2020–2024
योग्यता निर्दोषता नहीं है
अक्टूबर 2021 महा सम्मेलन


10:52

योग्यता निर्दोषता नहीं है

जब आपको लगता है कि आप कोशिश करने में कई बार विफल रहे हैं, तो मसीह के प्रायश्चित और उस अनुग्रह को याद करें जो इसे संभव बनाता है, असली हैं।

मैंने एक बार अपने फोन पर वॉयस-टू-टेक्स्ट फीचर का उपयोग करते हुए अपनी बेटी और दामाद को संदेश भेजा था। मैंने कहा, “हाए, तुम दोनों। तुम से प्यार करता हूं।” उन्हें संदेश मिला, “ नफरत, तुम दोनों से। तुम से प्यार करना चाहिए।” क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि कितनी आसानी से एक सही और नेक नीयत के संदेश को गलत समझा जा सकता है? कभी-कभी पश्चाताप और योग्यता के परमेश्वर के संदेशों के साथ ऐसा ही होता है।

कुछ गलती से संदेश प्राप्त करते हैं कि पश्चाताप और परिवर्तन अनावश्यक हैं। परमेश्वर का संदेश है कि वे आवश्यक हैं।1 लेकिन क्या परमेश्वर हमारी कमियों के बावजूद हमसे प्यार नहीं करता है? अवश्य ही करता है! वह हमें संपूर्णरूप से प्रेम करता है। मैं अपने नाती-पोतों, से सभी कमियों के होते भी प्यार करता हूं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं नहीं चाहता कि वे सुधार करें और वे सब बनें जो वे बन सकते हैं। परमेश्वर हमें प्यार करता है जैसे भी हम हैं, लेकिन वह हमें बहुत प्यार करता है और चाहता है कि हम सुधार करें।2 प्रभु में आगे बढ़ना ही नश्वरता का मुख्य उद्देश्य है।3 परिवर्तन ही मसीह के प्रायश्चित का मुख्य उद्देश्य है। मसीह न केवल हमें पुनरुत्थान, स्वच्छ, सांत्वना, और चंगाई दे सकता है, बल्कि इन सब के माध्यम से, वह उसके समान बनने के लिए हमारा परिवर्तन कर सकता है।4

कुछ को गलती से संदेश मिलता है कि पश्चाताप एक बार होने वाली घटना है। परमेश्वर का संदेश यह है, जैसा अध्यक्ष रसल एम. नेलसन सिखाया है, “पश्चाताप कोई घटना नहीं है; यह एक प्रक्रिया है।”5 पश्चाताप में समय लग सकता है और बार-बार प्रयास करना पड़ सकता है6 इसलिए पाप को छोड़ना7 और “बुराई करने के लिए स्वभाव नहीं होना है, लेकिन निरंतर भले कार्य करना”8 जीवन भर की गतिविधियां हैं।9

जीवन एक लंबी यात्रा के समान है। हम एक बार टैंक भरा कर अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकते हैं। हमें टैंक को कई बार फिर से भराना होगा। प्रभुभोज लेना पैट्रॉल पंप में तेल भराने के समान है। जब हम पश्चाताप करते और अपने अनुबंधों को नवीन करते हैं, तो हम आज्ञाओं का पालन करने की अपनी इच्छा का सम्मान करते हैं, और परमेश्वर और मसीह हमें पवित्र आत्मा के साथ आशीष देते हैं।10 संक्षेप में, हम अपनी यात्रा पर आगे बढ़ने का वादा करते हैं, और परमेश्वर और मसीह टैंक को फिर से भरने का वादा करते हैं।

कुछ गलती से संदेश प्राप्त करते हैं कि वे सुसमाचार में संपूर्णरूप से भाग लेने के योग्य नहीं हैं क्योंकि वे बुरी आदतों से संपूर्णरूप से मुक्त नहीं हैं। परमेश्वर का संदेश है कि योग्यता निर्दोषता नहीं है।11 योग्यता ईमानदार रहना और कोशिश करते रहना है। हमें परमेश्वर, पौरोहित्य के मार्गदर्शकों और दूसरों के साथ ईमानदार होना चाहिए जो हमसे प्यार करते हैं,12 और हमें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करने का प्रयास करना चाहिए और कभी हार नहीं माननी चाहिए यदि हम असफल रहते हैं।13 एल्डर ब्रूस सी. हैफन ने कहा था कि मसीह समान चरित्र के विकास करने के लिए “धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता से अधिक निर्दोषता की आवश्यकता होती है।”14 प्रभु ने कहा है कि आत्मा के उपहार “उन लोगों के लाभ के लिए दिए गए हैं जो मुझसे प्यार करते हैं और मेरी सभी आज्ञाओं का पालन करते हैं, और उसे जो ऐसा करना चाहता है।”15

