महा सम्मेलन
आपका पश्चाताप यीशु मसीह पर बोझ नहीं है; बल्कि यह उसके आनंद को उज्ज्वल करता है
अप्रैल 2025 महा सम्मेलन


11:44

आपका पश्चाताप यीशु मसीह पर बोझ नहीं है; बल्कि यह उसके आनंद को उज्ज्वल करता है

पश्चाताप करने का आमंत्रण परमेश्वर के प्रेम की अभिव्यक्ति है। उस आमंत्रण को स्वीकार करना हमारी अभिव्यक्ति है।

कई साल पहले फ्लोरिडा की यात्रा के दौरान, मैं बाहर बैठकर कोई किताब पढ़ रही थी। इसका शीर्षक बताता था कि हम स्वर्ग जा सकते हैं, भले ही हम अभी परिपूर्ण नहीं हैं। पास से गुजर रही एक महिला ने पूछा, “क्या आप सोचती हैं कि ऐसा हो सकता है?”

मैं उलझन में पड़ गई, और फिर मुझे एहसास हुआ कि वह उस किताब के बारे में बात कर रही थी जिसे मैं पढ़ रही थी। मैंने हंसते हुए कहा, “ठीक है, मैं अभी तक वहां नहीं पहुंची हूं, लेकिन मैं आपको बताऊंगी कि इसका अंत कैसा होता है।”

ओह, काश! मैं समय में पीछे जा पाती! मैं उससे कहना चाहूंगी, “हां, यह संभव है! क्योंकि स्वर्ग उन लोगों के लिए नहीं है जो परिपूर्ण हैं; यह उन लोगों के लिए है जिन्हें क्षमा कर दिया गया है, और जो बार-बार मसीह को चुनते हैं।”

आज मैं उन लोगों से बात करना चाहती हूं जो कभी-कभी महसूस करते हैं कि, “पश्चाताप और क्षमा हर किसी के लिए काम कर रहा है, सिवाय मेरे।” जो लोग निजी तौर पर सोचते हैं, “चूंकि मैं वही गलतियां बार-बार करता रहता हूं, तो शायद इसलिए मैं ऐसा ही रहूंगा।” वे लोग, जो मेरी तरह, कभी ऐसा महसूस करते हैं कि जब अनुबंध मार्ग खड़ी चढ़ाई जैसा लगता है, मानो अनुबंध मार्ग कठिन है!

ऑस्ट्रेलिया में एक अद्भुत प्रचारक, फिजी के, एल्डर गोंग-गाह ने अपनी विदाई गवाही में यह भावना साझा की थी: “मैं जानता हूं कि परमेश्वर मुझसे प्रेम करता है, लेकिन कभी-कभी मैं सोचता हूं, क्या परमेश्वर जानता है कि मैं भी उससे प्रेम करता हूं? क्योंकि मैं परिपूर्ण नहीं हूं और मैं अभी भी गलतियां करता रहता हूं।”

उस प्रत्यक्ष, परेशान करने वाले प्रश्न में, एल्डर गोंग-गाह ने बिल्कुल वही बात कही थी जिसकी मैं अक्सर चिंता करती थी। शायद आप भी सोच रहे होंगे, “मैं इतनी मेहनत कर रही हूं, लेकिन क्या परमेश्वर जानता है कि मैं सच में कोशिश कर रही हूं? जब मैं बार-बार असफल होती हूं, तो क्या परमेश्वर जानता है कि मैं अब भी उससे प्रेम करती हूं?”

