2020–2024
हम मसीह के बारे में बात करते हैं
अक्टूबर 2020 महा सम्मेलन


15:1

हम मसीह के बारे में बात करते हैं

जब संसार यीशु मसीह के बारे में कम बोलता है, तो आइए हम उसके बारे में अधिक बोलें।

मैं आप के प्रति अपने प्रेम व्यक्त करता हूं, हमारे प्रिय मित्रों और भाई बहनों। मैं इन पिछले महीनों के दौरान आपके विश्वास और साहस की प्रशंसा की है, जब इस विश्वव्यापी महामारी ने हमारे जीवन को बाधित किया है और परिवार के अनमोल सदस्यों और प्रिय मित्रों को छीन लिया है।

अनिश्चितता की इस अवधि के दौरान, मैंने अपने दृढ़ और निश्चित समझ के प्रति एक असामान्य कृतज्ञता महसूस की है कि यीशु ही मसीह है। क्या आपने इस प्रकार महसूस किया है? ऐसी कठिनाइयां हैं जो हममें से प्रत्येक की जांच करती हैं, लेकिन हमेशा हमारे सामने, फैली हुई बाहों के साथ, वह है जो विनम्रतापूर्वक घोषित करता है, “मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं।” 1 जब हम शारीरिक रूप से स्वयं को दूसरों से दूर करके चल रहे है, हमें आत्मिक रूप से स्वयं को उससे दूर करने की जरूरत नहीं है, जो निंरतर, बाहें फैलाए हुए, हम से विनती करता है, “मेरे पास आओ।” 2

एक खुले आकाश में एक मार्गदर्शक तारे की तरह, यीशु मसीह हमारे मार्ग को प्रकाश देता है। वह एक विनम्र चरनी में पृथ्वी पर आया था। उसने परिपूर्ण जीवन जीया था। उसने रोगियों को चंगा और मृतक को जीवित किया। वह भुलाए लोगों के लिए मित्र था। उसने हमें अच्छा करना, आज्ञा पालन करना और एक-दूसरे से प्रेम करना सिखाया था। वह क्रूस पर मारा गया, तीन दिन बाद राजसी ढंग से जीवित हुआ, हमें और जिन से हम प्रेम करते हैं, कब्र से परे जीवन जीना संभव कराता है। अपनी अतुलनीय दया और अनुग्रह के साथ, उसने स्वयं पर हमारे पापों और हमारे दुखों उठाया था, जिससे हमारे जीवन के तूफानों में शांति और क्षमा आती है जब हम पश्चाताप करते हैं। हम उससे प्रेम करते हैं। हम उसकी आराधाना करते हैं। हम उसका अनुसरण करते हैं। वह हमारी आत्माओं का लंगर है।

दिलचस्प बात यह है, कि जबकि यह आत्मिक विश्वास हमारे भीतर बढ़ रहा है, संसार में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो यीशु मसीह के बारे में बहुत कम जानते हैं, और, संसार के कुछ हिस्सों में जहां सदियों से उसके नाम की घोषणा की गई, वहां यीशु मसीह में विश्वास कम हो रहा है। यूरोप में साहसी संत ने दशकों से अपने देशों में विश्वास में कमी देखी है।3 दुख की बात है, कि यहां अमेरिका में भी विश्वास घट रहा है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि पिछले 10 वर्षों में अमेरिका में 4 करोड़ लोगों ने यीशु मसीह की दिव्यता में विश्वास करना छोड़ दिया है।4 विश्वव्यापी में खोज, एक अन्य अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले दशकों में, ईसाई धर्म को अपनाने वालों की तुलना में दो गुने से अधिक लोग इसे छोड़ेंगे।5

हम, निस्संदेह, प्रत्येक के चुनने के अधिकार का आदर करते हैं, फिर भी हमारे स्वर्गीय पिता ने कहा था, “यह मेरा प्रिय पुत्र है: उस की सुनो।”6 मैं गवाही देता हूं कि वह दिन आएगा जब हर घुटने को झुकना होगा और हर जीभ स्वीकार करेगी कि यीशु ही मसीह है।7

हम अपनी बदलती दुनिया का जवाब कैसे दे सकते हैं? जबकि कुछ लोग अपने विश्वास की उपेक्षा कर रहे हैं तो दूसरे सच्चाई की खोज कर रहे हैं। हमने अपने ऊपर उद्धारकर्ता का नाम लिया है। हम इससे अधिक क्या करना चाहिए?

