirit (2013), 90।

  32. देखें अलमा 48:17

  33. देखें मुसायाह 2:41; अलमा 4:18

  34. देखें Thomas S. Monson, “Be of Good Cheer,” Liahona, May 2009, 92।

  35. देखें यशायाह 58:9; हिलामन 10:4–5; ईथर 12:30; मोरोनी 7:33

  36. देखें 2 नफी 25:23

  37. अलमा 5:26; अलमा 5:9; 26:13 भी देखें।

  38. 2 नफी 1:15