मुझे यह स्वीकार करने में दुख होता है, लेकिन मैं भी उद्धारकर्ता के साथ अपने रिश्ते को इस बात से नापती हूं कि मैं कितनी परिपूर्णता से जीवन जी रही हूं। मैं सोचती थी कि आज्ञाकारी जीवन का मतलब है कि मुझे कभी पश्चाताप करने की आवश्यकता नहीं होगी। और जब मैं गलतियां करती थी, ऐसा हर दिन होता था, तो मैं स्वयं को परमेश्वर से दूर कर लेती थी, यह सोचकर कि, “वह मुझसे बहुत निराश होगा।”

लेकिन सच्चाई बिलकुल यह नहीं है।

मैंने सीखा है कि यदि आप उद्धारकर्ता के निकट जाने के लिए पर्याप्त रूप से शुद्ध या परिपूर्ण होने तक प्रतीक्षा करते हैं, तो आप मुख्य बात समझ ही नहीं पाए हैं।

क्या होगा यदि हम आज्ञाओं और आज्ञाकारी होने के बारे में अलग तरीके से सोचें?

मैं गवाही देती हूं कि बेशक परमेश्वर हमारी गलतियों की चिंता करता है, परन्तु वह इस बात की अधिक चिंता करता है कि हम गलती करने के बाद क्या करते हैं। क्या हम बार-बार उसकी ओर मुड़ेंगे? क्या हम इस अनुबंध संबंध में कायम रहेंगे?

हो सकता है कि आपने प्रभु के ये शब्द सुने हों, “यदि तुम मुझसे प्रेम करते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे” और आप निराश होते हैं, क्योंकि आपने सभी आज्ञाओं का पालन नहीं किया है। मैं आपको याद दिला दूं कि पश्चाताप करना भी एक आज्ञा है! वास्तव में, यह संभवतः पवित्रशास्त्रों में सबसे अधिक बार दोहराई गई आज्ञा है।

अलमा कहता है, “ओह यदि मैं एक स्वर्गदूत होता, … पश्चाताप करने की याचना करता,” वह हमारी गलतियों की ओर इशारा करके हमें शर्मिंदा करने की कोशिश नहीं कर रहा था। वह पश्चाताप की याचना करना चाहता था ताकि आप और मैं संसार में दुख सहने से बच सकें। अलमा का पाप से नफरत करने का एक कारण यह है कि यह हमें पीड़ा देता है।

कभी-कभी मुझे अपने माथे पर लगी एक टिप्पणी की तरह याद रखना पड़ता है कि आज्ञाएं ही दर्द से दूर जाने का मार्ग हैं। और पश्चाताप भी। हमारे भविष्यवक्ता ने कहा था, “उद्धारकर्ता हमसे हमेशा प्रेम करता है, लेकिन विशेषकर तब जब हम पश्चाताप करते हैं।”

इसलिए जब प्रभु कहता है, “पश्चाताप करो, पश्चाताप करो,” तो क्या होगा यदि आप कल्पना करें कि वह कह रहा है, “मैं तुमसे प्रेम करता हूं।” मैं तुमसे प्रेम करता हूं।” कल्पना करें कि वह आपसे विनती कर रहा है कि आप उस व्यवहार को छोड़ दें जो पीड़ा दे रहा है, तथा आपको अंधकार से बाहर आने और उसके प्रकाश में आने के लिए आमंत्रित कर रहा है।

मेरी बेटी कार्ली के वार्ड में, एक नए याजक ने प्रभुभोज को आशीष देने के लिए घुटने टेके, और यह कहने के बजाए कि, “ऐसा आपके पुत्र के लहू की याद में कर सकें,” उसने अनजाने में कहा, “वे इसे आपके पुत्र के प्रेम की याद में कर सकें।” जब कार्ली को उन शब्दों की सच्चाई का एहसास हुआ तो उसकी आंखों में आंसू भर आए।

हमारा उद्धारकर्ता अपने प्रायश्चित का दर्द सहने के लिए तैयार था क्योंकि वह आपसे प्रेम करता है। वास्तव में, आप वह “आनंद हैं जो उसके आगे धरा था” जब उसने क्रूस पर दुख उठाया था।

पश्चाताप करने का आमंत्रण परमेश्वर के प्रेम की अभिव्यक्ति है।

उस आमंत्रण को स्वीकार करना हमारी अभिव्यक्ति है।

मसीह की अपनी पसंदीदा छवि की कल्पना करें। अब कल्पना करो कि हर बार जब आप उसके उपहार का उपयोग करते हैं तो वह आनंद से मुस्कुराता है, क्योंकि वह “आशा की परिपूर्ण चमक” है।

हां, आपका पश्चाताप यीशु मसीह पर बोझ नहीं है; बल्कि यह उसके आनंद को उज्ज्वल करता है।

आओ हम यह सिखाएं!