अध्यक्ष रसल एम. नेल्सन की तैयारी।

हमारे जवाब का कुछ हिस्सा तब मिलता जब हम समीक्षा करते हैं कि कैसे परमेश्वर ने अध्यक्ष रसल एम. नेलसन को गिरजे का अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने से पहले महीनों तक उन्हें सिखाया था। अपने नियुक्ति से एक साल पहले, अध्यक्ष नेलसन ने हमें Topical Guide 8 में सूचीबद्ध यीशु मसीह नाम के 2200 संदर्भों का गहराई से अध्ययन करने के लिए आमंत्रित किया था।

अध्यक्ष नेल्सन ने धर्मशास्त्रों का अध्ययन करते हुए

तीन महीने बाद, अप्रैल के महा सम्मेलन में उन्होंने बताया था कि कैसे, अपने दशकों के समर्पित शिष्यत्व के साथ, यीशु मसीह के इस गहरे अध्ययन ने उन्हें बहुत प्रभावित किया। बहन वेंडी नेलसन ने उनसे इसके प्रभाव के बारे में पूछा। उन्होंने जवाब दिया, “मैं एक भिन्न व्यक्ति हूं!” वह एक अलग आदमी था? 92 वर्ष की आयु में, एक भिन्न व्यक्ति हैं? अध्यक्ष नेलसन समझाते हैं

“जब हम उद्धारकर्ता और उसके प्रायश्चित बलिदान के बारे में सीखने में समय बीताते हैं, हम [उसके] … निकट हो जाते हैं …

“… हमारा ध्यान उद्धारकर्ता और उसके सुसमाचार पर दृढ़ता से केंद्रित [हो जाता] है।”9

उद्धारकर्ता ने कहा था, “प्रत्येक विचार में मेरी ओर देखों।”10

कार्य, चिंताओं और योग्य प्रयासों के संसार में, हम अपने हृदय, अपने मन और अपने विचार उस पर लगाए रहते हैं जो हमारी आशा और उद्धार है।

यदि उद्धारकर्ता का एक नए सिरे से अध्ययन ने अध्यक्ष नेलसन को तैयार करने में मदद की थी, तो क्या यह हमारी भी मदद नहीं कर सकता है?

अध्यक्ष रसल एम. नेलसन

गिरजे के नाम पर जोर डालते हुए, अध्यक्ष नेलसन ने सिखाया था, “यदि हमें … यीशु मसीह के प्रायश्चित की शक्ति तक पहुंच बनाने चाहते है—हमें शुद्ध और चंगा करने के लिए, हमें मजबूत होने और आगे बढ़ाने के लिए, और अंततः हमें उत्कर्ष तक पहुंचने के लिए—हमें उसे उस शक्ति के स्रोत के रूप में स्पष्ट रूप से स्वीकार करना चाहिए।” 11 अध्यक्ष नेल्सन ने हमें सिखाया है कि निरंतर गिरजे का सही नाम उपयोग करना, यह एक मामूली सी बात लग सकती है, लेकिन मामूली बात बिलकुल नहीं है, और भविष्य को अत्याधिक प्रभावित करेगी।

आपकी तैयारी के लिए एक वादा

मैं आपसे वादा करता हूं कि जब हम स्वयं को तैयार करते हैं, जैसा अध्यक्ष नेलसन ने किया था, तो आप भी अलग होंगे, उद्धारकर्ता के बारे में अधिक सोचेंगे, और उसके बारे में अधिक बार और कम झिझक के साथ बोलेंगे। जब आप उसे जानने और अधिक गहराई से प्रेम करने लगते हैं, तो आपके शब्द सरलता से प्रवाहित होते हैं , जिस प्रकार अपने बच्चों से या एक प्रिय मित्र से बात करते समय प्रबाहित होते हैं। आपको सुनने वालों को बहस करने या आपको खारिज करने के बजाय आपसे सीखने की उम्मीद ज्यादा महसूस होगी।

आप और मैं यीशु मसीह की बात करते हैं, लेकिन शायद हम थोड़ा और बेहतर कर सकते हैं। यदि संसार उसके विषय में अधिक बात नहीं करता है, तो कौन उसके विषय में अधिक बार करेगा? हम हैं! अन्य समर्पित ईसाइयों के साथ!