एक युवक जिसे मैं डैमन कहूंगा ने लिखा था, “युवा-अवस्था में, मुझे पॉर्नाग्रफी की लत लग गई थी। मैं हमेशा इतना शर्मिंदा महसूस करता था कि मैं इस आदत को छोड़ नहीं पा रहा था।” हर बार जब डैमन असफल होता था, अफसोस का दर्द इतना तीव्र हो जाता था कि उसने स्वयं को परमेश्वर से किसी भी प्रकार की कृपा, क्षमा या अतिरिक्त अवसरों के अयोग्य समझा था । उसने कहा था: “मैंने सोचा लिया था कि मैं केवल हर समय भंयकर पीड़ा महसूस करने के योग्य था। मुझे लगा कि परमेश्वर शायद मुझसे नफरत करता है क्योंकि मैं कठिन काम करने, सफल होने, और इसे निरंतर करने का इच्छुक नहीं था। मैं एक सप्ताह और कई बार एक महीने के लिए भी कोशिश करता था, लेकिन फिर मैं असफल हो जाता और सोचता है, मैं कभी भला नही हो सकता, तो कोशिश करने का भी क्या फायदा है?”

एक ऐसे निराशा पल में, डैमन ने अपने पौरोहित्य मार्गदर्शक से कहा था, “शायद मुझे गिरजे में आना बंद कर देना चाहिए। मैं पाखंडी होने से परेशान हो चुका हूं।”

उनके मार्गदर्शक ने जवाब दिया: “आप पाखंडी नहीं हैं क्योंकि आपके पास एक बुरी आदत है जिसे आप छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। आप एक पाखंडी होते यदि आप इसे छिपाते हैं, इसके बारे में झूठ बोलते हैं, या अपने आप को समझाने की कोशिश करते कि गिरजे के ऐसे उच्च आदर्शों को बनाए रखने एक समस्या है। अपने कार्यों के बारे में ईमानदार होना और आगे बढ़ने के लिए कदम उठाना पाखंडी होना नहीं है। यह एक शिष्य होना है।16 इस मार्गदर्शक ने एल्डर रिचर्ड जी. स्कॉट की शिक्षा को बताते हुए कहा था: “प्रभु कमजोरियों को विद्रोही होने से अलग देखता है। … जब प्रभु कमजोरियों की बात करता है, तो यह हमेशा दया के साथ होता है।17

उस ज्ञान ने डैमन को आशा दी थी। उसे एहसास हुआ कि परमेश्वर ऊपर आकाश से यह नहीं कह रहा था, “डैमन फिर से असफल हो गया है।” इसके बजाय, वह शायद कह रहा था, “देखो डैमन में काफी सुधार हो गया है।” इस युवक ने अंत में शर्मिंदा होना या या इधर-उधर के बहाने बनाना बंद कर दिया था। वह दिव्य मदद के लिए, स्वर्गीय पिता की ओर देखा और उसने इसे पाया।18

डैमन ने कहा: “अतीत में मैंने केवल क्षमा के लिए परमेश्वर से प्रार्थना की थी, लेकिन अब मैंने अनुग्रह—उसकी ‘योग्य बनाने वाली शक्ति’ के लिए भी प्रार्थना की थी [Bible Dictionary, “Grace”]। मैंने ऐसा पहले कभी नहीं किया था। इन दिनों मैं जो मैंने किया है उसके लिए स्वयं से नफरत करने में बहुत कम समय और जो यीशु ने मेरे लिए किया है उस के प्रति प्यार करने में अधिक समय बिताता हूं।”

यह देखते हुए कि डैमन ने कितना लंबा संघर्ष किया था, उसकी मदद करने वाले माता-पिता और मार्गदर्शकों के लिए उससे यह कहना कि वह यह गलती “फिर कभी नहीं” करे या “योग्य” समझे जाने लिए मनमाने ढंग से कुछ मानदंड निर्धारित करना असहायक और अवास्तविक था। इसके बजाय, उन्होंने छोटे, उसके लिए सुगम लक्ष्यों को निर्धारित किया था। उन्होंने सबकुछ या कुछ भी नहीं वाले रवैया का त्याग किया और उसकी धीरे-धीरे हो रही प्रगति पर ध्यान दिया था, जिसने डैमन में विफलताओं के बजाय सफलताओं का निर्माण संभव किया था।19 उसने, लिमही के गुलाम बनाए गए लोगों की तरह, सीखा था कि वह “धीरे-धीरे प्रगति” कर सकता था।20