क्योंकि पश्चाताप हमारा सबसे अच्छा समाचार है!

हम कभी गलती न करके अनुबंध मार्ग पर नहीं बने रहते हैं। हम प्रतिदिन पश्चाताप करके अपने मार्ग पर बने रहते हैं।

और जब हम पश्चाताप करते हैं, तो परमेश्वर हमें शर्मिंदा किए बिना, किसी और से हमारी तुलना किए बिना, या हमें डांटे बिना क्षमा कर देता है क्योंकि यह वही बात है जिसका पश्चाताप हम पिछले सप्ताह कर रहे थे।

जब भी वह हमें घुटनों के बल देखता है तो बहुत खुश होता है। उसे हमें क्षमा करने में आनंद मिलता है क्योंकि हम उसके लिए आनंदमय हैं!

क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि यह सच है?

तो फिर हमारे लिए इस पर विश्वास करना इतना कठिन क्यों है?

शैतान, महान दोष लगानेवाला और धोखेबाज, हमें परमेश्वर से दूर रखने के लिए शर्म का उपयोग करता है। शर्म का बोझ इतना भारी महसूस होता है कि आप इसे अपने शरीर से हटाना चाहते हैं, यह सचमुच के बोझ या भार की तरह महसूस होता है।

शर्म वह आवाज है जो आपको कोसती और कहती है, “तुम क्या सोच रहे थे?” “क्या तुमने कभी कोई सही काम किया है?”

शर्म हमें यह नहीं बताती कि हमने गलती की है; यह हमें बताती है कि हम स्वयं ही अपनी गलतियां हैं । आप यह भी सुन सकते हैं, “छिप जाओ।” शैतान इस भारीपन को हमारे मन में बनाए रखने के लिए भरपूर प्रयास करता है, हमें कहता है कि इसकी कीमत बहुत अधिक है, वह संपूर्ण आशाएं समाप्त करते हुए बताता है कि अंधकार को बनाए रखना अधिक सरल होगा।

शैतान आशा का चोर है।

और आपको यह सुनने की आवश्यकता है, इसलिए मैं इन शब्दों को जोर से कहूंगी: आप अपने मन की आवाज या आपके द्वारा की गई गलतियां नहीं हैं। आपको भी यह बात जोर से कहने की जरूरत हो सकती है। शैतान से कहो, “आज नहीं।” उसे अपने सामने से दूर करें।

उसकी निकटता को महसूस करें, उस परमेश्वर-भक्ति के शोक को जो आपको आपके उद्धारकर्ता की ओर मोड़ता है, और उसका अनुग्रह को आपके और आपके प्रियजनों के जीवन में प्रवेश करते देखें। मैं प्रतिज्ञा करती हूं कि जिस क्षण हम साहसपूर्वक अपना टूटा हुआ हृदय उसकी ओर लाते हैं, वह तुरन्त वहां पहुंचता है।

यदि आप किसी को डूबते हुए देखते हैं, तो क्या आप अपना हाथ बढ़ाकर उसे नहीं बचाएंगे? क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आपका उद्धारकर्ता आपके बढ़े हुए हाथ को नहीं थामेगा? वास्तव में, मैं कल्पना करती हूं कि वह पानी में गोता लगाते हुए, सभी बातों में नीचे उतर रहा है ताकि हमें ऊपर उठा सके ताकि हम ताजी सांस ले सकें! मसीह के प्रकाश से अधिक नीचे कोई भी नहीं गिर सकता है।