हमारे घरों में मसीह की बात करें

क्या हमारे घरों में उद्धारकर्ता का प्रतिरूप है? क्या हम अपने बच्चों से यीशु की दृष्टांतों के बारे में अक्सर बात करते हैं? “यीशु की कहानिया हमारे बच्चों के दिलों में विश्वास के अंगारे के बीच एक तेज़ हवा की तरह [हैं]।”12 जब आपके बच्चे आपसे सवाल पूछते हैं, तो सचेत रूप से यह पढ़ाने के बारे में सोचें कि उद्धारकर्ता ने क्या सिखाया। उदाहरण के लिए, यदि आपका बच्चा पूछता है, “पिताजी, हम क्यों करते हैं?” आप कह सकते हैं, “यह बहुत अच्छा प्रश्न है। क्या आपको याद है जब यीशु ने प्रार्थना की थी? आओ हम इस बारे में बात करें कि उसने प्रार्थना क्यों की और उसने प्रार्थना कैसे की थी।

“हम मसीह की बात करते हैं, हम मसीह में आनंदित होते हैं, … कि हमारी संतान जान सके कि वे अपने पापों की क्षमा के लिए किसके पास जाएं।”13

चर्च में मसीह की बात करें

इसी धर्मशास्त्र में कहा गया है कि “हम मसीह का प्रचार करते हैं।”14 हमारी आराधना सभाओं में, आओ हम उद्धारकर्ता यीशु मसीह और उसके प्रायश्चित बलिदान के उपहार पर ध्यान केंद्रित करें। इसका अर्थ यह नहीं है कि हम अपने स्वयं के जीवन के अनुभव नहीं बता या दूसरों से विचार साझा नहीं कर सकते हैं। जबकि हमारा विषय परिवारों या सेवा या मंदिरों या हाल के मिशन के बारे में हो सकता है, हमारी आराधना में सब कुछ प्रभु यीशु मसीह का उल्लेख होना चाहिए।

तीस साल पहले, अध्यक्ष डेलीन एच. ओक्स ने एक पत्र के बारे में बात की थी “एक आदमी जिसने कहा कि वह [एक प्रभु भोज] बैठक में आया था और उद्धारकर्ता के बारे में सुने बगैर उसने सत्रह गवाही सुनी।15 अध्यक्ष ओक्स फिर बोले, “शायद उसने बढ़ा-चढ़ा विवरण दिया हो [लेकिन] मैं इसके बारे में बोल रहा हूं क्योंकि यह हम सभी को एक स्पष्ट बात सीखाता है।”16 फिर उसने हमें अपनी वार्ता और कक्षा चर्चा में यीशु मसीह के बारे में और अधिक बोलने के लिए कहा। मैंने देखा है कि हम अपनी गिरजे की सभाओं में मसीह पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। आओ हम इन बेहद सकारात्मक प्रयासों के साथ निंरतर जागरूक रहें।

दूसरों के साथ मसीह की बात करें

अपने आसपास के लोगों के साथ, हमें अधिक खुलकर बात करें, मसीह के बारे में अधिक बात करने को तैयार हों। अध्यक्ष नेलसन ने कहा, “यीशु मसीह के सच्चे चेले हमेशा तैयार रहते है, और दुनिया के लोगों से अलग दिखाई देते हैं।17

कभी-कभी हम सोचते हैं कि किसी के साथ बातचीत करने के लिए उन्हें गिरजे में आने या प्रचारकों से मिलने की आवश्यकता होती है। जैसा वे चाहते हैं प्रभु उन्हें मार्गदर्शन दें, और हम अपनी जिम्मेदारी के बारे में अधिक सोचे, की उसके लिए एक आवाज बनें, विचारशील हों और अपने विश्वास के बारे में बोले। एल्डर डिएटर एफ. उक्डोर्फ ने हमें सिखाया है कि जब कोई हमें हमारे सप्ताहांत के बारे में पूछता है, तो हमें मुस्कारा कर जवाब देते हुए कहना चाहिए कि हमें प्राथमिक बच्चों का गाना “मैं यीशु की तरह बनने की कोशिश कर रहा हूं” सुनना अच्छा लगता है।18 आइए हम शालीनता से मसीह में अपने विश्वास की गवाही दें। अगर कोई अपने निजी जीवन की कोई समस्या साझा करता है, तो हम कह सकते हैं, “जॉन, मैरी, आप जानते हैं कि मैं यीशु मसीह में विश्वास करता हूं/करती हु। मैं उस बारे में सोच रहा/रही हूं जो उसने कहा था हो सकता इससे आपको मदद मिले।

मसीह में अपने विश्वास के बारे में बात करने में सामाजिक मीडिया पर ईमानदार रहें। अधिकतर लोग हमारे विश्वास का सम्मान करेंगे, लेकिन यदि उद्धारकर्ता की बात करते समय कोई इसे अस्वीकार करता है, तो उसके वादे को याद रखो: “ धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें । … क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है।19 हम अपने स्वयं के अनुयायियों द्वारा “पसंद किए” जाने की तुलना में उसके अनुयायी होने के बारे में अधिक परवाह करते हैं। पतरस ने कहा : “जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने [के लिये] सर्वदा तैयार रहो।”20 आओ हम मसीह के बारे में बात करते हैं।