एल्डर डी. टोड क्रिस्टोफरसन ने सलाह दी है: “कुछ [बहुत] बड़े काम करने के लिए, हमें प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा कर के इस पर काम करने की आवश्यकता हो सकती है। … हमारे चरित्र में नई और अच्छी आदतों को शामिल करने या बुरी आदतों या व्यसनों पर काबू पाने का मतलब है आज एक प्रयास करना और कल दूसरा और फिर एक और, शायद कई दिनों तक, यहां तक कि महीनों और वर्षों तक ऐसा करना है। … लेकिन हम ऐसा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि हम परमेश्वर से याचना कर सकते हैं … मदद के लिए जिसकी हमें प्रत्येक दिन की जरूरत है।”21

अब भाइयों और बहनों, कोविड-19 महामारी किसी के लिए आरामदेह नहीं रही है, लेकिन क्वॉरन्टीन प्रतिबंधों के कारण अकेलेपन ने बुरी आदतों से जूझ रहे लोगों के जीवन को विशेष रूप से कठिन बना दिया है। याद रखें परिवर्तन संभव है, पश्चाताप एक प्रक्रिया है, और योग्यता निर्दोषता नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण, याद रखें कि परमेश्वर और मसीह हमें यहीं और अभी मदद करने के लिए तैयार हैं।22

कुछ को गलती से यह संदेश मिलता है कि परमेश्वर केवल पश्चाताप करने के बाद ही हमारी मदद करता है। परमेश्वर का संदेश है कि वह हमारी मदद करेगा जब हम पश्चाताप करते हैं। उसका अनुग्रह हमारे लिए उपलब्ध है “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम आज्ञाकारिता के मार्ग में कहां हैं।”23 एल्डर डिटर एफ. उक्डोर्फ ने कहा है: “परमेश्वर को ऐसे लोगों की आवश्यकता नहीं है जो निर्दोष हैं। उसे उन लोगों की आवश्यकता है जो ‘हृदय और समर्पित’ मन दे सकते हैं[सिद्धांत और अनुबंध 64:34], और वह उन्हें ‘मसीह में परिपूर्ण’ बनाएग[मोरोनी 10:32–33]।”24

इतने सारे लोग टूटे और तनावपूर्ण पारिवारिक रिश्तों से आहत हुए हैं कि उनके लिए परमेश्वर की करुणा और सहनशीलता में विश्वास करना मुश्किल है। उनके लिए परमेश्वर को—एक प्यारे पिता के रूप में देखना कठिन है जो हमारी आवश्यकता को पूरा करता है25 और जानता है कि “उन्हें अच्छी वस्तुएं कैसे देनी हैं जो उससे मांगते हैं।”26 उसका अनुग्रह मात्र योग्य के लिए पुरस्कार नहीं है। वह “दिव्य सहायता” देता है जो हमें योग्य बनने में मदद करती है। यह सिर्फ धर्मी के लिए उपहार नहीं है। वह “शक्ति का उपहार” देता है जो हमें धर्मी बनने में मदद करता है।27 हम केवल परमेश्वर और मसीह की ओर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। हम उनके साथ चल रहे हैं।28

संपूर्ण गिरजे में, युवा लोग युवतियों और हारूनी पौरोहित्य परिषदों थीम को दोहराते हैं। न्यूजीलैंड से स्पेन से इथियोपिया से जापान तक युवतियां कहती हैं, “मैं पश्चाताप के उपहार को संजोती हूं”। चिली से ग्वाटेमाला से मोरोनी, यूटाह, तक, युवक का कहते हैं, “जब मैं सेवा, विश्वास, पश्चाताप, और प्रत्येक दिन सुधार करने का प्रयास करता हूं, तो मैं मंदिर आशीषें और सुसमाचार का स्थाई आनंद प्राप्त करने के योग्य होता हूं।”

मैं वादा करता हूं कि वे आशीषें और वे खुशियां असली हैं और उन लोगों को प्राप्त हो सकती हैं जो सभी आज्ञाओं का पालन करते हैं और “उन्हें जो ऐसा करना चाहते हैं।”29 जब आपको लगता है कि आप कोशिश करने में कई बार विफल रहे हैं, तो मसीह के प्रायश्चित और उस अनुग्रह को याद करें जो इसे संभव बनाता है, असली हैं।30 “[उसकी] दया की बांह आपकी ओर बढ़ी रहती है।”31 आपसे प्यार किया गया है—इन 20 सालों में, और हमेशा के लिए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन ।

विवरण

  1. देखें यूहन्ना 4:203; अलमा 27:25–16

  2. देखें Neal A. Maxwell, “I Will Arise and Go to My Father,” Ensign, सितं. 1993, 65–68।