उद्धारकर्ता हमेशा शर्म के अंधकार से अधिक उज्ज्वल है। वह कभी आपके महत्व को कम नहीं करेगा। इसलिए ध्यान से देखें।

  • कल्पना करें कि यह हाथ महत्व को दर्शाता है।

  • यह हाथ आज्ञाकारिता को दर्शाता है। हो सकता है कि आज सुबह आप उठे हों, एक सार्थक प्रार्थना की हो, और परमेश्वर की आवाज सुनने के लिए पवित्रशास्त्रों में खोज की हो। आपने अच्छे निर्णय लिए हैं और अपने आस-पास के लोगों के साथ मसीह-समान व्यवहार कर रहे हैं। आप महा सम्मेलन सुन रहे हैं! आपकी आज्ञाकारिता यहां है!

  • या शायद कुछ बातें इतनी अच्छी नहीं हुई हैं। हाल ही में आपने स्वर्ग से जुड़ने के लिए उन छोटे, सरल कामों को करने के लिए संघर्ष किया है। आपने कुछ ऐसे निर्णय लिए हैं जिन पर आपको गर्व नहीं है।

  • आपका महत्व कहां है? क्या यह हाथ बिल्कुल भी आगे बढ़ा है?

आपका महत्व आज्ञाकारिता से बंधा नहीं है। आपका महत्व स्थिर रहता है, वह कभी नहीं बदलता है। यह आपको परमेश्वर द्वारा दी गई है, और आप या कोई भी इसे बदलने के लिए कुछ नहीं कर सकता। आज्ञाकारिता से आशीषें मिलती हैं; यह सच्चाई है। लेकिन महत्व उनमें से एक नहीं है। आपका महत्व “परमेश्वर की दृष्टि में महान है” इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके निर्णय आपको कहां ले गए हैं।

जबकि मैं गलतियां करती हूं, मैं मसीह के साथ अनुबंध संबंध में रहना चाहती हूं, और मैं आपको बताऊंगी कि क्यों।

मैं बचपन से ही गोताखोरी की शिक्षा ले रही थी और मैंने सीखा था कि जब जज किसी गोते को अंक देते हैं, तो वे आपको गोते लगाते हुए देखते हैं। क्या गोता पूरी तरह से सीधा था, क्या उंगलियां ऊपर की ओर थीं और क्या एक छोटा सा छींटा उठा था? फिर वे कुछ असाधारण काम करते हैं। वे कठिनाई के स्तर को ध्यान में रखते हैं।

हर कोई अपनी कठिनाई के स्तर के अनुसार गोता लगाता है। और आपका उद्धारकर्ता ही एकमात्र ऐसा है जो वास्तव में जानता है कि आप किस कठिनाई से गुजर रहे हैं। मैं ऐसे व्यक्ति के साथ संबंध चाहती हूं जो मुझे समझता हो, जो मेरे हृदय को जानता हो और कि मैं कितनी मेहनत करती हूं!

वह जानता है कि अंधकार की धुंध हम सभी पर छा जाती है और कि हम दूषित जल के झरने के पास से होकर गुजरते हैं—इसलिए जबकि हम लोहे की छड़ को थामे रहते हैं, तब भी हम पर दूषित जल के छींटे पड़ेंगे।

मसीह के निकट यह कहते हुए आना, “क्या आप मेरी सहायता करेंगे?” इस आशा और आश्वासन के साथ, कि उसकी बाहें सदैव आपकी ओर फैली हुई हैं। मेरा मानना ​​है कि पश्चाताप की इस नई समझ का अर्थ है कि भले ही अभी हम परिपूर्ण आज्ञाकारी नहीं हैं फिर भी, हम अब, स्नेहपूर्ण आज्ञाकारी होने का प्रयास करते हैं, बार-बार रुकने का चुनाव करते हैं, क्योंकि हम उससे प्रेम करते हैं।