मॉरमन की पुस्तक यीशु मसीह की एक प्रभावशाली गवाह है। वास्तव में प्रत्येक पृष्ठ उद्धारकर्ता और उसके दिव्य मिशन की गवाही देता है।21 उसके प्रायश्चित और अनुग्रह की समझ उसके पृष्ठों को परिपूर्ण करती है। नए नियम के साथी के रूप में, मॉरमन की पुस्तक हमें बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है कि उद्धारकर्ता हमें बचाने के लिए क्यों आया और हम उसके निकट कैसे आ सकते हैं।

हमारे कुछ साथी मसीही, कभी-कभी, हमारे विश्वासों के बारे में अनिश्चित और हमारे इरादों के बारे में अनिश्चत होते हैं। आइए हम यीशु मसीह में हमारे साझा विश्वास में उनके साथ वास्तव में आनंदित हों और नए नियम धर्मशास्त्रों में जिससे हम सभी प्यार करते हैं। आने वाले वर्षों में, जो लोग यीशु मसीह में विश्वास करेंगे उन्हें एक-दूसरे की मित्रता और समर्थन की आवश्यकता होगी।22

जगत की ज्योति

जब संसार यीशु मसीह के बारे में कम बोलता है, तो आइए हम उसके बारे में अधिक बोलें। जब उसके चेलों के रूप में हमारे असली गुण प्रकट होते हैं, तो हमारे आस-पास के कई लोग सुनने के लिए तैयार होंगे। जब हम उससे प्राप्त प्रकाश को साझा करते हैं, तो उसकी रोशनी और उसकी उत्कृष्ट बचाने की शक्ति उन लोगों पर चमकेगी जो अपने हृदयों को खोलने के इच्छुक हैं। यीशु ने कहा था, “ … मैं जगत की ज्योति बनकर आया हूं।”23

अपनी मजबूत इच्छा से मसीह की बात करना

मसीह के वापस आने के बारे करने सिवाए कोई अन्य बात मुझे अधिक उत्साहित नहीं कर सकती है। जबकि हम नहीं जानते कि वह कब आएगा, उसकी वापसी की घटनाएं उत्साहजनक होंगी! वह अपने सभी पवित्र स्वर्गदूतों के साथ वैभव और महिमा में स्वर्ग के बादलों में आ जाएगा। केवल कुछ स्वर्गदूत नहीं, बल्कि उसके सभी पवित्र स्वर्गदूतों के साथ। ये राफैल द्वारा बनाए गुलाबी केरुबीम नहीं हैं जो हमारे वेलेंटाइन कार्ड पर दिखाई देते हैं। ये सदियों के वे स्वर्गदूत हैं, जिन्हें शेरों का मुंह बंद करने, 24 जेल के दरवाजे खोलने, 25 उसके लंबे-समय से प्रतीक्षित जन्म की घोषणा करने, 26 गत्समनी में उसे ढाढस देने, 27 उसके स्वर्गारोहण में शिष्यों को आश्वस्त करने 28 और सुसमाचार की शानदार पुन:स्थापना आरंभ करने 29 के लिए भेजा गया था।

द्वितीय आगमन

क्या आप उसके साथ सम्मिलित होने की कल्पना कर सकते हैं, बेशक परदे के इस ओर या दूसरी ओर? 30 यह उसकी प्रतिज्ञा धार्मिक है। यह अद्भुत अनुभव हमारी आत्माओं को हमेशा के लिए चिह्नित कर देगा।

हम अपने प्रिय भविष्यवक्ता, अध्यक्ष रसल एम. नेलसन के लिए बहुत आभारी हैं, जिन्होंने उद्धारकर्ता से प्रेम करने और उसकी दिव्यता का प्रचार करने की हमारी इच्छा को बढ़ाया है । मैं उनका मार्गदर्शन के लिए उन पर प्रभु का हाथ और प्रकटीकरण का उपहार होने का चश्मदीद गवाह हूं। अध्यक्ष नेलसन, हम बेसब्री से आपकी सलाह सुनने की प्रतिक्षा कर रहे हैं।

दुनिया भर से मेरे प्यारे दोस्तों, आइए हम मसीह की बात करे, जो उनके शानदार वादे की आशा करते हैं: “जो कोई …मनुष्यों के सामने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के …सामने मान लूगा।”31 मैं गवाही देता हूं कि वह परमेश्वर का पुत्र है। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

विवरण

  1. यूहन्ना 14:6

  2. मत्ती11:28

  3. देखे Niztan Peri-Rotem, “Religion and Fertility in Western Europe: Trends across Cohorts in Britain, France and the Netherlands,” European Journal of Population, May 2016, 231–65, ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4875064.

