परिवार प्रकाश की ओर देखते हुए, लवेटा रेयेस काहिरा द्वारा। हेवनलाइट के सौजन्य से
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आपका शरीर पावन है
1 कुरिन्थियों 6:18–20
आपका शरीर आपके स्वर्गीय पिता की ओर से एक अद्भुत उपहार है। शरीर होने से आपको सही और गलत के बीच चुनाव करने की स्वतंत्रता का प्रयोग करने की अधिक शक्ति मिलती है। यीशु मसीह का पुनर्स्थापित सुसमाचार आपको अपने शरीर को परमेश्वर के दृष्टिकोण से देखने में मदद कर सकता है। और इससे आपके शरीर के साथ क्या करना है और उसकी देखभाल कैसे करनी है, इस बारे में आप को चुनाव करने में बहुत बड़ा अंतर पड़ता है।
अनंत सच्चाइयां
आपका शरीर परमेश्वर का स्वरूप है—जो संपूर्ण जगत में अत्यधिक महिमापूर्ण, राजसी जन है। पवित्र शास्त्र हमारे शरीर की तुलना पवित्र मंदिर से करते हैं, एक ऐसा स्थान जहां आत्मा निवास कर सकती है। बेशक, अभी आपका शरीर परिपूर्ण नहीं है। लेकिन आपके शरीर के साथ होने वाले अनुभव आपको एक दिन एक परिपूर्ण, पुनर्जीवित, महिमामय शरीर प्राप्त करने के लिए तैयार होने में मदद कर सकते हैं।
आपका प्राण आपके शरीर और आत्मा से बना है। इस कारण, शारीरिक स्वास्थ्य और आत्मिक स्वास्थ्य आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। उद्धारकर्ता ने आपके शरीर की देखभाल करने के नियमों को सिखाने के लिए—और शारीरिक और आत्मिक आशीषों की प्रतिज्ञा करने के लिए ज्ञान के शब्दों को प्रकट किया था।
सुखी विवाह और अनंत परिवार बनाने के लिए यौन भावनाएं परमेश्वर की योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये भावनाएं पापपूर्ण नहीं हैं—ये पावन हैं। क्योंकि यौन भावनाएं इतनी पावन और शक्तिशाली हैं, इसलिए परमेश्वर ने आपको इन भावनाओं का उपयोग उसकी इच्छानुसार करने के लिए तैयार करने के लिए यौन शुद्धता की व्यवस्था दी है। यौन शुद्धता की व्यवस्था बताती है कि परमेश्वर केवल विवाहित पति और पत्नी के बीच यौन क्रिया को स्वीकृति देता है। बहुत से लोग परमेश्वर की व्यवस्था की उपेक्षा या उसका उपहास भी करते हैं, परन्तु प्रभु हमें अपने शिष्य बनने और संसार से ऊंचे स्तर पर जीवन जीने के लिए आमंत्रित करता है।
आमंत्रण
अपने शरीर और दूसरों के शरीर के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें। जब आप अपने कपड़े, केश और बनावसिंगार के बारे में निर्णय लेते हैं, तो स्वयं से पूछें, “क्या मैं अपने शरीर को परमेश्वर से मिले एक पवित्र उपहार के रूप में सम्मान दे रहा हूं?” स्वर्गीय पिता चाहता है कि हम एक-दूसरे को वैसे देखें जैसे हम वास्तव में हैं: न केवल भौतिक शरीर के रूप में, बल्कि दिव्य नियति वाले उसकी प्रिय संतान के रूप में। ऐसी शैलियों से बचें जो आपके भौतिक शरीर पर अनुचित ध्यान आकर्षित करती या महत्व देती हैं, बजाय इसके कि आप परमेश्वर की संतान हैं जिसका भविष्य अनंत है। नैतिक शुद्धता और परमेश्वर के प्रति प्रेम को अपने निर्णयों का मार्गदर्शक बनाएं। अपने परिवार से सलाह लें।
ऐसे कार्य करो जिससे आपका शरीर मजबूत होगा—ऐसा कुछ भी न करो जिससे उसे कष्ट या नुकसान होगा। परमेश्वर ने जो अनेक अच्छी वस्तुएं प्रदान की हैं, उनका कृतज्ञता के साथ उपयोग करें। याद रखें कि मदिरा, तम्बाकू, कॉफी, चाय और अन्य हानिकारक दवाइयां और पदार्थ आपके शरीर या आपकी आत्मा के लिए नहीं हैं। कई उपयोगी पदार्थ भी, जैसे निर्धारित दवाइयां, यदि सही तरीके से उपयोग न की जाएं तो विनाशकारी हो सकती हैं।
सेक्स और यौन भावनाओं को पवित्र रखें। इन्हें उपहास या मनोरंजन का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। विवाहित पति और पत्नी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के शरीर के निजी, पवित्र अंगों को छूना गलत है, भले ही वे कपड़े पहने हुए हों। आप जो भी करते, देखते, पढ़ते, सुनते, सोचते, पोस्ट करते या संदेश भेजते हैं, उसमें ऐसी किसी भी बात से बचें जो जानबूझकर दूसरों में या आपमें कामुक भावनाएं जगाती हो। इसमें किसी भी रूप में पोर्नोग्राफी शामिल है। यदि आपको लगता है कि परिस्थितियां या गतिविधियां प्रलोभन को और अधिक प्रबल बनाती हैं, तो उनसे बचें। आप जानते हैं कि ये परिस्थितियां और गतिविधियां क्या हैं। और यदि आप नहीं जानते हैं, तो आत्मा, आपके माता-पिता और आपके मार्गदर्शक आपको यह जानने में मदद कर सकते हैं। अपने स्वर्गीय पिता को दिखाएं कि आप जीवन का सृजन करने की पवित्र शक्ति का आदर करते हैं।