राजा बिन्यामीन के लोगों को याद करो, जिनमें बुराई करने की प्रवृत्ति नहीं थी, बल्कि वे निरंतर अच्छाई ही करते रहते थे? क्या आपको लगता है कि उन्होंने अपना शिविर लपेटा, घर लौट गए और फिर कभी कोई गलती नहीं की थी? बिलकूल नहीं! अंतर यह है कि वे अब पाप नहीं करना चाहते थे। उनमें स्नेहपूर्ण आज्ञाकारिता थी! जब वे संघर्ष कर रहे थे तो उनके हृदय परमेश्वर की ओर मुड़े हुए थे!

एक बार, समुद्र तट पर, मैंने एक पक्षी को हवा में उड़ते हुए देखा, वह अपने पंखों को अत्यधिक उत्तेजित हो कर फड़फड़ा रहा था, लेकिन एक ही स्थान पर स्थिर था। तभी मैंने ऊपर एक अन्य पक्षी को देखा। उसने ऊपर की ओर हवा का प्रवाह पकड़ लिया था और वह हवा में बिना किसी बोझ के आसानी से तैर रहा था। यही अंतर है इसे स्वयं करने का प्रयास करने और अपने उद्धारकर्ता की ओर मुड़ने, उसे हमें उठाने देने में, “उसकी किरणों के द्वारा” चंगाई पाकर।

ऑस्ट्रेलिया में मिशन के मार्गदर्शकों के रूप में, प्रत्येक प्रचारक के साथ हमारी पिछली मुलाकात के दौरान, हमने 3 नफी 17 के बारे में बात की थी, जहां लोग उद्धारकर्ता के करीब थे और उसे उनके लिए प्रार्थना करते हुए सुन सकते थे। हमने पूछा, “यदि आप उद्धारकर्ता को आपके आपके लिए प्रार्थना करते हुए सुन पाएं, तो आपको क्या लगता है कि वह क्या कहेगा?”

उनके उत्तर को सुनना मेरे जीवन का सबसे अधिक आत्मा से भरा अनुभव था। उनमें से हर एक प्रचारक कुछ देर ठहरती, और उनकी आंखों में आंसू भर आते थे जब हम उन्हें याद दिलाते थे, “आपका उद्धारकर्ता जानता है कि आप कितनी कठिनाई का सामना कर रहे हो। उसने इसे महसूस किया है!”

उन प्रचारकों ने शांतिपूर्वक और कोमलता से यह बात साझा की: एक बहन ने कहा,“यीशु पिता से कहेगा, ‘वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है। मैं जानता हूं कि वह कितनी मेहनत कर रही है।’” एक एल्डर ने कहा, “उनके अपने जीवन में जो कुछ भी हुआ, उसके लिए मुझे उस पर बहुत गर्व है।”

आओ यह प्रयास करते हैं। आज रात, प्रार्थना करने से पहले, कल्पना करें कि यीशु मसीह आपके निकट है। वह पिता के पास आपका सहायक है। अपने आप से पूछें, “मेरा उद्धारकर्ता मेरे बारे में पिता से क्या कहेगा?”

और फिर शांत रहो।

उस आवाज को सुनें जो आपके बारे में अच्छी बातें कहती है—उद्धारकर्ता की आवाज, आपके सबसे अच्छे दोस्त और स्वर्ग में आपके पिता की आवाज, जो वास्तव में वहां है। याद रखें, उनका प्यार और आपका महत्व हमेशा महान है, चाहे कुछ भी हो।

मैं यहां यह गवाही देने के लिए खड़ी हूं कि यीशु मसीह उन लोगों को प्रकाश देता है जो अंधकार में बैठे हैं। तो, उन दिनों जब आपको लगे कि वह आवाज आपको छिपने के लिए कह रही है, कि आपको अकेले एक अंधेरे कमरे में छिप जाना चाहिए मैं आपको साहसी बनने और मसीह पर विश्वास करने के लिए आमंत्रित करती हूं! चलो और प्रकाश जलाओ—हमारी आशा की परिपूर्ण चमक।