  4. “[Sixty-five percent] of American adults describe themselves as Christians when asked about their religion, down 12 percentage points over the past decade. Meanwhile, the religiously unaffiliated share of the population, consisting of people who describe their religious identity as atheist, agnostic or ’nothing in particular,’ now stands at 26%, up from 17% in 2009” (Pew Research Center, “In U.S., Decline of Christianity Continues at Rapid Pace,” Oct. 17, 2019, pewforum.org).

  5. See Pew Research Center, “The Future of World Religions: Population Growth Projections, 2010–2050,” Apr. 2, 2015, pewforum.org.

  6. मरकूस 9:7; लूका 9:35; मत्ती 3:17; Joseph Smith—History 1:17

  7. देखे फिलिप्पियों 2:9–11.

  8. See Russell M. Nelson, “Prophets, Leadership, and Divine Law” (worldwide devotional for young adults, Jan. 8, 2017), broadcasts.ChurchofJesusChrist.org.

  9. Russell M. Nelson, “Drawing the Power of Jesus Christ into Our Lives,” Liahona, मई 2017, -41. ।

  10. सिद्धांत और अनुबंध 6:36

  11. Russell M. Nelson, “The Correct Name of the Church,” Liahona, Nov. 2018, 88.

  12. Neil L. Andersen, “Tell Me the Stories of Jesus,” Liahona, May 2010, 108.

  13. 2 नफी 25:26

  14. 2 नफी 25:26

  15. Dallin H. Oaks, “Another Testament of Jesus Christ” (Brigham Young University fireside, June 6, 1993), 7, speeches.byu.edu.

  16. Dallin H. Oaks, “Witnesses of Christ,” Ensign, Nov. 1990, 30.

  17. Russell M. Nelson, “Drawing the Power of Jesus Christ into Our Lives,” 40.

  18. See Dieter F. Uchtdorf, “Missionary Work: Sharing What Is in Your Heart,” Liahona, May 2019, 17; “I’m Trying to Be like Jesus,” Children’s Songbook, 78.

  19. मत्ती 5:11–12

  20. 1 पतरस 3:15

  21. ‘’जैसा कि [मॉरमॉन की पुस्तक में भविष्यवक्ताओं ] ने वादा किए गए मसीहा की अपनी प्रशंसा लिखी थी, उन्होंने प्रत्येक 1.7 पदों के औसत पर उनके नाम के कुछ रूप का उल्लेख किया था। [They] referred to Jesus Christ by, literally, 101 different names. … जब हमें पता चलता है कि एक पद में आम तौर पर एक वाक्य होता है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि हम औसतन, मसीह के नाम के कुछ रूप को देखे बिना मॉर्मन की पुस्तक में दो वाक्य नहीं पढ़ सकते ”(सुसान ईस्टन ब्लैक, मॉर्मन की पुस्तक के माध्यम से मसीह को ढूढना [1987], 5, 15)।

    “While the words atone or atonement, in any of their forms, appear only once in the King James translation of the New Testament, they appear 35 times in the Book of Mormon. As another testament of Jesus Christ, it sheds precious light on His Atonement” (Russell M. Nelson, “The Atonement,” Ensign, Nov. 1996, 35).

  22. Those leaving Christianity in the United States are younger. “More than eight-in-ten members of the Silent Generation (those born between 1928 and 1945) describe themselves as Christians (84%), as do three-quarters of Baby Boomers (76%). n stark contrast, only half of Millennials (49%) describe themselves as Christians; four-in-ten are religious ’nones,’ and one-in-ten Millennials identify with non-Christian faiths” (“In U.S., Decline of Christianity Continues,” pewforum.org).

  23. यूहन्ना 12:46

  24. देखें दानिय्यल 6:22

  25. देखें प्रेरितों के कार्य 5:19

  26. देखें लूका 2:2–14

  27. देखें लूका 22:42-43

  28. देखें प्रेरितो के काम 1:9–11

  29. देखें सिद्धांत और अनुबंध 13; 27:12–13; 110:11–16; Joseph Smith—History 1:27–54.

  30. देखें 1 थिस्सलुनीकियों 4:16–17; सिद्धांत और अनुबंध 88:96–98

  31. मत्ती 10:32