प्रतिज्ञा की गई आशीषें
जब आप अपने व्यवहार, बनावसिंगार और पहनावे के द्वारा अपने शरीर का सम्मान करेंगे, आपका स्वयं के प्रति और दूसरों के प्रति सम्मान बढ़ेगा।
उन लोगों से प्रभु ने ज्ञान के महान खजाने की प्रतिज्ञा की है जो ज्ञान के शब्दों का पालन करते हैं। लत से मुक्त स्वस्थ शरीर, व्यक्तिगत प्रकटीकरण प्राप्त करने, स्पष्ट रूप से सोचने और प्रभु की सेवा करने की आपकी क्षमता को भी बढ़ाता है।
यौन शुद्धता की व्यवस्था के अनुसार जीने से परमेश्वर की स्वीकृति और व्यक्तिगत आत्मिक शक्ति मिलती है। यह आपको और आपके भावी परिवार को सुरक्षा देता है। जब आप विवाहित होंगे, तो यह व्यवस्था आपके विवाह में अधिक प्रेम, विश्वास और एकता लाएगी। इस व्यवस्था का पालन करने से आपके लिए अनंत काल तक प्रगति करना और अपने स्वर्गीय पिता के समान बनना संभव हो जाएगा। जब आप यीशु मसीह के शिष्य का जीवन जीते हैं, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
प्रश्न और उत्तर
पहनावा, बनावसिंगार, टैटू और शरीर-छेदन के बारे में प्रभु का मापदंड क्या है? प्रभु का मापदंड यह है कि आप अपने शरीर की पवित्रता का सम्मान करें, भले ही इसका अर्थ अन्य लोगों से अलग होना क्यों न हो। आप जो भी निर्णय लें उसे सच्चाई और आत्मा के मार्गदर्शन के अनुसार लें—विशेषकर ऐसे निर्णय जिनका आपके शरीर पर स्थायी प्रभाव पड़ता है। बुद्धिमान और विश्वासी बनो, और अपने माता-पिता और मार्गदर्शकों से सलाह लो।
मैं प्रलोभनों और बुरी आदतों को कैसे काबू में रख सकता हूं? स्वर्गीय पिता और यीशु मसीह में आपकी सहायता करने की शक्ति है। अपने जीवन को उन बातों से भरें जो आपके जीवन में उनकी शक्ति को आमंत्रित करती हैं, जैसे प्रार्थना, पवित्र शास्त्र अध्ययन और दूसरों की सेवा। यीशु मसीह और उसके सुसमाचार की ओर मुड़ें, और आप पाएंगे कि कमजोरियां शक्ति बन सकती हैं। आवश्यकतानुसार परिवार, मार्गदर्शकों और पेशेवर सलाहकारों से सहायता लें। वे आपको अपने जीवन पर फिर से नियंत्रण पाने में मदद कर सकते हैं। इसमें समय लगेगा, इसलिए धैर्य रखें, और कभी हार न मानें।
मैं अपने ही लिंग के लोगों की ओर आकर्षित होता हूं। ये मापदंड मुझ पर कैसे लागू होते हैं? समान लिंग के प्रति आकर्षण महसूस करना कोई पाप नहीं है। यदि आपके मन में ये भावनाएं हैं और आप उन पर अमल या उनके अनुसार कार्य नहीं करते, तो आप स्वर्गीय पिता की यौन व्यवस्था का पालन कर रहे हैं। आप परमेश्वर की प्रिय संतान और यीशु मसीह के शिष्य हैं। याद रखें कि उद्धारकर्ता आपके अनुभव को समझता है। उसके साथ अनुबंध संबंध के द्वारा, आपको परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करने और उसके द्वारा प्रतिज्ञा की गई आशीषें प्राप्त करने की शक्ति मिलेगी। उस पर और उसके सुसमाचार पर भरोसा रखें।
मेरे साथ दुर्व्यवहार किया गया और मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही है। क्या मैं पाप का दोषी हूं? नहीं। किसी भी दुर्व्यवहार या हमले का शिकार होना आपको पाप का दोषी नहीं बनाता। उद्धारकर्ता आपसे प्रेम करता है। वह आपकी शक्ति है। वह आपकी मदद करना चाहता है, आपको चंगाई देना चाहता है, और आपको शांति देना चाहता है। भरोसेमंद पेशेवर सलाहकार, आपके परिवार के सदस्य और आपके मार्गदर्शक भी मदद कर सकते हैं।
देखें उत्पत्ति 1:27 (हम परमेश्वर के स्वरूप में बनाए गए हैं); यूहन्ना 14:18 (उद्धारकर्ता दिलासा की प्रतिज्ञा करता है); फिलिप्पियों 4:7 (परमेश्वर की शांति समझ से परे है); मुसायाह 2:41 (जो लोग परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करते हैं, वे सांसारिक और आत्मिक रूप से आशीषित होते हैं ); सिद्धांत और अनुबंध 88:15 (आत्मा और शरीर प्राण हैं); 89 (ज्ञान के शब्द); 121:45 (सदगुणी विचारों से भरोसा बढ़ता है)।
मंदिर संस्तुति प्रश्न
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प्रभु ने कहा है कि उसके समक्ष सभी कार्य “शुद्धता से किए जाएं” (सिद्धांत और अनुबंध 42:41)। क्या अपने विचारों और व्यवहार में आप नैतिक स्वच्छता का प्रयास करते हैं ?
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क्या आप यौन-शुद्धता की व्यवस्था का पालन करते हैं ?
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क्या आप ज्ञान के शब्दों को समझते और पालन करते हैं ?