आशा के उसके प्रकाश में, आप अपने चारों ओर ऐसे लोगों को देखेंगे जो कभी अकेलेपन का अनुभव करते थे, लेकिन अब, जब प्रकाश आ गया है, तो आप और वे आश्चर्य करेंगे, “हम अंधेरे में इतने भयभीत क्यों थे? और हम वहां इतने लंबे समय तक क्यों रुके रहे थे?”

मेरी प्रार्थना है कि “प्रकाश का प्रभु आपको अपनी बाहों में घेर ले और आपको निरंतर दिलासा और प्यार दे।” हम उससे निरन्तर प्रेम करते रहें और बार-बार उसे चुनें। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

विवरण

  1. उच्चारण “गोंग-गाह।”

  2. यूहन्ना 14:15

  3. अलमा 29:1

  4. देखें अलमा 29:2

  5. देखें अलमा 37:32

  6. यह विचार मेरी बेटी कार्ली रूनिया रेड के साथ बातचीत से आया।

  7. रसल एम. नेल्सन “आत्मिक संवेग की शक्ति,” लियाहोना, मई 2022, 98।

  8. हिलामन 7:17

  9. युवतियों की जनरल सलाहकार परिषद की बहन कैथरीन रेनॉल्ड्स के साथ बातचीत।

  10. सिद्धांत और अनुबंध 20:79

  11. इब्रानियों 12:2

  12. 2 नफी 31:20

  13. यह विचार मेरे साथ एंथनी स्वेट ने साझा किया था; सिद्धांत और अनुबंध 18:13; Dale G. Renlund, “Repentance: A Joyful Choice,” लियाहोना, नवं. 2016, 123 भी देखें।

  14. “प्रार्थना उस पश्चातापी पापी की आवाज है, जो अपने मार्गों से लौट रहा है, जबकि स्वर्गदूत अपने गीतों में आनंदित होकर चिल्लाते हैं, ‘देखो, वह प्रार्थना कर रहा है!’” “Prayer Is the Soul’s Sincere Desire,” Hymns, सं. 145।

  15. देखें सिद्धांत और अनुबंध 18:10

  16. देखें प्रकाशितवाक्य 12:10

  17. देखें निर्गमन 4:10; मूसा 1:20। अध्यक्ष रसल एम. नेल्सन ने हमसे आग्रह किया: “कृपया पश्चाताप करने में न भयभीत हों या न देरी करें। शैतान आपके दुख में प्रसन्न होता है। इसे रोकें। उसके प्रभाव को अपने जीवन से दूर करो!” (“आत्मिक संवेग की शक्ति” 98)।

  18. देखें अलमा 34:31; सिद्धांत और अनुबंध 88:63

  19. देखें सिद्धांत और अनुबंध 88:6

  20. “मसीह के प्रायश्चित के अनंत प्रकाश से नीचे गिरना असंभव है” (Jeffrey R. Holland, “The Laborers in the Vineyard, Liahona, मई 2012, 33)।

  21. सिद्धांत और अनुबंध 18:10

  22. देखें Stephen E. Robinson, Following Christ: The Parable of the Divers and More Good News (1995), 34–38।

  23. देखें 1 नफी 12:16-17

  24. देखें मुसायाह 5:1-5

  25. मालाकी 4:2

  26. देखें Tom Christofferson, “What Would It Be Like to Hear the Savior Pray for You?,” LDS Living, 19 जन. 2021, ldsliving.com।

  27. देखें यशायाह 9:2; सिद्धांत और अनुबंध 11:11

  28. व्यक्तिगत पत्र से जो मेरे पिता, विन्सेंट अलमा वुड ने, मुझे 1979 में ब्रिघम यंग विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान लिखा था।