  3. देखें हिलामन 3:21

  4. देखें 2 कुरूथिंयों 5:17; मुसायाह 3:19

  5. Russell M. Nelson, “We Can Do Better and Be Better,” Liahona, मई 2019, 67।

  6. देखें मुसायाह 26:30; मोरोनी 6:8; सिद्धांत और अनुबंध 1:31–32

  7. देखें सिद्धांत और अनुबंध 58:43

  8. मुसायाह 5:2

  9. देखें याकूब 6:11; अलमा 15:17

  10. देखें 2 नफी 31:20; मुसायाह 18:10; सिद्धांत और अनुबंध 20:77

  11. देखें लूका 15:11, -32; रोमियां 3:23–25। एल्डर गेरिट डब्ल्यू. गोंग ने कहा था, “योग्य होने का मतलब सही होना नहीं है” (“Always Remember Him,” Liahona, मई 2016, 109)। ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए अध्यक्ष सेसिल ओ. सैमुअलसन ने बताया था: “कोई भी सुसमाचार के अर्थ में पूरी तरह से योग्य हो सकता है और फिर भी व्यक्तिगत खामियों को दूर करने के दौरान विकास कर सकता है। … योग्यता महत्वपूर्ण है, लेकिन यह परिपूर्णता नहीं है” (“Be Ye Therefore Perfect” [Brigham Young University devotional, Sept. 6, 2011], 1, 5, speeches.byu.edu)। एल्डर मारविन जे एश्टन ने कहा: “योग्यता एक प्रक्रिया है, और परिपूर्णता एक अनंत यात्रा है। हम परिपूर्ण हुए बिना कुछ विशेषाधिकारों का आनंद लेने के योग्य हो सकते हैं” (“On Being Worthy,” Ensign, मई1989, 20)।

  12. एल्डर नील एल. एंडरसन ने “समझौतावादी ईमानदारी” का आह्वान किया है और सिखाया है, “ईमानदारी आत्मिकता का दिल है और सच्चे और स्थायी पश्चाताप के केंद्र में होना चाहिए” (The Divine Gift of Forgiveness [2019], 193, 48)।

  13. एल्डर नील एल. एंडरसन ने लिखा था, “हम कई बार पीछे फिसल सकते हैं, लेकिन हमें तुरंत और विनम्रतापूर्वक अपने घुटनों पर लौटना चाहिए और फिर से सही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए” (The Divine Gift of Forgiveness, 208)।

  14. Bruce C. Hafen, The Broken Heart (1989), 186।

  15. सिद्धांत और अनुबंध 46:9; महत्व जोड़ा गया है।

  16. देखें सिद्धांत और अनुबंध 10:67

  17. Richard G. Scott, “Personal Strength through the Atonement of Jesus Christ,” Liahona, नवं. 2013, 83।

  18. देखें सिद्धांत और अनुबंध 6:35-37

  19. अध्यक्ष रसल एम. नेलसन ने कहा था: “हमारी अनंत प्रगति में इस अवसर पर प्रभु हमसे पूर्णता की अपेक्षा नहीं करता है। लेकिन वह अपेक्षा करता है कि हम अत्यधिक शुद्ध बनें” (“We Can Do Better and Be Better,” 68; महत्व जोड़ा गया है)।

  20. मुसायाह 21:16

  21. D. Todd Christofferson, “Recognizing God’s Hand in Our Daily Blessings,” Liahona, जन. 2012, 28–29; D. Todd Christofferson, “The Divine Gift of Repentance,” Liahona, नवं. 2011, 38–41 भी देखें।

  22. देखें यहोशू 1:5, 9; यशायाह 41:10; मत्ती 11:28–30; 2 नफी 28:32; सिद्धांत और अनुबंध 24:8

  23. D. Todd Christofferson, “Free Forever, to Act for Themselves,” Liahona, नवं. 2014, 19।

  24. Dieter F. Uchtdorf, “Five Messages That All of God’s Children Need to Hear” (Brigham Young University devotional, अग. 17, 2021), 3, speeches.byu.edu।

  25. देखें ईथर 1:42-43

  26. 3 नफी 14:11

  27. Dieter F. Uchtdorf, “The Gift of Grace,” Liahona, May 2015, 107; 2 नफी 2:3; याकूब 4:7भी देखें। अध्यक्ष रसल एम. नेलसन ने कहा है, “उसकी परिपूर्ण शक्ति प्राप्त करने के लिए प्रभु हमसे परिपूर्ण विश्वास नहीं चाहता है” (“Christ Is Risen; Faith in Him Will Move Mountains,” Liahona, मई 2021, 102)।

  28. देखें व्यवस्थाविवरण 2:7; मत्ती 1:23; सिद्धांत और अनुबंध 100:12। एल्डर रॉबर्ट ई. वेल्स ने लिखा है: “हमारे स्वर्गीय पिता एक अनुपस्थित परमेश्वर नहीं है, और न ही यीशु मृत है। वे आज इतने प्रासंगिक हैं जितने पहले कभी नहीं रहे हैं” (The Mount and the Master [1991], 26)।

  29. सिद्धांत और अनुबंध 46:9

  30. देखें Sheri Dew, Amazed by Grace (2015), 4।

  31. 3 नफी 09:14